रतलाम जिले की आलोट विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर नौकरशाही की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। अपनी ही सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए भाजपा विधायक ने मुख्य सचिव से लेकर कलेक्टर स्तर तक प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव और रिस्ट्रक्चरिंग की मांग की है। महापौर, विधायक से नहीं मिलीं कलेक्टर डॉ. चिंतामणि मालवीय ने प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार पर गहरी नाराजगी जताते हुए कई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में मंदसौर की महापौर और भाजपा की वरिष्ठ नेता की पत्नी रमा देवी गुर्जर जब कलेक्टर से मिलने पहुंचीं, तो उनके साथ भाजपा जिला अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों को एक घंटे तक इंतजार कराया गया। इसके बाद भी कलेक्टर ने उनसे अपने चैंबर में मुलाकात न करके बाहर मुलाकात की। विधायक ने रतलाम जिला पंचायत अध्यक्ष लाला बाई का उदाहरण देते हुए बताया कि वह अपने पति के साथ दोपहर 12 बजे कलेक्टर से मिलने गई थीं, लेकिन शाम तक उन्हें बाहर प्रतीक्षा करनी पड़ी। शाम को कलेक्टर अपने चैंबर से बाहर निकलीं मगर उनसे बिना मिले ही चली गईं, जिसके चलते मजबूर होकर लाला बाई को सीढ़ियों पर बैठकर धरना देना पड़ा। पूर्व गृह मंत्री को फर्श पर बैठना पड़ा तब एफआईआर हुई विधायक ने पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के बेहद वरिष्ठ नेता हिम्मत कोठारी का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले एक मीसा बंदी का प्लॉट किसी ने हड़प लिया था और पुलिस उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही थी। इस पर वरिष्ठ नेता हिम्मत कोठारी को स्वयं एसपी ऑफिस में फर्श पर बैठकर धरना देना पड़ा, तब कहीं जाकर रिपोर्ट दर्ज हुई। उन्होंने भिंड में विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह और कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के बीच हुए विवाद का भी उल्लेख किया। भोपाल में देशभर के 50 अफसरों ने जमीन खरीद कर रोड़ बनवाई नौकरशाही में भ्रष्टाचार और संपत्तियों का ब्यौरा देते हुए डॉ. मालवीय ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भोपाल के बुराड़ी घाट में 4 अप्रैल 2022 को मध्य प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली कैडर के करीब 50 आईएएस और कुछ आईपीएस अधिकारियों ने एक ही दिन में लगभग 11 बीघा जमीन की रजिस्ट्रियां कराईं। इसके ठीक 10 महीने बाद वहां से 3,200 करोड़ रुपए की लागत वाला वेस्टर्न कॉरिडोर रोड निकाला गया, जिससे 85 रुपए प्रति वर्गफीट की जमीन की कीमत बढ़कर 3,000 से 4,000 रुपए स्क्वायर फीट हो गई। करीब साढ़े पांच करोड़ में खरीदी गई जमीन की कीमत 80-90 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, लेकिन इस पर बड़ा शोर मचने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। उन्होंने आगे बताया कि मध्य प्रदेश कैडर के कुछ और वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें तीन पूर्व मुख्य सचिव वीरा राणा, इकबाल सिंह बैस, बसंत प्रताप सिंह और राधेश्याम जुलानिया शामिल हैं, उन्होंने भोपाल के लो-डेंसिटी कैचमेंट एरिया में जमीनें खरीदीं। उस क्षेत्र में सघन बस्तियां बनाने पर रोक होने के बावजूद न केवल मकान बनाए गए, बल्कि विशेष रूप से उनके मकानों के लिए सड़कें भी बनाई गईं। आईएएस अफसरों पर नहीं हो पाती कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए भाजपा विधायक ने कहा कि देश में कुल 7,672 आईएएस अधिकारी हैं, लेकिन