बिहार के जमुई के राहुल की 6 महीने पहले तक पहचान राखी कुमारी के रूप में थी। उन्होंने 6 महीने पहले जेंडर चेंज कराया, लड़की से पुरुष बन गए। इसके बाद राहुल ने फुफेरी बहन BPSC टीचर नयनश्री से 31 मई 2026 को शादी कर ली। अब ये मामला लगातार चर्चा में है। इस बीच दैनिक भास्कर की टीम ने जेंडर चेंज करने को लेकर जमुई के फेमस डॉक्टर सूर्यनंदन से बात की। उन्होंने कहा कि जेंडर चेंज कोई अचानक होने वाली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक लंबी मेडिकल प्रोसेस है। इसमें काउंसलिंग, हार्मोन थेरेपी और जरूरत के अनुसार सर्जरी की जाती है। चर्चा हो रही है कि जेंडर चेंज के बाद क्या कोई जैविक पिता बन सकता है? सेक्स रि-असाइनमेंट सर्जरी क्या है? क्यों महिलाएं-पुरुष जेंडर चेंज करा रहे हैं? इसका क्या प्रोसेस है? इसमें कितना खर्च आता है? साथ ही इसको करवाने में कितना समय लगता है? जेंडर चेंज की जरूरत किन लोगों को महसूस होती है? इन सारे सवालों का जवाब भास्कर एक्सप्लेनर में पढ़िए सवाल 1: जमुई की राखी के राहुल बनने की कहानी क्या है? जवाब: राखी को बचपन से ही लड़कों की तरह कपड़े पहनना और लड़कों के साथ रहना पसंद था। घर में मौजूद बहनें भी उसके साथ भाई की तरह ही व्यवहार करती थीं। राहुल के पिता नारायण दास का कहना है, जैसे-जैसे राखी बड़ी होती गई, उसके व्यवहार में लड़कों जैसी बातें ज्यादा दिखने लगीं। व्यवहार में बदलाव आ गया। धीरे-धीरे 12-13 साल में उसकी आवाज में भारीपन आने लगा। चेहरे पर भी हल्की दाढ़ी-मूंछ आने लगी थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि वो अपने शरीर के साथ कंफर्ट फील नहीं कर रहा था। इसकी वजह से उसने पटना में ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान कई डॉक्टर्स से संपर्क किया। इसके बाद राहुल को लगा कि सर्जरी के बाद सब संभव है। वो अपनी जिंदगी में रिस्क नहीं लेना चाहता था, इसी वजह से उसने दिल्ली के AIIMS को अपना सर्जरी पॉइंट चुना। 2025 के शुरूआत में काउंसलिंग आदि की प्रक्रिया शुरू कराई गई। दिल्ली में ही हार्मोन थेरेपी करवाई, जिससे चेहरे पर अच्छे से दाढ़ी आ गई। आवाज भी ज्यादा भारी हो गई। 2025 के नवंबर में दिल्ली AIIMS में सेक्स रि-असाइनमेंट सर्जरी कराई। इसके बाद 6 महीने तक वो डॉक्टर की निगरानी में ही रहा। महीने में 2 बार वो अपने चेकअप के लिए अस्पताल जाया करता था। जब सब कुछ नॉर्मल हो गया, तो राहुल ने अपनी बचपन की दोस्त नयनश्री से हिंदू रीति-रिवाज में शादी कर ली। फिलहाल, शादी के बाद दोनों पति-पत्नी छुट्टी पर गए हैं। इसकी वजह से हमारी उनसे बात नहीं हो पाई है। सवाल 2: जेंडर चेंज की जरूरत किन लोगों को महसूस होती है? जवाब: डॉक्टर सूर्यनंदन ने दैनिक भास्कर को बताया, हर व्यक्ति का शारीरिक विकास उसके क्रोमोसोम के हिसाब से होता है। सामान्य तौर पर महिला में XX और पुरुष में XY क्रोमोसोम पाए जाते हैं। लेकिन कुछ लोगों में जन्म के समय शरीर का जेंडर अलग होता है, जबकि उनकी पहचान, सोच और व्यवहार दूसरे जेंडर की तरफ महसूस होता है। ऐसे लोगों के लिए मेडिकल साइंस