बिहार में गिरते पुलों पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस:राज्य को मिली पहली ‘पुल प्रबंधन-संधारण नीति’, पटना हाईकोर्ट में जारी है निगरानी

बिहार में गिरते पुलों पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस:राज्य को मिली पहली ‘पुल प्रबंधन-संधारण नीति’, पटना हाईकोर्ट में जारी है निगरानी

साल 2024 में बिहार में मॉनसून के दौरान गिरते पुलों की घटनाओं ने न केवल राज्य की आधारभूत संरचना पर सवाल खड़े किए, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा पर भी बड़ा संकट पैदा कर दिया था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, बिहार के नालंदा के एक जागरूक नागरिक और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ब्रजेश सिंह ने 3 जुलाई, 2024 को सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की। इस याचिका ने बिहार में पुलों के निर्माण, रखरखाव और सुरक्षा ऑडिट की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव की नींव रखी है। बिहार सरकार को नोटिस जारी सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए न केवल बिहार सरकार को नोटिस जारी किया, बल्कि 2 अप्रैल, 2025 को मामले को पटना उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया ताकि वहां की निगरानी में पुलों के ऑडिट और स्थिरता की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जा सके। याचिका के दौरान सरकार की ओर से प्रस्तुत हलफनामों से राज्य की चिंताजनक स्थिति उजागर हुई, जिसमें यह स्वीकार किया गया कि 1975 से अब तक निर्मित 2000 से अधिक पुलों में सुल्तानगंज-अगवानी जैसे निर्माणाधीन पुल का गिरना एक विफलता थी। वहीं, ग्रामीण विकास विभाग के निरीक्षण में सामने आया कि कुल 46,009 पुल और पुलियाओं में से लगभग 5% उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं हैं, जिनका पुनर्निर्माण अनिवार्य है, जबकि 15% में तत्काल सुधार की आवश्यकता है। याचिकाकर्ता की प्रमुख मांगों में शामिल ‘उच्च स्तरीय स्ट्रक्चरल ऑडिट’ और ‘वास्तविक समय पुल रखरखाव नीति’ के निर्माण के दबाव में, बिहार सरकार ने 6 जून, 2025 को ‘बिहार राज्य पुल प्रबंधन एवं संधारण नीति, 2025’ लागू कर दी। यह राज्य के इतिहास में अपनी तरह की पहली नीति है, जिसके तहत पुलों का ‘हेल्थ कार्ड’ तैयार किया जा रहा है। अब पुलों की मरम्मत का निर्णय मनमाने तरीके से नहीं, बल्कि ‘ब्रिज हेल्थ इंडेक्स’ (BHI) और ‘मेंटेनेंस प्रायोरिटी इंडेक्स’ के आधार पर लिया जाएगा। इस नीति के पहले चरण में 60 मीटर से 1000 मीटर तक के पुलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 85 महत्वपूर्ण पुलों का विस्तृत ऑडिट काम जारी वर्तमान में, पटना उच्च न्यायालय की कड़ी निगरानी में आईआईटी पटना की ओर से 250 मीटर से बड़े 85 महत्वपूर्ण पुलों का विस्तृत ऑडिट काम जारी है। इसमें से 45 पुलों की सुरक्षा जांच पूरी हो चुकी है, जिसमें नालंदा जिले के पुल भी शामिल हैं। इसके अलावा, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम और एनएचएआई (NHAI) भी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले पुलों के सर्वे और रखरखाव में जुटी हैं। वकील ब्रजेश सिंह ने स्पष्ट किया कि याचिका का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा स्थायी निकाय बनाना है जो भविष्य में भी राज्य के सभी पुलों की सतत निगरानी कर सके। फिलहाल, यह मामला पटना उच्च न्यायालय में लंबित है और गर्मी की छुट्टियों के बाद अगली सुनवाई में इस पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी। साल 2024 में बिहार में मॉनसून के दौरान गिरते पुलों की घटनाओं ने न केवल राज्य की आधारभूत संरचना पर सवाल खड़े किए, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा पर भी बड़ा संकट पैदा कर दिया था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, बिहार के नालंदा के एक जागरूक नागरिक और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ब्रजेश सिंह ने 3 जुलाई, 2024 को सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की। इस याचिका ने बिहार में पुलों के निर्माण, रखरखाव और सुरक्षा ऑडिट की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव की नींव रखी है। बिहार सरकार को नोटिस जारी सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए न केवल बिहार सरकार को नोटिस जारी किया, बल्कि 2 अप्रैल, 2025 को मामले को पटना उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया ताकि वहां की निगरानी में पुलों के ऑडिट और स्थिरता की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जा सके। याचिका के दौरान सरकार की ओर से प्रस्तुत हलफनामों से राज्य की चिंताजनक स्थिति उजागर हुई, जिसमें यह स्वीकार किया गया कि 1975 से अब तक निर्मित 2000 से अधिक पुलों में सुल्तानगंज-अगवानी जैसे निर्माणाधीन पुल का गिरना एक विफलता थी। वहीं, ग्रामीण विकास विभाग के निरीक्षण में सामने आया कि कुल 46,009 पुल और पुलियाओं में से लगभग 5% उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं हैं, जिनका पुनर्निर्माण अनिवार्य है, जबकि 15% में तत्काल सुधार की आवश्यकता है। याचिकाकर्ता की प्रमुख मांगों में शामिल ‘उच्च स्तरीय स्ट्रक्चरल ऑडिट’ और ‘वास्तविक समय पुल रखरखाव नीति’ के निर्माण के दबाव में, बिहार सरकार ने 6 जून, 2025 को ‘बिहार राज्य पुल प्रबंधन एवं संधारण नीति, 2025’ लागू कर दी। यह राज्य के इतिहास में अपनी तरह की पहली नीति है, जिसके तहत पुलों का ‘हेल्थ कार्ड’ तैयार किया जा रहा है। अब पुलों की मरम्मत का निर्णय मनमाने तरीके से नहीं, बल्कि ‘ब्रिज हेल्थ इंडेक्स’ (BHI) और ‘मेंटेनेंस प्रायोरिटी इंडेक्स’ के आधार पर लिया जाएगा। इस नीति के पहले चरण में 60 मीटर से 1000 मीटर तक के पुलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 85 महत्वपूर्ण पुलों का विस्तृत ऑडिट काम जारी वर्तमान में, पटना उच्च न्यायालय की कड़ी निगरानी में आईआईटी पटना की ओर से 250 मीटर से बड़े 85 महत्वपूर्ण पुलों का विस्तृत ऑडिट काम जारी है। इसमें से 45 पुलों की सुरक्षा जांच पूरी हो चुकी है, जिसमें नालंदा जिले के पुल भी शामिल हैं। इसके अलावा, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम और एनएचएआई (NHAI) भी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले पुलों के सर्वे और रखरखाव में जुटी हैं। वकील ब्रजेश सिंह ने स्पष्ट किया कि याचिका का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा स्थायी निकाय बनाना है जो भविष्य में भी राज्य के सभी पुलों की सतत निगरानी कर सके। फिलहाल, यह मामला पटना उच्च न्यायालय में लंबित है और गर्मी की छुट्टियों के बाद अगली सुनवाई में इस पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी।  

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