अलवर शहर के शिवाजी पार्क थाना क्षेत्र स्थित गणपति विहार में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 29 मई की रात करीब 3 बजे एक चोर घर में घुस गया और रिटायर्ड फौजी व रेलवे के पूर्व टीसी अमरीक सिंह के महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा मोबाइल फोन चोरी कर ले गया। आरोप है कि बाद में इन्हीं दस्तावेजों और मोबाइल का इस्तेमाल कर आरोपी ने पीड़ित के बैंक खाते से करीब साढ़े तीन लाख रुपये निकाल लिए। पीड़ित अमरीक सिंह के अनुसार घटना की रात वह घर में सो रहे थे। इसी दौरान चोर घर के अंदर घुस आया और आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड, सैनिक कैंटीन कार्ड, ईसीएचएस कार्ड सहित अन्य जरूरी दस्तावेज समेट लिए। इसके बाद जब वह बिस्तर के सिरहाने रखा मोबाइल फोन उठाकर ले जाने लगा तो अमरीक सिंह की नींद खुल गई। उन्होंने चोर का हाथ पकड़ लिया, लेकिन आरोपी हाथ छुड़ाकर मोबाइल और दस्तावेज लेकर भाग निकला। अमरीक सिंह ने बताया कि वह चोर के पीछे मोहल्ले तक दौड़े और रात में “चोर-चोर” चिल्लाते रहे, लेकिन आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। घटना के बाद उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। चौकाने वाली बात ये रही जब 3 जून को अमरीक सिंह ने अपने बैंक खाते का स्टेटमेंट निकलवाया। स्टेटमेंट देखकर उनके होश उड़ गए। पता चला कि 31 मई से 3 जून के बीच अलवर, किशनगढ़बास और तिजारा क्षेत्र में अलग-अलग ट्रांजेक्शन कर उनके खाते से करीब साढ़े तीन लाख रुपये निकाल लिए गए थे। इसके बाद शिवाजी पार्क थाना पुलिस ने 5 जून को मामला दर्ज किया। हालांकि हैरानी की बात यह रही कि पीड़ित द्वारा घर में चोरी की पूरी घटना बताने के बावजूद पुलिस ने केवल भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) में मुकदमा दर्ज किया। एफआईआर में चोरी की धाराएं नहीं जोड़ी गईं और चोरी की घटना का जिक्र तक नहीं किया गया। रिपोर्ट में केवल इतना उल्लेख किया गया कि पीड़ित के दस्तावेज और मोबाइल गुम हो गए थे। पीड़ित अमरीक सिंह का आरोप है कि उन्होंने पुलिस को स्पष्ट रूप से बताया था कि चोर घर में घुसा था, उन्होंने उसे पकड़ने की कोशिश भी की थी और वह चोरी कर भाग गया था। इसके बावजूद उनकी शिकायत को दस्तावेज गुम होने के रूप में दर्ज कर लिया गया। इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक शर्मा ने कहा कि मामले की जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी। अब सवाल यह है कि जब पीड़ित घर में चोरी की घटना बता रहा है तो फिर एफआईआर में चोरी की धाराएं क्यों नहीं जोड़ी गईं। यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।


