Summer Skin Problems : डर्मेटोलॉजिस्ट ने समझाया गर्मी में स्किन इंफेक्शन और घमौरियों के बीच का अंतर; बचाव के टिप्स भी शेयर किए

Summer Skin Problems : डर्मेटोलॉजिस्ट ने समझाया गर्मी में स्किन इंफेक्शन और घमौरियों के बीच का अंतर; बचाव के टिप्स भी शेयर किए

Summer Skin Problems Cause: गर्मी के मौसम पर त्वचा की समस्या का बढ़ना एक आम दिक्कत मानी जाती है। आपने बहुत सारे लोगों से कहते हुए सुना होगा कि उनकी त्वचा पर लाल दाने निकल रहे हैं। डॉक्टर मनजीत चौधरी, डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताया कि गर्मी में निकलने वाले हर लाल दाने घमौरियां नहीं होते, यह स्किन इन्फेक्शन भी हो सकता है। आइए, इस बात को नीचे विस्तार से समझते हैं।

क्यों निकलते हैं गर्मी में लाल दाने?

डॉक्टर के अनुसार, घमौरियां का कारण शरीर की पसीने की ग्रंथियों का ब्लॉक हो जाना है। गर्मियों में जब बहुत ज्यादा पसीना आता है और वह स्किन की बाहरी परत के नीचे ही जमा हो जाता है, तो वहां सूजन आ जाती है। यही सूजन छोटे-छोटे लाल दानों के रूप में शरीर पर दिखाई देती हैं।

संभावित कारण- जिन लोगों को पसीना ज्यादा आता है, स्किन फ्रेंडली ड्रेस नहीं पहनते या जो लोग बहुत ज्यादा टाइट कपड़े पहनते हैं, उनमें यह समस्या ज्यादा देखने को मिल सकती है।

घमौरियां क्या है?

घमौरियां असल में गर्मी और उमस के दिनों में त्वचा पर निकलने वाले छोटे-छोटे लाल दाने होते हैं। जब बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है, तो हमारे शरीर से निकलने वाला पसीना स्किन के रोमछिद्रों के बंद होने के कारण बाहर नहीं आ पाता और अंदर ही जमा हो जाता है। इसी वजह से त्वचा के नीचे सूजन आ जाती है, जो बारीक दानों के रूप में दिखाई देती है और इनमें तेज खुजली, जलन या सुई जैसी चुभन होती है। कुछ लोगों के लिए ये दर्दनाक भी हो सकता है।

कब होता है घमौरियां का संकेत?

  • दाने वाली जगह पर सुई जैसी चुभन।
  • तेज खुजली और जलन होना।
  • बारीक दाने में पानी भरा हुआ दिखना।

स्किन इंफेक्श के संकेत : गर्मी में त्वचा पर सिर्फ लाल रैशेज व खुजली होना, दाद (Ringworm) की तरह गोल लाल धब्बे, जांघों के बीच या बगल में लालिमा आदि स्किन इंफेक्शन के संकेत हो सकते हैं।

घमौरियों से बचने के उपाय

  • ढीले और सूती कपड़े पहनें।
  • दिन में दो बार नहाएं।
  • हैवी क्रीम या ऑयल न लगाएं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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