में जेंडर ट्रांजिशन की प्रक्रिया मौजूद है, जिसके जरिए व्यक्ति अपनी पहचान के अनुरूप बदलाव करा सकता है। सवाल 3: जेंडर चेंज की शुरुआत कहां से होती है? जवाब: जेंडर ट्रांजिशन की पहली प्रक्रिया साइकोलॉजिकल काउंसलिंग से होती है। इसमें विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश करते हैं कि व्यक्ति वास्तव में जेंडर चेंज कराना चाहता है या किसी अस्थायी परेशानी की वजह से ऐसा महसूस कर रहा है। काउंसलिंग के दौरान व्यक्ति को इस प्रक्रिया के फायदे, नुकसान और भविष्य में आने वाली चुनौतियों के बारे में जानकारी दी जाती है। जब डॉक्टर को लगता है कि व्यक्ति मानसिक रूप से तैयार है और अपनी इच्छा से यह बदलाव चाहता है, तब आगे की मेडिकल प्रक्रिया शुरू होती है। सवाल 4: सेक्स रि-असाइनमेंट सर्जरी क्या होती है? जवाब: दुनिया में यह सर्जरी 1930 में शुरू हो गई थी। डॉक्टर आशुतोष के मुताबिक, पहली बार जर्मनी में एक शख्स ने सेक्स रि-असाइनमेंट सर्जरी करवाई थी। तब से लेकर अब तक इसके ट्रीटमेंट में काफी बदलाव आ चुका है। नई टेक्नोलॉजी में खर्च भी कम हो चुका है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष सिंह के मुताबिक, जिन लोगों को जेंडर आइडेंटिटी डिसऑर्डर या जेंडर डिस्फोरिया होता है, उनका ही लिंग परिवर्तन किया जाता है। सवाल 5: यह सर्जरी कौन करा सकता है? जवाब: जेंडर डिस्फोरिया होने पर एक लड़का, लड़की की तरह और एक लड़की, लड़के की तरह जीना चाहती है। यानी वे अपोजिट सेक्स में खुद को ज्यादा सहज पाते हैं। कई पुरुषों में बचपन से ही महिलाओं जैसी और कई महिलाओं में पुरुषों जैसी आदतें होती हैं। ये लक्षण 10-12 साल से दिखना शुरू हो जाते हैं। जैसे कोई पुरुष है, तो वह महिलाओं जैसे कपड़े पहनना पसंद करने लगेगा। महिलाओं की तरह चलने की कोशिश करेगा। उन्हीं की तरह इशारे करेगा। ऐसा ही महिलाओं के साथ होता है, जिसमें वे पुरुष की तरह जीना चाहती हैं। ऐसी स्थिति में इन लोगों को सेक्स चेंज करना होता है। जिन लोगों को जेंडर डिस्फोरिया होता है, उनका बाकायदा डिटेल असेसमेंट किया जाता है। यह पता लगाया जाता है कि इसे वाकई जेंडर डिस्फोरिया है या नहीं। यह काम मनोरोग विशेषज्ञ करते हैं। 18 साल की उम्र के बाद ही यह असेसमेंट किया जाता है। क्योंकि, इससे कम उम्र के शख्स को मानसिक तौर पर तैयार नहीं माना जाता। बालिग होने के बाद भी कोई ऐसे लक्षण, आदतें दिखाए तो फिर मनोरोग विशेषज्ञ डिटेल असेसमेंट करते हैं। सवाल 6: इस सर्जरी का प्रोसेस क्या है? खर्च कितना आता है? जवाब: ऐसी सर्जरी करने वाले अपोलो अस्पताल, इंदौर के डॉ.अश्विनी दास से हमने बात की। वह बताते हैं- पुरुष से महिला बनने के लिए करीब 18 और महिला से पुरुष बनने के लिए करीब 33 चरणों से गुजरना पड़ता है। इसमें संबंधित व्यक्ति के लिंग के साथ ही उसके चेहरे, बाल, नाखून, हाव-भाव, हार्मोंस, कान का शेप तक बदल दिया जाता है। हालांकि, यह प्रोसेस काफी खर्चीला है। 