लखनऊ की सड़कों पर बढ़ती ई-रिक्शों की संख्या और उससे बिगड़ती यातायात व्यवस्था पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र की अधिसूचना के कारण ई-रिक्शों के लिए पंजीकरण और परमिट की जरूरत नहीं है, जिससे इनकी संख्या पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। राज्य सरकार के अधिकारियों को अगली सुनाई में बुलाया है। रेलवे, बस स्टेशन और चौराहों पर ई-रिक्शा की भरमार सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि उत्तर प्रदेश मोटर वाहन नियमावली के नियम 178 के तहत किसी सड़क के खास हिस्से पर वाहनों के चलने पर रोक लगाई जा सकती है। परिवहन आयुक्त ने इस बारे में पुलिस आयुक्त को पत्र भी भेजा है। इस मामले पर पुलिस आयुक्त के स्तर पर विचार किया जा रहा है और जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि उसके द्वारा बनाई गई एसआईटी भी परिवहन आयुक्त के पत्र को ध्यान में रखते हुए पुलिस आयुक्त को अपनी सिफारिश देगी। अधिसूचना जारी होने के बाद जिन रास्तों पर रोक लगेगी, वहां ई-रिक्शों का संचालन रोका जाएगा। कोर्ट ने ई-रिक्शों की अव्यवस्थित पार्किंग पर भी चिंता जताई। सुनवाई में सामने आया कि रेलवे और बस स्टेशनों के साथ-साथ बड़े चौराहों के आसपास बड़ी संख्या में ई-रिक्शे खड़े रहते हैं, जिससे यातायात पर असर पड़ता है। नगर निगम, यातायात और पुलिस विभाग मिलकर ई-रिक्शों की पार्किंग और यात्रियों को बैठाने-उतारने के लिए जगह तय करेंगे। व्यवस्था संभालने के लिए कॉन्स्टेबल भर्ती कर रहे राज्य सरकार ने बताया कि यातायात कॉन्स्टेबलों के लिए अलग कैडर बनाने का प्रस्ताव फिलहाल सही नहीं पाया गया है। इसके बजाय यातायात व्यवस्था के लिए 1028 कॉन्स्टेबलों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा, पूरे प्रदेश के लिए 11 ट्रैफिक इंस्पेक्टर और 1277 ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टरों की भर्ती प्रक्रिया भी जारी है। कोर्ट को बताया गया कि फिलहाल लखनऊ के अलग-अलग चौराहों पर करीब 1200 कर्मचारी यातायात संभालने में लगे हैं। सरकार के अनुसार, इस संख्या को बढ़ाकर करीब 1500 करने की जरूरत है। 153 कमियां चिह्नित की थीं, रिपोर्ट SIT को सौंपी न्यायालय को यह भी बताया गया कि पॉलिटेक्निक से कामता चौराहे तक जाने वाली सड़क पर 153 कमियां चिह्नित की गई थीं। संबंधित विभाग को इनके सुधार के लिए सूचित किया गया है। नगर निगम ने दावा किया कि आवश्यक कार्रवाई कर अनुपालन रिपोर्ट एसआईटी को सौंप दी गई है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को तय की है। उस दिन उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता और नगर निगम आयुक्त द्वारा नामित अपर नगर आयुक्त को न्यायालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