बमुश्किल 10 ऐसे मामले ध्यान में आते हैं जहां इन पर कड़ी कार्रवाई हुई हो। उन्होंने बी. चंद्रकला, पूजा सहगल, प्रदीप शर्मा सहित मध्य प्रदेश के आईएएस दंपति अरविंद-टीनू जोशी (जिनकी 360 करोड़ की संपत्ति जब्त हुई) और छत्तीसगढ़ कैडर के बाबूलाल अग्रवाल (जिनकी 500 करोड़ की संपत्ति जब्त हुई) का उदाहरण दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर यह संस्था इतनी मजबूत और अधिकार संपन्न क्यों है? अमेरिका में कलेक्टर जैसी व्यवस्था नहीं इतिहास का हवाला देते हुए डॉ. मालवीय ने कहा कि अमेरिका या किसी अन्य देश में कलेक्टर जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। वहां शक्तियों का बराबर विभाजन है, वित्त का काम एक्सपर्ट देखते हैं और पुलिस नगर सरकार के अधीन होती है। भारत में कलेक्टर व्यवस्था इसलिए इतनी प्रभावी है क्योंकि कानून-व्यवस्था, विकास, आपदा प्रबंधन, भू-प्रबंधन, राजस्व और मजिस्ट्रेट के सारे अधिकार एक ही व्यक्ति को सौंप दिए गए हैं। यह व्यवस्था ब्रिटिश काल की देन है, जब 1772 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने शाह आलम द्वितीय से टैक्स कलेक्शन का अधिकार लेकर कलेक्टर नियुक्त किए थे। 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश क्राउन ने मिलिट्री के अलावा शासन चलाने के लिए आईसीएस (इंडियन सिविल सर्विसेज) की शुरुआत की। स्वतंत्रता के बाद संविधान में कार्यपालिका को विधायिका के अधीन रखा गया था। केन्द्र सरकार में चीफ सेक्रेटरी और एसीएस की व्यवस्था नहीं विधायक ने केंद्र और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार में एक बेहतरीन ढांचा है, जहां कैबिनेट सेक्रेटरी के बाद हर विभाग का केवल एक ही सेक्रेटरी होता है। वहां प्रिंसिपल सेक्रेटरी या एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (एसीएस) जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। इसके विपरीत राज्यों में एक मुख्य सचिव के बाद कई सीनियर आईएएस अधिकारियों को एसीएस बनाकर पांच-सात विभाग सौंप दिए जाते हैं। ऐसी स्थिति में एक मंत्री के पास केवल एक विभाग होता है जबकि अधिकारी के पास कई विभाग, जिससे मंत्रियों को मनोवैज्ञानिक रूप से कम तवज्जो मिलती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था अप्रत्यक्ष रूप से काॅर्पोरेट में बदल रही डॉ. चिंतामणि मालवीय ने चिंता जताई कि मध्य प्रदेश में शक्तियों का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है। व्यावहारिक रूप से शक्ति न तो जनता के पास है और न ही जनप्रतिनिधियों के पास, बल्कि यह पूरी तरह कार्यपालिका के हाथों में सिमट गई है। विधानसभा सत्र कम समय चलने के कारण अधिकारियों से जवाब-तलब नहीं हो पाता, जिससे सरकार का स्वरूप कॉर्पोरेट जैसा हो गया है। संविधान के अनुच्छेद 311 के कारण इन अधिकारियों पर कार्रवाई या छापे के लिए स्वयं सरकार यानी आईएएस संगठन से ही अनुमति लेनी पड़ती है, जो अपनी मजबूत यूनियन के कारण किसी पर आंच नहीं आने देते। प्रोटोकॉल में विधायक के बाद आते हैं सीएस विधायक ने प्रोटोकॉल का जिक्र करते हुए कहा कि प्रोटोकॉल सूची में विधायक और महापौर 23वें नंबर पर आते हैं, जबकि मुख्य सचिव उनके बाद आते हैं और कलेक्टर तो बहुत दूर हैं। इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों को अपमानित करने वाले अधिकारियों के खिलाफ दंड की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। डॉ. मालवीय ने इस पूरी स्थिति को लोकतांत्रिक व्यवस्था का कॉर्पोरेट में बदलना बताते हुए सभी राजनेताओं और आम जनता से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया है।