10 से 15 लाख रुपए खर्च होते हैं। इसलिए ज्यादातर लोग इन सभी को करवाने की बजाय इनमें से प्रमुख चरणों को करवा लेते हैं, जिसमें दो से ढाई लाख का खर्च आता है। महिला से पुरुष बनने के मुकाबले पुरुष से महिला बनना आसान होता है। अगर कोई पुरुष से महिला बनता है, तो उसके शरीर के भागों से ही सर्जरी के जरिए महिलाओं के अंग बना दिए जाते हैं। इन्हें बनाने में करीब 4 घंटे का समय लगता है। वहीं, ब्रेस्ट के लिए अलग से दो घंटे का ऑपरेशन होता है। ये दोनों ऑपरेशन 3 से 4 महीने के अंतराल में किए जाते हैं। अगर कोई 18 प्रोसेस फॉलो कर पूरी तरह से खुद में बदलाव चाहता है, तो उसे ढाई से तीन साल देने होते हैं। इसमें खर्च भी बढ़ जाता है। लिंग परिवर्तन में हार्मोन थेरेपी बहुत अहम होती है। इसके तहत ही पुरुष में महिला के और महिला में पुरुष के हार्मोन बॉडी में पहुंचाए जाते हैं। सवाल 7: हार्मोन थेरेपी क्या होती है और इससे क्या बदलाव आते हैं? जवाब: डॉक्टर सूर्यनंदन ने बताया, हार्मोन थेरेपी जेंडर ट्रांजिशन का अहम हिस्सा होती है। इसमें शरीर में उन हार्मोन को दिया जाता है, जिससे व्यक्ति के शरीर में दूसरे जेंडर के अनुरूप बदलाव आने लगते हैं। अगर कोई महिला पुरुष बनने की दिशा में जाती है तो उसे टेस्टोस्टेरोन हार्मोन दिया जाता है। वहीं, पुरुष से महिला बनने की प्रक्रिया में अलग तरह की हार्मोन थेरेपी की जाती है। इसके बाद धीरे-धीरे आवाज में बदलाव, दाढ़ी-मूंछ आना, शरीर में फैट का पैटर्न बदलना जैसे बदलाव दिखाई देने लगते हैं। यह प्रक्रिया कई महीनों से लेकर एक-दो साल तक चल सकती है। सवाल 8: क्या हार्मोन थेरेपी हमेशा चलती है? जवाब: डॉक्टर सूर्यनंदन ने बताया, कई लोगों को लंबे समय तक हार्मोन थेरेपी की जरूरत पड़ती है। इसमें नियमित डॉक्टर फॉलोअप जरूरी होता है। अगर कोई व्यक्ति बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेता है या जांच नहीं करवाता है तो साइड इफेक्ट हो सकते हैं। डॉक्टर की निगरानी में इलाज लेने पर इसे काफी हद तक सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है। सवाल 9: क्या सर्जरी के बाद पुरुष बना व्यक्ति संतान पैदा कर सकता है? जवाब: अपोलो हॉस्पिटल (इंदौर) के डॉ.अश्विनी दास (प्लास्टिक सर्जन) इस बारे में बड़ा खुलासा करते हैं। वह कहते हैं- लिंग परिवर्तन के बाद कोई पुरुष महिला से शारीरिक संबंध तो बना सकता है, लेकिन जैविक रूप से पिता नहीं बन सकता। क्योंकि, उसकी जैविक क्षमता में बदलाव नहीं होता। हालांकि, गर्भाधान के लिए कृत्रिम गर्भाधान (आईवीएफ) या सरोगेसी के जरिए पिता बन सकता है। उनके मुताबिक, इस पूरे प्रोसेस में कुदरती चीजें नहीं होती हैं। जैसे ट्रांसवुमन को पीरियड्स नहीं होते। वह मां नहीं बन सकतीं। ऐसे ही ट्रांसमैन में स्पर्म नहीं बनते हैं। वह पिता नहीं बन सकते हैं। राज के मामले में भी ऐसा ही है। सवाल 10: क्या सेक्स रि-असाइनमेंट सर्जरी कराने में जान जाने का भी खतरा है? जवाब: नहीं, ऐसा नहीं है। इस सर्जरी में जान जाने का कोई जोखिम नहीं। लेकिन फिर भी मनोचिकित्सक से क्लीयरेंस के बाद डॉक्टर ब्लड प्रेशर, वजन, हीमोग्लोबिन, फैमिली में शुगर, बीपी, कैंसर, लिवर जैसी बीमारियों की हिस्ट्री पूछते हैं। सर्जरी से