6 मई को फाफामऊ ब्रिज पर चलते समय मेरे ऊपर गलत कमेंट किए गए। फॉर्च्यूनर कार सवार लोगों ने गंदे इशारे किए और अभद्र भाषा बोले रहे थे। मेरी गाड़ी को बार-बार ओवरटेक कर रहे थे। हमें लगा ये लोग हमारा पीछा कर रहे हैं। हम लोग डर गए। थोड़ी दूर आगे जाने के बाद मेरे सहकर्मी के पास एक खिलौना पिस्टल थी, जिससे उसने हवा में फायर किया। इसके बाद देखा कि सामने वाले लोग रुक गए, तो हम वहां से आगे निकल गए। ये बातें प्रयागराज में पूर्व छात्रनेता पर फायरिंग के मामले में आरोपी बनाई गईं महिला प्रिंसिपल प्रियदर्शिनी सिंह ने जमानत पर छूटकर आने के बाद कही। उन्होंने कहा- पूरे मामले में मुझे ही मुल्जिम बना दिया गया। पुलिस एक एक्षीय कार्रवाई कर रही है। जबकि कोर्ट परिसर में वकील रजनीश सिंह ने मुझे कहा- जो उस दिन नहीं कर पाया, वह बाहर आकर करूंगा। तुम्हें नहीं छोड़ूंगा। अब पढ़िए महिला प्रिंसिपल ने जो बताया-
प्रयागराज में स्टेनली रोड प्रियदर्शिनी सिंह रहती हैं। वह बिशप जॉनसन स्कूल (जूनियर विंग) कटरा की प्रिंसिपल हैं। उन्होंने कहा- मेरे साथ गलत हुआ है। वकील रजनीश ने सिर्फ अपनी बात सामने रखी और यह नहीं बताया कि उन्होंने हमारे साथ क्या किया। वहां से हम किसी तरह निकलकर अपने घर पहुंचे। 7 मई को मुझे पता चला कि मीडिया में यह खबर चल रही है कि उन पर जानलेवा हमला हुआ, जबकि यह पूरी तरह गलत है। प्रिंसिपल प्रियदर्शिनी सिंह ने बताया- पुलिस मेरे घर पहुंची और मेरे पिता के साथ भी बदसलूकी की गई। बाद में मुझे कालिंदीपुरम से उठाया गया, लेकिन यह तक नहीं बताया गया कि मुझे क्यों ले जाया जा रहा है। यह घटना 6 मई की रात करीब 11 से 11:30 बजे की है। मैंने किसी को नहीं उकसाया
आरोपी प्रिंसिपल प्रियदर्शिनी सिंह ने कहा- मैंने किसी को भी उकसाया नहीं। जिस तरह की हरकत वे लोग कर रहे थे, उससे हमें लगा कि मामला और बढ़ सकता है और हाथापाई तक पहुंच सकता है। इसलिए उन्हें डराने के लिए हवा में फायर किया गया। वह भी एक नकली यानी खिलौने वाली बंदूक थी। उसमें ऐसा कुछ नहीं था। उन्होंने कहा- एक महीने पहले, 4 अप्रैल को भी मेरे साथ ऐसी घटना हो चुकी थी। उस मामले में मैंने तीन थानों में तहरीर दी थी। उस समय भी मेरी गाड़ी का पीछा किया गया था और मेरे साथ अभद्रता हुई थी। मैंने 112 नंबर पर भी कॉल किया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से हमने अपनी सुरक्षा के लिए एहतियात के तौर पर एक खिलौना पिस्टल रखा हुआ है। घटना वाली रात इसलिए नहीं की शिकायत
उस समय हमें लगा कि सामने वाले लोग डर गए हैं, इसलिए इस बात को ज्यादा बढ़ाने की जरूरत नहीं है। लेकिन हमें नहीं पता था कि इसे इतना बड़ा मुद्दा बना दिया जाएगा। वे लोग अपनी सुरक्षा और आगे के चुनाव को लेकर इसे मुद्दा बनाएंगे, चक्का जाम की धमकी देंगे और लाइमलाइट में आने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा- मुझे अपनी जान का खतरा है। पहले किसी ने मेरा पक्ष नहीं सुना, इसलिए अब मुझे सामने आकर अपनी बात रखनी पड़ रही है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहती हूं कि जो वास्तव में पीड़ित है, उसकी बात सुनी जाए। यह देखा जाए कि किसकी गलती है। तथाकथित अधिवक्ता क्या कह रहे हैं और मैं क्या कह रही हूं, दोनों पक्षों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस मामले को जबरन मुद्दा बनाया जा रहा है। अब जानिए क्या था मामला
रजनीश कुमार सिंह श्रीया अपार्टमेंट बाबा चौराहे के पास रहते हैं। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी रह चुके हैं। वर्तमान में वह खुद को हाई कोर्ट का अधिवक्ता बताते हैं। उन्होंने बताया- 6 मई की रात वह अपने गांव बनवीपपुर से घर लौट रहे थे। तभी शिवकुटी में स्टैनली रोड पर कैंटोमेंट एरिया के पास काले रंग की थार ने उनकी फॉर्च्यूनर को ओवरटेक किया। इसमें तीन लोग सवार थे। थार जैसे ही ओवरटेक कर आगे निकली, इसमें सवार लोगों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बदमाशों ने एक के बाद एक छह राउंड फायर किए और फिर भागने लगे। खदेड़ने पर कलश चौराहे से बाएं मुड़कर कुछ दूर तक जाने के बाद थार छोड़कर भाग निकले। गाड़ी पर नंबर प्लेट नहीं थी। सूचना पर शिवकुटी पुलिस आ गई। हालांकि, घटना की लिखित जानकारी देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। शीशा नीचे कर ललकारा, मार दो इनको
पीड़ित रजनीश कुमार सिंह ने पुलिस को बताया- कार में महिला सवार थी। उसने विंडो ग्लास नीचे करके कहा था कि मार दो इनको। इसके बाद ही उसके बगल में ड्राइविंग सीट पर बैठे थार चालक ने गोलियां चलाईं। पीड़ित ने बताया कि अगले दिन वह शिकायत लेकर पुलिस कमिश्रनर जोगेंद्र कुमार और एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ. अजयपाल शर्मा के पास पहुंचे। दोनों अफसरों की फटकार के बाद शिवकुटी पुलिस ने 7 मई की दोपहर में 1:16 मिनट पर मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में बिशप जॉनसन स्कूल एक्सटेंशन विंग की प्रिंसिपल प्रियदर्शिनी सिंह को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि उनके उकसाने पर फायरिंग की गई। हालांकि पर्याप्त सबूत प्रस्तुत न करने का हवाला देकर न्यायालय ने उन्हें 8 मई को जमानत दे दी थी। ————————– ये खबर भी पढ़ें
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