Speaker Om Birla से मिलीं BJP सांसद, JNU उत्पीड़न केस में Congress MP पर कार्रवाई की मांग

Speaker Om Birla से मिलीं BJP सांसद, JNU उत्पीड़न केस में Congress MP पर कार्रवाई की मांग

15 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महिला सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। उन्होंने कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिन पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की 11 छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में BJP महिला मोर्चा की प्रभारी डॉ. दग्गुबाती पुरंदेश्वरी के साथ-साथ सांसद बांसुरी स्वराज और रूप कुमारी चौधरी शामिल थीं। उन्होंने एक पत्र सौंपा, जिसमें इन आरोपों की गंभीरता, विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच और अकोइजम के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई का जिक्र किया गया था।

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पत्र में कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया को लेकर चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि यह मामला “महिलाओं के सम्मान, छात्राओं की सुरक्षा, सार्वजनिक जीवन में नैतिक जवाबदेही और राजनीतिक दलों के आचरण” से जुड़ा है। पत्र में विस्तार से बताया गया है कि 11 छात्राओं ने अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं। अकोइजम, मणिपुर से कांग्रेस सांसद बनने से पहले JNU में प्रोफेसर थे। विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की जांच में इन आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके परिणामस्वरूप 9 अक्टूबर, 2026 को उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया।

BJP प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले में दर्ज एक FIR का भी जिक्र किया और अपने ज्ञापन के साथ इससे जुड़े जरूरी दस्तावेज भी संलग्न किए। यह घटनाक्रम जवाबदेही तय करने की बीजेपी की लगातार मांगों के बाद सामने आया है। इससे पहले, पार्टी के महिला विंग ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से संपर्क कर मामले में हस्तक्षेप करने और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की थी।

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ओम बिरला से मुलाकात के बाद, बीजेपी सांसद दग्गुबाती पुरंदेश्वरी ने कहा कि हमने एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें बताया गया है कि कांग्रेस सांसद बिमोल को आंतरिक समिति ने दोषी पाया है। इसलिए, हमने स्पीकर से अनुरोध किया है कि वे इस मामले को एथिक्स कमिटी (आचार समिति) को सौंपें और इसकी जांच कराएं। हमने यह भी मांग की है कि इस बात पर विचार किया जाए कि क्या उन्हें लोकसभा सांसद बने रहना चाहिए या नहीं। यह लोकतंत्र का सबसे पवित्र सदन है। जिस व्यक्ति ने महिलाओं के साथ बहुत बुरा बर्ताव किया हो, उसे लोकतंत्र के इस सर्वोच्च सदन में रहने का कोई हक नहीं है। स्पीकर ने हमें आश्वासन दिया है कि वे इस मामले को देखेंगे और कानूनी तौर पर जो भी संभव होगा, वह करेंगे।

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