पहले कुछ टेस्ट करवाए जाते हैं- जैसे लिवर फंक्शनिंग टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, थायराइड टेस्ट, ब्लड शुगर टेस्ट। इनकी रिपोर्ट नॉर्मल आने पर सर्जरी की जाती है। अगर सेक्स चेंज ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से किसी की मौत हो जाती है, तो संबंधित धारा में केस दर्ज होता है। इस मामले में यह देखा जाता है कि किस तरह की सर्जरी की जा रही थी? इसे कौन कर रहा था? क्या इसमें लापरवाही बरती गई? सवाल 11: जेंडर बदलने को लेकर देश में क्या कानून है? जवाब: जेंडर चेंज के लिए देश में किसी तरह की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील के मुताबिक, सेक्स चेंज कराना ‘राइट ऑफ चॉइस’ के अंतर्गत आता है। सेक्स में बदलाव की आजादी जस्टिस केएस पुट्टास्वामी वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया में 11 जजों की खंडपीठ में दी गई है। इस अधिकार को ‘राइट ऑफ डिग्निटी’ माना गया। यह अधिकार हर व्यक्ति को सम्मान के साथ जिंदगी जीने का अधिकार देता है। हां, अगर कोई व्यक्ति लिंग परिवर्तन करवाना चाहता है तो उससे कानूनी लिखा-पढ़ी जरूर करवाई जाती है। उसे सहमति पत्र (एफिडेविट) देना होता है कि वह लिंग परिवर्तन करवाना चाहता है। सर्जरी से पहले व्यक्ति के परिवार की सहमति भी जरूरी होती है। मनोरोग विशेषज्ञ की अप्रूवल भी लगती है। इससे यह पता चल चलता है कि उसे वाकई जेंडर डिस्फोरिया है और वह अपने मौजूदा लिंग के साथ सहज नहीं है। इसके बाद वह सर्जरी करा सकता है। बिहार के जमुई के राहुल की 6 महीने पहले तक पहचान राखी कुमारी के रूप में थी। उन्होंने 6 महीने पहले जेंडर चेंज कराया, लड़की से पुरुष बन गए। इसके बाद राहुल ने फुफेरी बहन BPSC टीचर नयनश्री से 31 मई 2026 को शादी कर ली। अब ये मामला लगातार चर्चा में है। इस बीच दैनिक भास्कर की टीम ने जेंडर चेंज करने को लेकर जमुई के फेमस डॉक्टर सूर्यनंदन से बात की। उन्होंने कहा कि जेंडर चेंज कोई अचानक होने वाली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक लंबी मेडिकल प्रोसेस है। इसमें काउंसलिंग, हार्मोन थेरेपी और जरूरत के अनुसार सर्जरी की जाती है। चर्चा हो रही है कि जेंडर चेंज के बाद क्या कोई जैविक पिता बन सकता है? सेक्स रि-असाइनमेंट सर्जरी क्या है? क्यों महिलाएं-पुरुष जेंडर चेंज करा रहे हैं? इसका क्या प्रोसेस है? इसमें कितना खर्च आता है? साथ ही इसको करवाने में कितना समय लगता है? जेंडर चेंज की जरूरत किन लोगों को महसूस होती है? इन सारे सवालों का जवाब भास्कर एक्सप्लेनर में पढ़िए सवाल 1: जमुई की राखी के राहुल बनने की कहानी क्या है? जवाब: राखी को बचपन से ही लड़कों की तरह कपड़े पहनना और लड़कों के साथ रहना पसंद था। घर में मौजूद बहनें भी उसके साथ भाई की तरह ही व्यवहार करती थीं। राहुल के पिता नारायण दास का कहना है, जैसे-जैसे राखी बड़ी होती गई, उसके व्यवहार में लड़कों जैसी बातें ज्यादा दिखने लगीं। व्यवहार में बदलाव आ गया। धीरे-धीरे 12-13 साल में उसकी आवाज में भारीपन आने लगा। चेहरे पर भी हल्की दाढ़ी-मूंछ आने लगी थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि वो अपने शरीर के साथ कंफर्ट फील नहीं कर रहा था। इसकी वजह से उसने पटना में ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान कई डॉक्टर्स से संपर्क किया। इसके बाद राहुल को लगा कि सर्जरी के बाद सब संभव है। वो अपनी जिंदगी में रिस्क नहीं लेना चाहता था, इसी वजह से उसने दिल्ली के AIIMS को अपना सर्जरी पॉइंट चुना। 