हिमाचल के शहरी बिजली कंज्यूमर को झटका:किराएदारों की सब्सिडी खत्म, लैंडलॉर्ड को राहत बरकरार, अप्रैल में जिनका बिल ₹750, मई में ₹1850 आया

हिमाचल के शहरी बिजली कंज्यूमर को झटका:किराएदारों की सब्सिडी खत्म, लैंडलॉर्ड को राहत बरकरार, अप्रैल में जिनका बिल ₹750, मई में ₹1850 आया

हिमाचल प्रदेश में मई महीने के बिजली बिलों ने सैकड़ों उपभोक्ताओं को जोरदार झटका दिया है। खासकर, शहरी क्षेत्रों में किराए के मकानों में रह रहे लोगों को भारी भरकम बिल थमा दिए गए है, क्योंकि सुक्खू सरकार ने दो मीटर से अधिक पर सब्सिडी खत्म कर दी है। सरकार के इस फैसले की मार शहरी क्षेत्रों में किराए के कमरों में रहने वाले सैकड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ी है। हालांकि, लैंडलॉर्ड (मकान मालिक) को अभी भी पहले की तरह सब्सिडी जारी है। किराएदारों को बिना सब्सिडी के तय दर्रों के हिसाब से बिल दिए गए है। इसी तरह, ग्रामीण इलाकों में भी 2 मीटर पर सब्सिडी जारी है। 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा, अब 1 यूनिट खर्च पर भी बिल दिसंबर 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की गारंटी दी थी। यह गारंटी तो पूरी नहीं हुई, इस बीच सरकार ने ऐसा फैसला लिया जिससे एक भी यूनिट बिजली खर्च करता है तो भी उसे बिल दिया जाएगा। इसकी मार अर्बन व सेमी अर्बन एरिया में रहने वाले बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ रही है। सरकार के फैसले की गरीबों पर मार सुक्खू सरकार के इस फैसले की मार गरीब जनता पर पड़ी है, क्योंकि साधन संपन्न लोगों ने शहरी क्षेत्रों में अपने मकान या फ्लैट बना रखे है और बिजली के मीटर भी उनके नाम है, जबकि निर्धन व मध्यम वर्गीय परिवार किराए के कमरों में रहते हैं। इस वजह से मकान मालिक और किराएदार को एक यूनिट मानने पर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने भी सत्तारूढ़ कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। बिजली बोर्ड ने क्या कहा? हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL) अधिकारियों का तर्क है कि अब एक राशन कार्ड पर दो से अधिक मीटरों को सब्सिडी नहीं दी जा रही। अतिरिक्त मीटरों का बिल हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा तय पूर्ण टैरिफ के अनुसार बनाया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी भी सब्सिडी विड्रा करने के फैसले से बेकफुट पर है, क्योंकि पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा कर रखा है। KYC को लेकर भी बढ़ी परेशानी हाल ही में बिजली बोर्ड द्वारा करवाई गई KYC प्रक्रिया को लेकर भी उपभोक्ता शिकायतें कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि उनके नाम पर गलत मीटर जोड़ दिए गए हैं, जिसके कारण उन्हें ऐसे मीटरों के बिल भी भेजे जा रहे हैं जो उनके नहीं हैं। बिजली बोर्ड प्रबंधन ने माना है कि इस तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं। बोर्ड का कहना है कि उपभोक्ता संबंधित सब-डिवीजन कार्यालय में जाकर या विभाग की वेबसाइट के माध्यम से अपने रिकॉर्ड में सुधार करवा सकते हैं।

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