पिग्गी बैंक को टक्कर देगी बिठूर की देसी गुल्लक:योगी सरकार और IIT कानपुर ने माटीकला को दिया मॉडर्न लुक, सरकारी कार्यक्रमों में मिलेगी जगह

पिग्गी बैंक को टक्कर देगी बिठूर की देसी गुल्लक:योगी सरकार और IIT कानपुर ने माटीकला को दिया मॉडर्न लुक, सरकारी कार्यक्रमों में मिलेगी जगह

कभी नानी-दादी से मिले सिक्कों को सहेजने वाली मिट्टी की पारंपरिक गुल्लक नए दौर में नए रंग-रूप के साथ वापसी कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन के तहत कानपुर के बिठूर की दम तोड़ती माटीकला को एक नया और आधुनिक जीवन दिया जा रहा है। जिला प्रशासन और आईआईटी कानपुर के साझा प्रयासों से अब बिठूर के कुम्हार ऐसी फैंसी और आधुनिक गुल्लकें तैयार कर रहे हैं, जो न सिर्फ बच्चों को आर्थिक अनुशासन सिखाएंगी बल्कि स्थानीय कारीगरों के घरों को भी आर्थिक रूप से समृद्ध करेंगी। IIT कानपुर का तकनीकी तड़का: सिरामिक डिजाइंस से सजीं गुल्लकें बिठूर की पारंपरिक गुल्लकों को आज के कॉर्पोरेट और आधुनिक बाजार के लायक बनाने के लिए आईआईटी कानपुर का ‘रंजीत सिंह रोजी शिक्षा केन्द्र प्रोजेक्ट’ काम कर रहा है। प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर शिखा तिवारी और रीता सिंह के मुताबिक, कारीगरों को आधुनिक बाजार की पसंद के हिसाब से ट्रेंड किया जा रहा है। सिरामिक डिजाइनर शैली संगल बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए गुल्लकों को कार्टून कैरेक्टर्स, क्यूट पशु-पक्षियों और आकर्षक ट्रेंडी आकृतियों में ढाल रही हैं, जिससे बच्चे प्लास्टिक के ‘पिग्गी बैंक’ छोड़ मिट्टी की गुल्लकों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। बचत की आदत भी और लोकल कारीगरों को बाजार भी कानपुर के जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि गुल्लक सिर्फ मिट्टी का खिलौना नहीं, बल्कि बच्चों को बचपन से ही आर्थिक अनुशासन और बचत का संस्कार देने का सबसे बेहतरीन माध्यम है। आज के उपभोक्तावादी दौर में बढ़ते फिजूलखर्चों के बीच बच्चों में यह आदत डालना बेहद जरूरी है। वहीं, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन ने कहा कि योगी सरकार की मंशा के अनुरूप बिठूर के इस स्थानीय प्रॉडक्ट की बेहतरीन पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर काम किया जा रहा है ताकि कारीगरों को उनकी कला का सही मूल्य मिल सके। गिफ्ट और मोमेंटो की जगह मिलेंगी गुल्लकें, कुम्हारों में जगी उम्मीद बिठूर के कुम्हार राम रतन ने खुशी जाहिर करते हुए बताया, “पहले प्लास्टिक के आने से मिट्टी की गुल्लकों को कोई पूछता नहीं था, हमारी कमाई बंद हो गई थी। लेकिन अब जब से नए डिजाइन और चमकदार रंग आए हैं, बाजार में मांग फिर से बढ़ गई है। हमारे चाक को नई रफ्तार मिल गई है।” प्रशासन ने फैसला किया है कि अब जिले के सभी सरकारी कार्यक्रमों में वीआईपी मेहमानों को बुके या प्लास्टिक के मोमेंटो देने के बजाय बिठूर की ये खूबसूरत मिट्टी की गुल्लकें उपहार और स्मृति-चिह्न के रूप में दी जाएंगी।

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