2025 के शुरूआत में काउंसलिंग आदि की प्रक्रिया शुरू कराई गई। दिल्ली में ही हार्मोन थेरेपी करवाई, जिससे चेहरे पर अच्छे से दाढ़ी आ गई। आवाज भी ज्यादा भारी हो गई। 2025 के नवंबर में दिल्ली AIIMS में सेक्स रि-असाइनमेंट सर्जरी कराई। इसके बाद 6 महीने तक वो डॉक्टर की निगरानी में ही रहा। महीने में 2 बार वो अपने चेकअप के लिए अस्पताल जाया करता था। जब सब कुछ नॉर्मल हो गया, तो राहुल ने अपनी बचपन की दोस्त नयनश्री से हिंदू रीति-रिवाज में शादी कर ली। फिलहाल, शादी के बाद दोनों पति-पत्नी छुट्टी पर गए हैं। इसकी वजह से हमारी उनसे बात नहीं हो पाई है। सवाल 2: जेंडर चेंज की जरूरत किन लोगों को महसूस होती है? जवाब: डॉक्टर सूर्यनंदन ने दैनिक भास्कर को बताया, हर व्यक्ति का शारीरिक विकास उसके क्रोमोसोम के हिसाब से होता है। सामान्य तौर पर महिला में XX और पुरुष में XY क्रोमोसोम पाए जाते हैं। लेकिन कुछ लोगों में जन्म के समय शरीर का जेंडर अलग होता है, जबकि उनकी पहचान, सोच और व्यवहार दूसरे जेंडर की तरफ महसूस होता है। ऐसे लोगों के लिए मेडिकल साइंस में जेंडर ट्रांजिशन की प्रक्रिया मौजूद है, जिसके जरिए व्यक्ति अपनी पहचान के अनुरूप बदलाव करा सकता है। सवाल 3: जेंडर चेंज की शुरुआत कहां से होती है? जवाब: जेंडर ट्रांजिशन की पहली प्रक्रिया साइकोलॉजिकल काउंसलिंग से होती है। इसमें विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश करते हैं कि व्यक्ति वास्तव में जेंडर चेंज कराना चाहता है या किसी अस्थायी परेशानी की वजह से ऐसा महसूस कर रहा है। काउंसलिंग के दौरान व्यक्ति को इस प्रक्रिया के फायदे, नुकसान और भविष्य में आने वाली चुनौतियों के बारे में जानकारी दी जाती है। जब डॉक्टर को लगता है कि व्यक्ति मानसिक रूप से तैयार है और अपनी इच्छा से यह बदलाव चाहता है, तब आगे की मेडिकल प्रक्रिया शुरू होती है। सवाल 4: सेक्स रि-असाइनमेंट सर्जरी क्या होती है? जवाब: दुनिया में यह सर्जरी 1930 में शुरू हो गई थी। डॉक्टर आशुतोष के मुताबिक, पहली बार जर्मनी में एक शख्स ने सेक्स रि-असाइनमेंट सर्जरी करवाई थी। तब से लेकर अब तक इसके ट्रीटमेंट में काफी बदलाव आ चुका है। नई टेक्नोलॉजी में खर्च भी कम हो चुका है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष सिंह के मुताबिक, जिन लोगों को जेंडर आइडेंटिटी डिसऑर्डर या जेंडर डिस्फोरिया होता है, उनका ही लिंग परिवर्तन किया जाता है। सवाल 5: यह सर्जरी कौन करा सकता है? जवाब: जेंडर डिस्फोरिया होने पर एक लड़का, लड़की की तरह और एक लड़की, लड़के की तरह जीना चाहती है। यानी वे अपोजिट सेक्स में खुद को ज्यादा सहज पाते