झांसी में गाय को राष्ट्र माता घोषित कराने के अभियान पर निकले अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने झांसी में भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो सरकार गाय को राष्ट्र माता घोषित करेगी, वही वोट पाने की हकदार होगी। पश्चिम बंगाल में लागू गोवध संबंधी कानून का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि 14 साल तक गाय माता और उसके बाद सब्जी-भाजी कैसे हो सकती है। पहले 2 तस्वीर देखें… शंकराचार्य अपने राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत झांसी के कुंजबिहारी मंदिर पहुंचे थे। यहां उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को शपथ दिलाई कि वे उसी राजनीतिक दल का समर्थन करेंगे जो अपने घोषणा पत्र में गाय को राष्ट्र माता घोषित करने का वादा करेगा।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए महाकुंभ को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस बार कुंभ का स्वरूप बदला हुआ दिखाई दिया और बड़ी संख्या में ऐसे लोग पहुंचे जिन्हें केवल रील और सोशल मीडिया सामग्री बनानी थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सनातन परंपरा में आज भी अनेक अच्छे संत मौजूद हैं, लेकिन उन्हें इसलिए प्रमुखता नहीं मिलती क्योंकि उनसे टीआरपी नहीं मिलती।
दरबार लगाने की परंपरा पर पूछे गए सवाल के जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में दरबार लगाने की परंपरा पुरानी है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जो लोग भविष्य की घटनाएं बताने का दावा करते हैं, उनसे देश के रक्षा मंत्रालय को संपर्क करना चाहिए ताकि देश पर आने वाले संकटों की जानकारी पहले से मिल सके।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में गोवध से जुड़े कानून का जिक्र करते हुए कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष सरकार ने वर्ष 1950 में कानून बनाया और बाद की सरकारों ने उसे लागू रखा। शंकराचार्य ने कहा कि यह व्यवस्था समझ से परे है कि एक निश्चित उम्र तक गाय को माता माना जाए और उसके बाद उसके वध की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का विरोध जारी रहेगा और अब गाय को राष्ट्र माता घोषित करने के मुद्दे को चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूछे गए सवाल के जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि केवल गेरुआ वस्त्र धारण कर लेने से कोई संत नहीं बन जाता। संत होने के लिए संत जैसा आचरण भी जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में शासन की कार्यशैली बुल्डोजर आधारित दिखाई देती है, जो संतों के आचरण से मेल नहीं खाती।


