संभल जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने सारंगपुर ग्राम पंचायत की प्रधान रामवती के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कार्रवाई विकास कार्यों में ₹36,06,702 की प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितता पाए जाने के बाद की गई है। यह मामला संभल जिलाधिकारी कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान सामने आया था। यह पूरा मामला संभल तहसील के पंवासा ब्लॉक स्थित सारंगपुर गांव का है। शिकायतकर्ता सोमपाल और अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों में अनियमितताओं की जानकारी दी थी। जिलाधिकारी ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच जिला पंचायत राज अधिकारी को सौंपी। तकनीकी मूल्यांकन के लिए सहायक अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को नामित किया गया था। जांच अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ग्राम प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। ग्राम प्रधान ने 11 मई को अपना जवाब प्रस्तुत किया, जिसे संतोषजनक नहीं माना गया। जांच के दौरान वर्क आईडी से संबंधित कार्यों के लिए वित्तीय, प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृतियों के प्रपत्र, टेंडर, कोटेशन, बिल वाउचर जैसे कोई भी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिले। प्रथम दृष्टया, शासकीय कार्यों के सापेक्ष भुगतान की गई कुल ₹36,06,702 की धनराशि में वित्तीय अनियमितता पाई गई। इसके लिए ग्राम पंचायत सारंगपुर की ग्राम प्रधान और तत्कालीन ग्राम सचिव को उत्तरदायी ठहराया गया है। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने पाया कि ग्राम प्रधान ने निर्वाचित होने के बाद पंचायत राज अधिनियम के मानकों का पालन नहीं किया और अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया। इन तथ्यों के आधार पर, उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 95(1) (छ) और संबंधित नियमावली के नियम-5 के तहत यह प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, मामले की अंतिम जांच के लिए उपनिदेशक कृषि, संभल और अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग, संभल को अंतिम जांच अधिकारी नामित किया गया है। उन्हें शीघ्र जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।


