Sukma farmers: सुकमा जिले के ग्राम पंचायत गोण्डेरास के ग्रामीणों ने क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर शासन-प्रशासन के सामने तीन सूत्रीय मांग रखी है। ग्रामीणों ने वर्तमान धान उपार्जन केंद्र गादीरास (माटेमरका) से हटाकर गांव को नजदीकी अरनपुर उपार्जन केंद्र से जोड़ने, पात्र परिवारों को बिजली कनेक्शन और मीटर देने तथा पुजारीपाल से पेरमापारा तक करीब 5 किमी मिट्टी-मुरुम सड़क निर्माण की मांग की है।
115 किमी दूर धान खरीदी केंद्र, किसानों को परेशानी
सरपंच बंजामी जोगा ने बताया कि गोण्डेरास के किसानों का पंजीयन वर्तमान में गादीरास (माटेमरका) धान उपार्जन केंद्र में है। इसकी दूरी करीब 115 किमी होने के कारण किसानों को धान परिवहन में भारी परेशानी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण कई किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने से भी वंचित रह जाते हैं।
वहीं, अरनपुर का शासकीय धान उपार्जन केंद्र गोण्डेरास से महज 8 किमी दूर है। ग्रामीणों ने गोण्डेरास के साथ पुजारीपाल, सोफीरास, माटेम, पोरदेम और नीलावाया के किसानों को भी अरनपुर केंद्र से जोड़ने की मांग की है।
घरों तक नहीं पहुंची बिजली
ग्रामीणों ने बिजली व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि करीब 3-4 वर्ष पहले विद्युत पोल और लाइन विस्तार का काम हो चुका है, लेकिन कई घरों में अब तक कनेक्शन और मीटर नहीं लगाए गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार बिजली आपूर्ति फिलहाल ट्रांसफार्मर तक सीमित है। बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई सहित रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने सौभाग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को तत्काल बिजली कनेक्शन देने की मांग की है।
पेरमापारा तक करीब 5 किमी सड़क नहीं, बारिश में थम जाता है आवागमन
तीसरी मांग पुजारीपाल से पेदापारा, नेण्डीपारा होते हुए पेरमापारा तक करीब 5 किमी सड़क निर्माण की है। ग्रामीणों के अनुसार मार्ग कच्चा होने से बारिश के दिनों में आवागमन बाधित हो जाता है। बीमार, गर्भवती महिलाओं और आपातकालीन मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है। 108 एंबुलेंस की पहुंच भी प्रभावित होती है। स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को रोजाना आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से तीनों मांगों पर जल्द कार्रवाई कर नजदीकी धान खरीदी केंद्र की सुविधा, घर-घर बिजली और सड़क निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

