पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के कैबिनेट मंत्री और फरीदाबाद से भाजपा विधायक विपुल गोयल के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका को शुरुआती चरण में खारिज करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे गंभीर हैं और इन पर साक्ष्यों के आधार पर पूरी सुनवाई जरूरी है। जस्टिस विकास सूरी ने विपुल गोयल की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने चुनाव याचिका को शुरू में ही समाप्त करने की मांग की थी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि याचिका में उठाए गए कई मुद्दों में से कुछ पर सुनवाई बनती है, तो पूरी याचिका को खारिज नहीं किया जा सकता। क्या है मामला
फरीदाबाद विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी लखन कुमार सिंगला ने विपुल गोयल के 2024 विधानसभा चुनाव को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में मुख्य रूप से दो बड़े आरोप लगाए गए हैं] धर्म के नाम पर मतदाताओं को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है। वहीं ईवीएम की बैटरी के स्तर में कथित अनियमितताएं का आरोप है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इन कारणों से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई और विजयी उम्मीदवार को अनुचित लाभ मिला। याचिकाकर्ता ये दे रहा दलील
सिंगला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन जैन ने कोर्ट में कहा कि चुनाव याचिका में भ्रष्ट आचरण के स्पष्ट आरोप लगाए गए हैं। इनमें तारीख, स्थान और घटनाओं का पूरा विवरण दिया गया है। ऐसे मामलों का फैसला केवल मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकता है। विपुल गोयल की दलील
विपुल गोयल के वकील ने तर्क दिया कि उन्होंने 9 सितंबर 2024 को नामांकन दाखिल किया था, जबकि कथित धार्मिक अपील 7 सितंबर 2024 की बताई गई है। इसलिए उस समय वे आधिकारिक रूप से उम्मीदवार नहीं थे और यह आरोप टिक नहीं सकता।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने माना कि यह तर्क पूरे मामले को खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि धर्म के आधार पर वोट मांगने का आरोप ही चुनाव चुनौती का एकमात्र आधार नहीं है। ईवीएम बैटरी और मतगणना से जुड़े आरोप भी विचारणीय हैं।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मतगणना के दौरान 8 अक्टूबर 2024 को शिकायतें की गई थीं। इसके बाद 9 अक्टूबर को उपायुक्त फरीदाबाद को शिकायत दी गई और 12 अक्टूबर को वीवीपैट पर्चियों के आधार पर दोबारा गिनती की मांग की गई थी।
अब आगे क्या होगा
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद चुनाव याचिका पर पूरी सुनवाई होगी। मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य पेश करेंगे। अगली सुनवाई 29 मई को निर्धारित की गई है।
इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने चुनाव को रद्द कर दिया है। अदालत ने केवल यह कहा है कि याचिका में ऐसे मुद्दे हैं जिनकी विस्तृत सुनवाई जरूरी है। अंतिम फैसला साक्ष्यों और बहस के बाद ही होगा।