हैं। कई पुरुषों में बचपन से ही महिलाओं जैसी और कई महिलाओं में पुरुषों जैसी आदतें होती हैं। ये लक्षण 10-12 साल से दिखना शुरू हो जाते हैं। जैसे कोई पुरुष है, तो वह महिलाओं जैसे कपड़े पहनना पसंद करने लगेगा। महिलाओं की तरह चलने की कोशिश करेगा। उन्हीं की तरह इशारे करेगा। ऐसा ही महिलाओं के साथ होता है, जिसमें वे पुरुष की तरह जीना चाहती हैं। ऐसी स्थिति में इन लोगों को सेक्स चेंज करना होता है। जिन लोगों को जेंडर डिस्फोरिया होता है, उनका बाकायदा डिटेल असेसमेंट किया जाता है। यह पता लगाया जाता है कि इसे वाकई जेंडर डिस्फोरिया है या नहीं। यह काम मनोरोग विशेषज्ञ करते हैं। 18 साल की उम्र के बाद ही यह असेसमेंट किया जाता है। क्योंकि, इससे कम उम्र के शख्स को मानसिक तौर पर तैयार नहीं माना जाता। बालिग होने के बाद भी कोई ऐसे लक्षण, आदतें दिखाए तो फिर मनोरोग विशेषज्ञ डिटेल असेसमेंट करते हैं। सवाल 6: इस सर्जरी का प्रोसेस क्या है? खर्च कितना आता है? जवाब: ऐसी सर्जरी करने वाले अपोलो अस्पताल, इंदौर के डॉ.अश्विनी दास से हमने बात की। वह बताते हैं- पुरुष से महिला बनने के लिए करीब 18 और महिला से पुरुष बनने के लिए करीब 33 चरणों से गुजरना पड़ता है। इसमें संबंधित व्यक्ति के लिंग के साथ ही उसके चेहरे, बाल, नाखून, हाव-भाव, हार्मोंस, कान का शेप तक बदल दिया जाता है। हालांकि, यह प्रोसेस काफी खर्चीला है। 10 से 15 लाख रुपए खर्च होते हैं। इसलिए ज्यादातर लोग इन सभी को करवाने की बजाय इनमें से प्रमुख चरणों को करवा लेते हैं, जिसमें दो से ढाई लाख का खर्च आता है। महिला से पुरुष बनने के मुकाबले पुरुष से महिला बनना आसान होता है। अगर कोई पुरुष से महिला बनता है, तो उसके शरीर के भागों से ही सर्जरी के जरिए महिलाओं के अंग बना दिए जाते हैं। इन्हें बनाने में करीब 4 घंटे का समय लगता है। वहीं, ब्रेस्ट के लिए अलग से दो घंटे का ऑपरेशन होता है। ये दोनों ऑपरेशन 3 से 4 महीने के अंतराल में किए जाते हैं। अगर कोई 18 प्रोसेस फॉलो कर पूरी तरह से खुद में बदलाव चाहता है, तो उसे ढाई से तीन साल देने होते हैं। इसमें खर्च भी बढ़ जाता है। लिंग परिवर्तन में हार्मोन थेरेपी बहुत अहम होती है। इसके तहत ही पुरुष में महिला के और महिला में पुरुष के हार्मोन बॉडी में पहुंचाए जाते हैं। सवाल 7: हार्मोन थेरेपी क्या होती है और इससे क्या बदलाव आते हैं? जवाब: डॉक्टर सूर्यनंदन ने बताया, हार्मोन थेरेपी जेंडर ट्रांजिशन का अहम हिस्सा होती है। इसमें शरीर में उन हार्मोन को दिया जाता है, जिससे व्यक्ति के शरीर में दूसरे जेंडर के अनुरूप बदलाव आने लगते हैं। अगर कोई महिला पुरुष बनने की दिशा में जाती है तो उसे टेस्टोस्टेरोन हार्मोन दिया जाता है। वहीं, पुरुष से महिला बनने की प्रक्रिया में अलग तरह की हार्मोन थेरेपी की जाती है। इसके बाद धीरे-धीरे आवाज में बदलाव, दाढ़ी-मूंछ आना, शरीर में फैट का पैटर्न बदलना जैसे बदलाव दिखाई देने लगते हैं। यह प्रक्रिया कई महीनों से लेकर एक-दो साल तक चल सकती है। सवाल 8: क्या हार्मोन थेरेपी हमेशा चलती है? जवाब: डॉक्टर सूर्यनंदन