सिवनी में NHM संविदा कर्मचारियों की हड़ताल शुरू:नियमितीकरण समेत आठ मांगों को लेकर आंदोलन

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों ने मंगलवार से सिवनी जिले में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। वे नियमितीकरण सहित अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सैकड़ों संविदा कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र समाधान की मांग की। एनएचएम जिला अध्यक्ष धीरज पाल ने बताया कि मध्य प्रदेश में लगभग 32 हजार संविदा कर्मचारी पिछले दो दशकों से स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में भी अपनी जान जोखिम में डालकर जनता की सेवा की, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है। पाल ने यह भी बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 4 जुलाई 2023 को भोपाल में आयोजित महापंचायत में संविदा कर्मचारियों के हित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं। इसके बाद 23 जुलाई को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नई नीति भी जारी की गई, लेकिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी सुविधाओं में कटौती की गई है, जिससे उनमें भारी नाराजगी है। भाजपा नगर अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन हड़ताल स्थल पर भारतीय जनता पार्टी के उत्तर मंडल के नगर अध्यक्ष युवराज राहंगडाले नगर मंत्रियों के साथ पहुंचे। संविदा कर्मचारियों ने उन्हें भी अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। राहंगडाले ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाया जाएगा। हड़ताली कर्मचारियों ने जिला चिकित्सालय के सामने स्थित हनुमान मंदिर जाकर हनुमानजी के नाम भी ज्ञापन की प्रति प्रतिमा के सामने रखी और प्रसाद वितरित किया। संविदा कर्मचारियों की मांगें संविदा कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में रिक्त पदों पर 50 प्रतिशत संविदा कर्मियों का नियमितीकरण, अर्जित अवकाश (ईएल) और मेडिकल सुविधाओं की बहाली, अनुबंध और अप्रेजल प्रणाली की समाप्ति, सेवानिवृत्ति आयु पुनः 65 वर्ष किया जाना, एनपीएस, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य बीमा तथा महंगाई भत्ते की सुविधा प्रदान करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, वेतन विसंगतियों का निराकरण और निष्कासित सपोर्ट स्टाफ तथा मलेरिया कर्मियों की पुनः नियुक्ति की मांग भी की गई है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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