कानपुर नगर निगम में टेंडर और फर्म घोटाले के आरोपी ठेकेदार गोविंद शर्मा से एसआईटी की पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं। नोटिस मिलने के बाद दूसरी बार बयान दर्ज कराने स्वरूप नगर थाने पहुंचे सिंडिकेट के सरगना गोविंद शर्मा से एसआईटी ने करीब डेढ़ घंटे में 20 से अधिक सवाल पूछे। सूत्रों के मुताबिक, पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन पर गोविंद ने वसूली का आरोप लगाया है। उसने बताया कि पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन वसूली के लिए बना है। बिना कमीशन दिए अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलता है। अधिकतम विकास कार्य पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े पार्षदों के इलाकों में ही होते थे। पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन वसूली के लिए बना एसआईटी की पूछताछ में गोविंद ने बताया कि अगर कोई दो वार्डों से गुजरने वाली सड़क बनाई जा रही है तो दोनों वार्डों के पार्षद एसोसिएशन के जरिए पैसे मिलने के बाद ही ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) देते थे। गोविंद ने कई भ्रष्ट पार्षदों और इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े अहम लोगों के नाम बताए हैं। खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि नगर निगम में बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं होता है। टेंडर की कुल रकम का 40 प्रतिशत हिस्सा पार्षदों से लेकर चीफ इंजीनियर तक के अधिकारियों में बांटा जाता है। ठेकेदार 20 प्रतिशत हिस्सा लेता है और बाकी रकम से काम पूरा किया जाता है। हॉट मिक्स प्लांट समेत बैंक स्टेटमेंट का मांगा ब्योरा पूछताछ के दौरान SIT ने गोविंद शर्मा से पूछा कि उसके पास हॉट मिक्स प्लांट के लिए कौन-कौन सी मशीनरी उपलब्ध है। इसके साथ ही प्लांट के अभिलेख, उनके रिन्युअल के रिकॉर्ड और नगर निगम में ठेके के रजिस्ट्रेशन के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की जानकारी भी मांगी गई। पुलिस ने उसकी फर्म, बैंक स्टेटमेंट, GST और इनकम टैक्स के रिकॉर्ड के साथ कराए गए कार्यों के क्वालिटी सर्टिफिकेट समेत अन्य जरूरी जानकारियां भी मांगी हैं। साथ ही नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों की संलिप्तता के बारे में जानकारी ली गई, लेकिन इस बार भी टेंडर और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज साथ नहीं लाया था। तबीयत खराब होने का हवाला देकर मांगा समय ADCP सेंट्रल डॉ. अर्चना सिंह ने बताया कि गोविंद शर्मा को नोटिस देकर बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। उससे फर्म और हॉट मिक्स प्लांट से जुड़े दस्तावेजों के अलावा वित्तीय लेन-देन और कराए गए कार्यों के प्रमाण पत्र मांगे गए हैं। हालांकि, वह मुकदमे से संबंधित अभिलेख लेकर नहीं पहुंचा। उसने तबीयत खराब होने की बात कहते हुए 2 से 3 दिन में सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। फजलगंज में दर्ज है रंगदारी का मुकदमा नगर निगम में टेंडर और फर्म घोटाले के मामले में पुलिस ने कुल 6 FIR दर्ज की थीं। इनमें नगर निगम के अधिकारियों की ओर से 5 मुकदमे स्वरूप नगर थाने में फर्मों के खिलाफ दर्ज कराए गए थे। वहीं, ठेकेदार सनी सिंह की तहरीर पर फजलगंज थाने में गोविंद शर्मा, रज्जन बाजपेई और संदीप जैन के खिलाफ रंगदारी का मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस रज्जन बाजपेई और संदीप जैन को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, जबकि गोविंद शर्मा फरार हो गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने उसे जांच में सहयोग करने के निर्देश के साथ गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक दी थी।

