घर में रखी इन आम चीजों से कैंसर का खतरा? डॉक्टरों ने बताई वो 3 आदतें जो 90% बन रही हैं वजह!

घर में रखी इन आम चीजों से कैंसर का खतरा? डॉक्टरों ने बताई वो 3 आदतें जो 90% बन रही हैं वजह!

Cancer Risk Lifestyle: कैंसर को लेकर अक्सर लोग सोचते हैं कि यह किस्मत या जेनेटिक्स की वजह से होता है। लेकिन सच्चाई थोड़ी अलग है। डॉक्टरों और बड़ी हेल्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्यादातर कैंसर हमारी रोजमर्रा की आदतों और आसपास के माहौल से जुड़ा होता है। World Health Organization और Indian Council of Medical Research की रिपोर्ट्स भी यही बताती हैं कि करीब 90-95% कैंसर लाइफस्टाइल और पर्यावरण से जुड़े होते हैं, जबकि सिर्फ 5-10% केस ही जेनेटिक होते हैं।

डॉक्टरों ने बताईं वो 3 बड़ी वजहें

  1. तंबाकू और स्मोकिंग

यह सबसे बड़ा कारण माना जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर के करीब 85% केस सिर्फ स्मोकिंग से जुड़े होते हैं। सिर्फ सिगरेट ही नहीं, गुटखा, पान मसाला और बीड़ी भी उतने ही खतरनाक हैं। अच्छी बात ये है कि इसे छोड़ने के बाद रिस्क धीरे-धीरे कम होने लगता है।

  1. हवा में छुपा जहर (Air Pollution)

International Agency for Research on Cancer ने एयर पॉल्यूशन को “कैंसर पैदा करने वाला” (carcinogenic) माना है।
आजकल शहरों में बढ़ता AQI फेफड़ों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। यही वजह है कि अब नॉन-स्मोकर्स में भी लंग कैंसर के केस बढ़ रहे हैं।

  1. खराब लाइफस्टाइल और डाइट

जंक फूड, कम एक्सरसाइज, नींद की कमी और स्ट्रेस ये सब मिलकर शरीर में सूजन (inflammation) बढ़ाते हैं। National Cancer Institute के मुताबिक, मोटापा और शराब भी कैंसर के बड़े रिस्क फैक्टर हैं। यानी जो हम रोज खाते-पीते हैं, वही धीरे-धीरे शरीर पर असर डालता है।

क्या सच में जेनेटिक्स ही जिम्मेदार है?

नहीं पूरी तरह नहीं। जेनेटिक्स थोड़ा असर जरूर डालता है, लेकिन असली फर्क हमारी आदतें लाती हैं। आसान भाषा में कहें
Genes बंदूक लोड करते हैं, लेकिन ट्रिगर लाइफस्टाइल दबाता है।

कैसे करें बचाव?

  • तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं
  • रोज कम से कम 30 मिनट वॉक करें
  • घर का बना खाना और ताजी सब्जियां खाएं
  • ज्यादा AQI में बाहर कम निकलें
  • अच्छी नींद और स्ट्रेस कंट्रोल पर ध्यान दें
  • समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराएं

समझने वाली बात

आज कैंसर का इलाज पहले से बेहतर हो गया है, लेकिन बचाव अभी भी सबसे ताकतवर हथियार है। छोटी-छोटी आदतें ही बड़ा फर्क डालती हैं। अगर अभी से ध्यान रखा जाए, तो कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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