सिलीगुड़ी-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का सर्वे जुलाई से होगा शुरू:किशनगंज समेत बिहार के कई शहर जुड़ेंगे, 2 घंटे 55 मिनट में सफर

सिलीगुड़ी-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का सर्वे जुलाई से होगा शुरू:किशनगंज समेत बिहार के कई शहर जुड़ेंगे, 2 घंटे 55 मिनट में सफर

पूर्वी भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। प्रस्तावित सिलीगुड़ी-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए जुलाई 2026 से सर्वेक्षण कार्य शुरू होने की संभावना है। यह परियोजना पूर्वी भारत का पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर होगी, जो पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश को तेज रफ्तार रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। लगभग 700 से 744 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर वाराणसी से सिलीगुड़ी तक की यात्रा को मात्र 2 घंटे 55 मिनट में पूरा करेगा। वर्तमान में इस दूरी को तय करने में 12 से 15 घंटे लगते हैं। वहीं, पटना से वाराणसी का सफर केवल 50 मिनट में तय होने की उम्मीद है। इस रूट पर बुलेट ट्रेनें 300 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। जुलाई से हवाई और जमीनी सर्वेक्षण होगा शुरू नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इस परियोजना के लिए सर्वेक्षण टीम का गठन कर लिया है। जुलाई 2026 से हवाई और जमीनी सर्वेक्षण शुरू किया जाएगा। उन्नत लेजर तकनीक का उपयोग कर जमीन, नदियों और पहाड़ी क्षेत्रों का सटीक नक्शा तैयार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मिट्टी की जांच और पिलर मार्किंग का कार्य भी किया जाएगा। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) मार्च 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य है। इस डीपीआर में रूट का तकनीकी डिजाइन, अनुमानित लागत, भूमि अधिग्रहण योजना, स्टेशन निर्माण और संचालन से संबंधित सभी जानकारी शामिल होगी। केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। 2031 तक बुलेट ट्रेन का संचालन होगा शुरू उम्मीद है कि वर्ष 2031 तक इस रूट पर बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू हो सकता है। प्रस्तावित कॉरिडोर वाराणसी से शुरू होकर बिहार से गुजरते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा। बिहार में इस परियोजना का सबसे लंबा हिस्सा होगा, जिसमें लगभग 650 किलोमीटर ट्रैक एलिवेटेड बनाया जाएगा। इस रूट पर वाराणसी, बक्सर, आरा, पटना, बेगूसराय, कटिहार, किशनगंज और सिलीगुड़ी स्टेशन प्रस्तावित हैं।यह कॉरिडोर पूर्वांचल, बिहार और उत्तरी बंगाल के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देगा। इसके माध्यम से व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। साथ ही सिलीगुड़ी कॉरिडोर उत्तर-पूर्व भारत का प्रवेश द्वार माना जाता है, इसलिए यह परियोजना रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से भी काफी अहम मानी जा रही है। पूर्वी भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। प्रस्तावित सिलीगुड़ी-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए जुलाई 2026 से सर्वेक्षण कार्य शुरू होने की संभावना है। यह परियोजना पूर्वी भारत का पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर होगी, जो पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश को तेज रफ्तार रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। लगभग 700 से 744 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर वाराणसी से सिलीगुड़ी तक की यात्रा को मात्र 2 घंटे 55 मिनट में पूरा करेगा। वर्तमान में इस दूरी को तय करने में 12 से 15 घंटे लगते हैं। वहीं, पटना से वाराणसी का सफर केवल 50 मिनट में तय होने की उम्मीद है। इस रूट पर बुलेट ट्रेनें 300 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। जुलाई से हवाई और जमीनी सर्वेक्षण होगा शुरू नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इस परियोजना के लिए सर्वेक्षण टीम का गठन कर लिया है। जुलाई 2026 से हवाई और जमीनी सर्वेक्षण शुरू किया जाएगा। उन्नत लेजर तकनीक का उपयोग कर जमीन, नदियों और पहाड़ी क्षेत्रों का सटीक नक्शा तैयार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मिट्टी की जांच और पिलर मार्किंग का कार्य भी किया जाएगा। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) मार्च 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य है। इस डीपीआर में रूट का तकनीकी डिजाइन, अनुमानित लागत, भूमि अधिग्रहण योजना, स्टेशन निर्माण और संचालन से संबंधित सभी जानकारी शामिल होगी। केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। 2031 तक बुलेट ट्रेन का संचालन होगा शुरू उम्मीद है कि वर्ष 2031 तक इस रूट पर बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू हो सकता है। प्रस्तावित कॉरिडोर वाराणसी से शुरू होकर बिहार से गुजरते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा। बिहार में इस परियोजना का सबसे लंबा हिस्सा होगा, जिसमें लगभग 650 किलोमीटर ट्रैक एलिवेटेड बनाया जाएगा। इस रूट पर वाराणसी, बक्सर, आरा, पटना, बेगूसराय, कटिहार, किशनगंज और सिलीगुड़ी स्टेशन प्रस्तावित हैं।यह कॉरिडोर पूर्वांचल, बिहार और उत्तरी बंगाल के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देगा। इसके माध्यम से व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। साथ ही सिलीगुड़ी कॉरिडोर उत्तर-पूर्व भारत का प्रवेश द्वार माना जाता है, इसलिए यह परियोजना रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से भी काफी अहम मानी जा रही है।  

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