ने बताया, कई लोगों को लंबे समय तक हार्मोन थेरेपी की जरूरत पड़ती है। इसमें नियमित डॉक्टर फॉलोअप जरूरी होता है। अगर कोई व्यक्ति बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेता है या जांच नहीं करवाता है तो साइड इफेक्ट हो सकते हैं। डॉक्टर की निगरानी में इलाज लेने पर इसे काफी हद तक सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है। सवाल 9: क्या सर्जरी के बाद पुरुष बना व्यक्ति संतान पैदा कर सकता है? जवाब: अपोलो हॉस्पिटल (इंदौर) के डॉ.अश्विनी दास (प्लास्टिक सर्जन) इस बारे में बड़ा खुलासा करते हैं। वह कहते हैं- लिंग परिवर्तन के बाद कोई पुरुष महिला से शारीरिक संबंध तो बना सकता है, लेकिन जैविक रूप से पिता नहीं बन सकता। क्योंकि, उसकी जैविक क्षमता में बदलाव नहीं होता। हालांकि, गर्भाधान के लिए कृत्रिम गर्भाधान (आईवीएफ) या सरोगेसी के जरिए पिता बन सकता है। उनके मुताबिक, इस पूरे प्रोसेस में कुदरती चीजें नहीं होती हैं। जैसे ट्रांसवुमन को पीरियड्स नहीं होते। वह मां नहीं बन सकतीं। ऐसे ही ट्रांसमैन में स्पर्म नहीं बनते हैं। वह पिता नहीं बन सकते हैं। राज के मामले में भी ऐसा ही है। सवाल 10: क्या सेक्स रि-असाइनमेंट सर्जरी कराने में जान जाने का भी खतरा है? जवाब: नहीं, ऐसा नहीं है। इस सर्जरी में जान जाने का कोई जोखिम नहीं। लेकिन फिर भी मनोचिकित्सक से क्लीयरेंस के बाद डॉक्टर ब्लड प्रेशर, वजन, हीमोग्लोबिन, फैमिली में शुगर, बीपी, कैंसर, लिवर जैसी बीमारियों की हिस्ट्री पूछते हैं। सर्जरी से पहले कुछ टेस्ट करवाए जाते हैं- जैसे लिवर फंक्शनिंग टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, थायराइड टेस्ट, ब्लड शुगर टेस्ट। इनकी रिपोर्ट नॉर्मल आने पर सर्जरी की जाती है। अगर सेक्स चेंज ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से किसी की मौत हो जाती है, तो संबंधित धारा में केस दर्ज होता है। इस मामले में यह देखा जाता है कि किस तरह की सर्जरी की जा रही थी? इसे कौन कर रहा था? क्या इसमें लापरवाही बरती गई? सवाल 11: जेंडर बदलने को लेकर देश में क्या कानून है? जवाब: जेंडर चेंज के लिए देश में किसी तरह की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील के मुताबिक, सेक्स चेंज कराना ‘राइट ऑफ चॉइस’ के अंतर्गत आता है। सेक्स में बदलाव की आजादी जस्टिस केएस पुट्टास्वामी वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया में 11 जजों की खंडपीठ में दी गई है। इस अधिकार को ‘राइट ऑफ डिग्निटी’ माना गया। यह अधिकार हर व्यक्ति को सम्मान के साथ जिंदगी जीने का अधिकार देता है। हां, अगर कोई व्यक्ति लिंग परिवर्तन करवाना चाहता है तो उससे कानूनी लिखा-पढ़ी जरूर करवाई जाती है। उसे सहमति पत्र (एफिडेविट) देना होता है कि वह लिंग परिवर्तन करवाना चाहता है। सर्जरी से पहले व्यक्ति के परिवार की सहमति भी जरूरी होती है। मनोरोग विशेषज्ञ की अप्रूवल भी लगती है। इससे यह पता चल चलता है कि उसे वाकई जेंडर डिस्फोरिया है और वह अपने मौजूदा लिंग के साथ सहज नहीं है। इसके बाद वह सर्जरी करा सकता है।


