राष्ट्रीय लोक अदालत में 1394 मामलों का निपटारा:सुपौल में 2.59 करोड़ रुपए का हुआ समझौता, अन्य श्रेणी के 298 मामलों का निष्पादन

राष्ट्रीय लोक अदालत में 1394 मामलों का निपटारा:सुपौल में 2.59 करोड़ रुपए का हुआ समझौता, अन्य श्रेणी के 298 मामलों का निष्पादन

सुपौल में इस वर्ष की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में किया गया। इस दौरान 1394 मामलों का निष्पादन किया गया और 2.59 करोड़ रुपये पर आपसी सुलह-समझौता हुआ। लोक अदालत के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को त्वरित न्याय मिला। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार सुपौल अनंत सिंह, परिवार न्यायालय सुपौल के प्रधान न्यायाधीश राहुल उपाध्याय, विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्य यातायात अपीलीय प्राधिकार के चेयरमैन गजनफर हैदर उपस्थित रहे। जिलाधिकारी सह उपाध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार सुपौल सावन कुमार, पुलिस अधीक्षक शरथ आर.एस., जिला विधिज्ञ संघ के सचिव दीपनारायण पांडेय तथा अध्यक्ष नागेंद्र ठाकुर सहित कई न्यायिक पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, अधिवक्ता और पक्षकार भी मौजूद थे। न्यायमंडल में 21 बेंचों का किया गया था गठन राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन के लिए सुपौल न्यायमंडल में कुल 21 बेंचों का गठन किया गया था। इनमें व्यवहार न्यायालय सुपौल में 12 बेंच, अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय वीरपुर में 5 बेंच और ट्रैफिक चालान मामलों के निष्पादन के लिए विशेष रूप से 4 बेंच बनाए गए थे। इसके अतिरिक्त, पक्षकारों की सुविधा और मार्गदर्शन के लिए तीन हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए थे, जहां लोगों को आवश्यक जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार सुपौल के सचिव मोहम्मद अफजल आलम ने बताया कि लोक अदालत में व्यवहार न्यायालय में लंबित आपराधिक मामलों का दोनों पक्षों के आपसी समझौते के आधार पर निष्पादन किया गया। 2.24 करोड़ रुपए की राशि पर हुआ समझौता इसके अतिरिक्त बैंक ऋण, वित्तीय संस्थानों, टेलीफोन विवाद, वैवाहिक मामलों, ट्रैफिक चालान और अन्य प्रकार के मामलों का भी सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। उन्होंने जानकारी दी कि प्री-लिटिगेशन बैंक ऋण संबंधी कुल 481 मामलों का निष्पादन हुआ, जिसमें 2 करोड़ 24 लाख 26 हजार 574 रुपए की राशि पर समझौता हुआ। वहीं अन्य श्रेणी के 298 मामलों का भी निष्पादन किया गया। पोस्ट-लिटिगेशन के तहत कुल 615 मामलों का निष्पादन किया गया, जिनमें 35 लाख 53 हजार रुपये की समझौता राशि तय हुई। 394 मामलों का किया गया था निष्पादन इस प्रकार प्री-लिटिगेशन एवं पोस्ट-लिटिगेशन दोनों को मिलाकर कुल 1394 मामलों का निष्पादन किया गया तथा कुल 2 करोड़ 59 लाख 79 हजार 574 रुपए की राशि पर समझौता हुआ। मोटर दुर्घटना दावा मामलों में भी लोक अदालत के माध्यम से पीड़ितों को राहत मिली। कुल चार मामलों का निष्पादन करते हुए 19 लाख 50 हजार रुपए की मुआवजा राशि पीड़ित पक्षों को प्रदान की गई। इसके अलावा विद्युत अधिनियम के तहत दर्ज 92 मामलों का भी निपटारा किया गया। 350 मामलों का निपटारा कर वसूले 4.82 लाख एनआई एक्ट से संबंधित दो मामलों का निष्पादन हुआ, जिसमें 4 लाख 70 हजार रुपए की राशि पर समझौता हुआ। वहीं ट्रैफिक चालान से जुड़े 350 से अधिक मामलों का निपटारा करते हुए 4 लाख 82 हजार रुपए की वसूली की गई। ट्रैफिक चालान मामलों के त्वरित और सुगम निष्पादन के लिए व्यवहार न्यायालय सुपौल के समीप स्थित टाउन हॉल में विशेष व्यवस्था की गई थी। यहां लोगों को चालान संबंधी मामलों के समाधान के लिए अलग से सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे बड़ी संख्या में लोगों ने अपने मामलों का मौके पर ही निपटारा कराया। लोक अदालत में विशेष रूप से ट्रैफिक चालान एवं वित्तीय संस्थानों से जुड़े पक्षकारों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। लोगों ने आपसी सहमति के आधार पर अपने मामलों का खुशीपूर्वक निष्पादन कराया। न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य सुलभ, त्वरित और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराना है तथा इसके माध्यम से अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है। कार्यक्रम के अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से सभी न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। सुपौल में इस वर्ष की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में किया गया। इस दौरान 1394 मामलों का निष्पादन किया गया और 2.59 करोड़ रुपये पर आपसी सुलह-समझौता हुआ। लोक अदालत के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को त्वरित न्याय मिला। