पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने कहा है कि अगर उन्हें इमरान खान की कप्तानी में खेलने का मौका मिलता तो वह टेस्ट क्रिकेट में 400 विकेट हासिल कर सकते थे। अपनी पीढ़ी के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों में शुमार शोएब ने 46 टेस्ट में 178 विकेट लिए थे। उन्होंने 2011 में भारत में हुए विश्व कप के दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था।उस समय तत्कालीन कप्तान शाहिद अफरीदी के साथ उनके मतभेद की खबरें सामने आई थीं। ‘जियो टीवी’ के एक कार्यक्रम में शोएब ने कहा कि प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके नाम 400 से अधिक विकेट हैं और उनका मानना है कि उनके पसंदीदा कप्तान इमरान खान के नेतृत्व में खेलने से उनके करियर पर बड़ा असर पड़ सकता था। शोएब (51 वर्ष) ने कहा, ‘‘अगर मैं पहले इमरान खान के आक्रामक नेतृत्व में खेला होता तो मैंने बहुत कुछ सीखा होता और टेस्ट क्रिकेट में 400 विकेट लिए होते।’’
शोएब ने रावलपिंडी में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था।यह उनका घरेलू मैदान भी था। उस समय पाकिस्तान के कप्तान वसीम अकरम ने इस युवा तेज गेंदबाज को पदार्पण कराने को लेकर आशंका जताई थी और माना था कि यह सही समय नहीं है। समय के साथ दोनों तेज गेंदबाजों के रिश्ते जटिल रहे और उनमें प्रशंसा के साथ-साथ मतभेद के दौर भी आए।
पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने कहा है कि अगर उन्हें इमरान खान की कप्तानी में खेलने का मौका मिलता तो वह टेस्ट क्रिकेट में 400 विकेट हासिल कर सकते थे। अपनी पीढ़ी के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों में शुमार शोएब ने 46 टेस्ट में 178 विकेट लिए थे। उन्होंने 2011 में भारत में हुए विश्व कप के दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था।
उस समय तत्कालीन कप्तान शाहिद अफरीदी के साथ उनके मतभेद की खबरें सामने आई थीं। ‘जियो टीवी’ के एक कार्यक्रम में शोएब ने कहा कि प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके नाम 400 से अधिक विकेट हैं और उनका मानना है कि उनके पसंदीदा कप्तान इमरान खान के नेतृत्व में खेलने से उनके करियर पर बड़ा असर पड़ सकता था। शोएब (51 वर्ष) ने कहा, ‘‘अगर मैं पहले इमरान खान के आक्रामक नेतृत्व में खेला होता तो मैंने बहुत कुछ सीखा होता और टेस्ट क्रिकेट में 400 विकेट लिए होते।’’
शोएब ने रावलपिंडी में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था।
यह उनका घरेलू मैदान भी था। उस समय पाकिस्तान के कप्तान वसीम अकरम ने इस युवा तेज गेंदबाज को पदार्पण कराने को लेकर आशंका जताई थी और माना था कि यह सही समय नहीं है। समय के साथ दोनों तेज गेंदबाजों के रिश्ते जटिल रहे और उनमें प्रशंसा के साथ-साथ मतभेद के दौर भी आए।
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