अररिया में बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर रविवार को अररिया प्रखंड के साहसमल पंचायत सरकार भवन में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर जिला न्यायालय अररिया के जिला जज गुंजन पांडेय और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव रोहित श्रीवास्तव के निर्देशानुसार आयोजित हुआ। शिविर का संचालन पैनल अधिवक्ता बिमल कुमार सिंह (पीएलवी) और सतीश कुमार ने किया। इसमें स्थानीय सरपंच तंजिला, कचहरी सचिव गुंजन कुमारी, न्याय मित्र बीरेंद्र कुमार यादव, वार्ड सदस्य दुर्गानंद पासवान, मृत्युंजय, मनोज, विजय, बुधनी देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। संबंधित जागरूकता पर विशेष जोर दिया अधिवक्ताओं ने राष्ट्रीय लोक अदालत की उपयोगिता और निःशुल्क कानूनी सहायता व सलाह प्राप्त करने की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जरूरतमंद लोग जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से बिना किसी खर्च के कानूनी मदद प्राप्त कर सकते हैं। इस दौरान बाल विवाह, बाल श्रम, दहेज प्रथा और विश्व तंबाकू दिवस से संबंधित जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया। मौजूद सख्त कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी पैनल अधिवक्ता बिमल कुमार सिंह ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह बच्चों के समग्र विकास को भी बाधित करता है। उन्होंने दहेज प्रथा को एक सामाजिक बुराई बताते हुए इसके खिलाफ मौजूद सख्त कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। बाल श्रम की रोकथाम पर जोर देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार के काम पर लगाना गैरकानूनी है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने तंबाकू के सेवन से होने वाले गंभीर नुकसानों के बारे में बताया और युवा पीढ़ी से इससे दूर रहने की अपील की। अधिवक्ताओं ने मौके पर ही समाधान प्रदान किया ग्रामीणों ने शिविर को अत्यंत उपयोगी बताया और अपनी कई कानूनी समस्याओं से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका अधिवक्ताओं ने मौके पर ही समाधान प्रदान किया। सरपंच तंजिला ने ऐसे शिविरों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि कानूनी जागरूकता गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार, भविष्य में ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक गति दी जाएगी। यह शिविर सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाने और ग्रामीणों को उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ। अररिया में बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर रविवार को अररिया प्रखंड के साहसमल पंचायत सरकार भवन में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर जिला न्यायालय अररिया के जिला जज गुंजन पांडेय और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव रोहित श्रीवास्तव के निर्देशानुसार आयोजित हुआ। शिविर का संचालन पैनल अधिवक्ता बिमल कुमार सिंह (पीएलवी) और सतीश कुमार ने किया। इसमें स्थानीय सरपंच तंजिला, कचहरी सचिव गुंजन कुमारी, न्याय मित्र बीरेंद्र कुमार यादव, वार्ड सदस्य दुर्गानंद पासवान, मृत्युंजय, मनोज, विजय, बुधनी देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। संबंधित जागरूकता पर विशेष जोर दिया अधिवक्ताओं ने राष्ट्रीय लोक अदालत की उपयोगिता और निःशुल्क कानूनी सहायता व सलाह प्राप्त करने की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जरूरतमंद लोग जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से बिना किसी खर्च के कानूनी मदद प्राप्त कर सकते हैं। इस दौरान बाल विवाह, बाल श्रम, दहेज प्रथा और विश्व तंबाकू दिवस से संबंधित जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया। मौजूद सख्त कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी पैनल अधिवक्ता बिमल कुमार सिंह ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह बच्चों के समग्र विकास को भी बाधित करता है। उन्होंने दहेज प्रथा को एक सामाजिक बुराई बताते हुए इसके खिलाफ मौजूद सख्त कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। बाल श्रम की रोकथाम पर जोर देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार के काम पर लगाना गैरकानूनी है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने तंबाकू के सेवन से होने वाले गंभीर नुकसानों के बारे में बताया और युवा पीढ़ी से इससे दूर रहने की अपील की। अधिवक्ताओं ने मौके पर ही समाधान प्रदान किया ग्रामीणों ने शिविर को अत्यंत उपयोगी बताया और अपनी कई कानूनी समस्याओं से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका अधिवक्ताओं ने मौके पर ही समाधान प्रदान किया। सरपंच तंजिला ने ऐसे शिविरों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि कानूनी जागरूकता गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार, भविष्य में ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक गति दी जाएगी। यह शिविर सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाने और ग्रामीणों को उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।