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार सुपौल अनंत सिंह, परिवार न्यायालय सुपौल के प्रधान न्यायाधीश राहुल उपाध्याय, विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्य यातायात अपीलीय प्राधिकार के चेयरमैन गजनफर हैदर उपस्थित रहे। जिलाधिकारी सह उपाध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार सुपौल सावन कुमार, पुलिस अधीक्षक शरथ आर.एस., जिला विधिज्ञ संघ के सचिव दीपनारायण पांडेय तथा अध्यक्ष नागेंद्र ठाकुर सहित कई न्यायिक पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, अधिवक्ता और पक्षकार भी मौजूद थे। न्यायमंडल में 21 बेंचों का किया गया था गठन राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन के लिए सुपौल न्यायमंडल में कुल 21 बेंचों का गठन किया गया था। इनमें व्यवहार न्यायालय सुपौल में 12 बेंच, अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय वीरपुर में 5 बेंच और ट्रैफिक चालान मामलों के निष्पादन के लिए विशेष रूप से 4 बेंच बनाए गए थे। इसके अतिरिक्त, पक्षकारों की सुविधा और मार्गदर्शन के लिए तीन हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए थे, जहां लोगों को आवश्यक जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार सुपौल के सचिव मोहम्मद अफजल आलम ने बताया कि लोक अदालत में व्यवहार न्यायालय में लंबित आपराधिक मामलों का दोनों पक्षों के आपसी समझौते के आधार पर निष्पादन किया गया। 2.24 करोड़ रुपए की राशि पर हुआ समझौता इसके अतिरिक्त बैंक ऋण, वित्तीय संस्थानों, टेलीफोन विवाद, वैवाहिक मामलों, ट्रैफिक चालान और अन्य प्रकार के मामलों का भी सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। उन्होंने जानकारी दी कि प्री-लिटिगेशन बैंक ऋण संबंधी कुल 481 मामलों का निष्पादन हुआ, जिसमें 2 करोड़ 24 लाख 26 हजार 574 रुपए की राशि पर समझौता हुआ। वहीं अन्य श्रेणी के 298 मामलों का भी निष्पादन किया गया। पोस्ट-लिटिगेशन के तहत कुल 615 मामलों का निष्पादन किया गया, जिनमें 35 लाख 53 हजार रुपये की समझौता राशि तय हुई। 394 मामलों का किया गया था निष्पादन इस प्रकार प्री-लिटिगेशन एवं पोस्ट-लिटिगेशन दोनों को मिलाकर कुल 1394 मामलों का निष्पादन किया गया तथा कुल 2 करोड़ 59 लाख 79 हजार 574 रुपए की राशि पर समझौता हुआ। मोटर दुर्घटना दावा मामलों में भी लोक अदालत के माध्यम से पीड़ितों को राहत मिली। कुल चार मामलों का निष्पादन करते हुए 19 लाख 50 हजार रुपए की मुआवजा राशि पीड़ित पक्षों को प्रदान की गई। इसके अलावा विद्युत अधिनियम के तहत दर्ज 92 मामलों का भी निपटारा किया गया। 350 मामलों का निपटारा कर वसूले 4.82 लाख एनआई एक्ट से संबंधित दो मामलों का निष्पादन हुआ, जिसमें 4 लाख 70 हजार रुपए की राशि पर समझौता हुआ। वहीं ट्रैफिक चालान से जुड़े 350 से अधिक मामलों का निपटारा करते हुए 4 लाख 82 हजार रुपए की वसूली की गई। ट्रैफिक चालान मामलों के त्वरित और सुगम निष्पादन के लिए व्यवहार न्यायालय सुपौल के समीप स्थित टाउन हॉल में विशेष व्यवस्था की गई थी। यहां लोगों को चालान संबंधी मामलों के समाधान के लिए अलग से सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे बड़ी संख्या में लोगों ने अपने मामलों का मौके पर ही निपटारा कराया। लोक अदालत में विशेष रूप से ट्रैफिक चालान एवं वित्तीय संस्थानों से जुड़े पक्षकारों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। लोगों ने आपसी सहमति के आधार पर अपने मामलों का खुशीपूर्वक निष्पादन कराया। न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य सुलभ, त्वरित और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराना है तथा इसके माध्यम से अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है। कार्यक्रम के अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से सभी न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।  

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