मुजफ्फरपुर की विश्व प्रसिद्ध शाही लीची अब स्थानीय बाजारों में उपलब्ध है। अपनी विशेष मिठास और सुगंध के लिए यह लीची देश-विदेश में जानी जाती है। शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों जैसे स्टेशन रोड और क्लब रोड सहित कई बाजारों में इसकी बिक्री शुरू हो गई है। हालांकि, शुरुआती आवक कम होने के कारण इसकी कीमत 400 रुपए प्रति सैकड़ा(100 पीस) तक पहुंच गई है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, बागानों से लीची की तुड़ाई अभी सीमित मात्रा में हो रही है। फल की कम उपलब्धता और अधिक मांग के कारण शुरुआती दौर में कीमतें ऊंची हैं। एक सप्ताह में कीमत में गिरावट आने की संभावना रोहुआ क्षेत्र के व्यवसायी वीरू साह ने बताया कि शाही लीची की पहली खेप आते ही लोग ऊंची कीमत पर भी इसे खरीदने को उत्सुक रहते हैं। अभी 100 पीस की कीमत 400 रुपए हैं, हालांकि, यह कीमत लंबे समय तक रहने की संभावना नहीं है। कांटी से मुजफ्फरपुर बाजार पहुंचे फल व्यापारी विशाल साह ने बताया कि बगीचों में बड़े पैमाने पर तुड़ाई की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अगले एक सप्ताह में बाजार में लीची की आवक में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मई के अंतिम सप्ताह और जून के पहले सप्ताह तक बाजार शाही लीची से भर जाएगा, जिससे इसकी कीमतों में गिरावट आएगी और यह आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक किफायती हो जाएगी। मिठास और मांग में होगी बढ़ोतरी कृषि विशेषज्ञों और बागान मालिकों के अनुसार, अभी लीची में शुरुआती रंग आया है, लेकिन मई के अंत तक तेज धूप और अनुकूल मौसम के कारण फल पूरी तरह पककर तैयार हो जाएंगे। इसके बाद लीची का असली रसीलापन और मिठास उभर कर सामने आएगी। पूरी तरह पकने के बाद इसकी गुणवत्ता और सुगंध में और निखार आएगा, जिससे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग कई गुना बढ़ जाएगी। मुजफ्फरपुर की शाही लीची को जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) भी प्राप्त है, जिसके कारण देश के बड़े महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के व्यापारी भी यहां डेरा डालने लगे हैं। आने वाले दिनों में रेलवे और हवाई मार्ग से इसकी देशव्यापी सप्लाई तेज होने वाली है। मुजफ्फरपुर की विश्व प्रसिद्ध शाही लीची अब स्थानीय बाजारों में उपलब्ध है। अपनी विशेष मिठास और सुगंध के लिए यह लीची देश-विदेश में जानी जाती है। शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों जैसे स्टेशन रोड और क्लब रोड सहित कई बाजारों में इसकी बिक्री शुरू हो गई है। हालांकि, शुरुआती आवक कम होने के कारण इसकी कीमत 400 रुपए प्रति सैकड़ा(100 पीस) तक पहुंच गई है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, बागानों से लीची की तुड़ाई अभी सीमित मात्रा में हो रही है। फल की कम उपलब्धता और अधिक मांग के कारण शुरुआती दौर में कीमतें ऊंची हैं। एक सप्ताह में कीमत में गिरावट आने की संभावना रोहुआ क्षेत्र के व्यवसायी वीरू साह ने बताया कि शाही लीची की पहली खेप आते ही लोग ऊंची कीमत पर भी इसे खरीदने को उत्सुक रहते हैं। अभी 100 पीस की कीमत 400 रुपए हैं, हालांकि, यह कीमत लंबे समय तक रहने की संभावना नहीं है। कांटी से मुजफ्फरपुर बाजार पहुंचे फल व्यापारी विशाल साह ने बताया कि बगीचों में बड़े पैमाने पर तुड़ाई की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अगले एक सप्ताह में बाजार में लीची की आवक में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मई के अंतिम सप्ताह और जून के पहले सप्ताह तक बाजार शाही लीची से भर जाएगा, जिससे इसकी कीमतों में गिरावट आएगी और यह आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक किफायती हो जाएगी। मिठास और मांग में होगी बढ़ोतरी कृषि विशेषज्ञों और बागान मालिकों के अनुसार, अभी लीची में शुरुआती रंग आया है, लेकिन मई के अंत तक तेज धूप और अनुकूल मौसम के कारण फल पूरी तरह पककर तैयार हो जाएंगे। इसके बाद लीची का असली रसीलापन और मिठास उभर कर सामने आएगी। पूरी तरह पकने के बाद इसकी गुणवत्ता और सुगंध में और निखार आएगा, जिससे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग कई गुना बढ़ जाएगी। मुजफ्फरपुर की शाही लीची को जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) भी प्राप्त है, जिसके कारण देश के बड़े महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के व्यापारी भी यहां डेरा डालने लगे हैं। आने वाले दिनों में रेलवे और हवाई मार्ग से इसकी देशव्यापी सप्लाई तेज होने वाली है।


