चित्तौड़गढ़ के मंडफिया स्थित श्रीसांवलिया जी मंदिर में इस साल (2025-26) में करीब 337 करोड़ का चढ़ावा आ चुका है। ये 34 साल में सबसे ज्यादा है। इस चढ़ावे की काउंटिंग के लिए करीब 200 लोगों का स्टाफ लगता है, जिसमें बैंककर्मी और मंदिर प्रशासन के लोग शामिल होते हैं। स्टील के बड़े बर्तनों (परातनुमा) में भरकर ये दान काउंटिंग स्थल पर पहुंचता है। उसकी बाद शुरू होती है एक लंबी काउंटिंग प्रोसेस। मान्यता है कि ठाकुर जी यहां सेठजी के रूप में विराजमान हैं, एक बार अगर उन्हें पार्टनर बना लिया तो बिजनेस बढ़ता ही जाता है। भक्त यहां बकायदा स्टाम्प पर अमाउंट लिखवा कर लाते हैं। इसी तरह मन्नत पूरी होने पर लाखों की राशि लिखित में अपने कंपनी के लेटर हेड पर लिख कर दे जाते हैं। 3 तस्वीरों में समझिए काउंटिंग का प्रोसेस… काउंटिंग के लिए 200 का स्टाफ: मंदिर प्रशासन के अनुसार, मंदिर में हर महीने चतुर्दशी के दिन दान पात्र खोले जाते हैं। राजभोग आरती के बाद 11:45 बजे बैंक कर्मी और मंदिर प्रशासन के लोग इस काउंटिंग में शामिल होते हैं। इसमें करीब 200 लोग शामिल होते हैं। इस काउंटिंग में 5 से 10 दिन का समय लग जाता है। सबसे पहले नोटों को और सिक्कों को अलग किया जाता है। इसके बाद 5 मशीनों से इनकी काउंटिंग होती है। गहनों को वजन में काउंट किया जाता है। पहले भक्तों के सामने होती थी गिनती: मंदिर प्रशासन के अनुसार, कैश के साथ-साथ चेक, मनी ऑर्डर और ऑनलाइन माध्यम से भी बड़ी मात्रा में दान आता है। विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के कारण फॉरेन करेंसी भी बड़ी मात्रा में मिलती है। मंदिर में 1992 से लेकर 2025 तक श्रद्धालुओं के सामने ही इस दान राशि की काउंटिंग होती थी। इसके बाद पिछले साल जुलाई के बाद से इसे अलग सेपरेट कर दिया गया है, ताकि काउंटिंग में कोई गड़बड़ी न आए। पहले श्रद्धालु दर्शन करते हुए आते थे और साथ-साथ दान की काउंटिंग भी देखते थे। काउंटिंग अब सत्संग भवन में की जाती है। 34 साल पहले आया था 65 लाख का चढ़ावा अतिरिक्त जिला कलेक्टर और श्री सांवलिया जी मंदिर मंडल की मुख्य कार्यपालक (CEO) प्रभा गौतम ने बताया- श्री सांवलिया जी मंदिर के लिए साल 1991 में राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर इस मंदिर का अधिग्रहण किया था। इसके बाद मंदिर प्रशासन का संचालन अब एडिशनल कलेक्टर के निर्देशन में होने लगा। तभी से मंदिर के दान पात्र हर महीने खोलने की परंपरा शुरू की गई। साल 1992 एक्ट के तहत श्री सांवलिया जी मंदिर ट्रस्ट का संचालन किया जा रहा है। अधिग्रहण के बाद जब शुरुआत में भंडार खोला गया तब (1991-92) इसकी काउंटिंग 65 लाख के करीब थी। इसी महीने 29 दिन में ही 41.67 करोड़ रुपए की राशि मंदिर में अर्पित की गई। साल 2025 को दीपावली (अक्टूबर-नवंबर) में 51 करोड़ से ज्यादा की राशि आई थी। मंदिर ने गोद ले रखे हैं 16 गांव CEO प्रभा गौतम ने बताया- मंडफिया सहित आसपास के 16 गांवों के विकास का कार्य मंदिर प्रशासन ही देखता है। जैसे हाई मास्क लाइट लगाना, सामुदायिक भवन का निर्माण करवाना। जिला कलेक्टर ने भी आदेश दिया है कि वहां पर जितने भी गवर्नमेंट परिसर से या भवन है वहां पर सही व्यवस्थाएं करवाया जाए। बच्चों, महिलाओं और आमजन से जुड़ी हुई सुविधा दी जाए। भक्तों की सुविधा के लिए करवाए जा रहे काम CEO प्रभा गौतम ने बताया- इसके अलावा मंदिर परिसर में व्यवस्थाएं देखना, लोगों के लिए दर्शन को सुविधाजनक बनाने पर काम किया जाता है। अभी ये प्लान है कि परिसर में तीन से चार जगह अलग-अलग टॉयलेट कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे। साथ ही, पार्किंग में भी टॉयलेट बनाए जाएंगे। साथ ही स्नान घर भी बनाए जाने हैं। परिसर के पास ही 180 कमरों का की एक धर्मशाला बनाई जा रही है, जिसकी फिनिशिंग का काम चल रहा है। यह 6 महीने में पूरा हो जाएगा। पार्किंग की व्यवस्थाएं भी सुचारू करेंगे। मंदिर प्रशासन ने दान राशि से 16 गांवों के बाहर भी विकास करने की पिटिशन दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट ने इसकी अनुमति नहीं दी। कैसे आता है इतना चढ़ावा मंदिर को लेकर मान्यता है कि ठाकुर जी यहां सेठजी के रूप में विराजमान है। यहां लोग बिजनेस में सांवलिया सेठ को अपना पार्टनर बनाते हैं। यही नहीं शादी, रिश्तेदारी में भी ठाकुर को अपना बना लेते हैं। कोरोना काल के बाद अचानक श्रद्धालुओं और चढ़ावे में उछाल आया था। श्रद्धालुओं की चिट्ठियां दान-पात्र से चढ़ावे के साथ ठाकुर जी को भेजी चिट्ठियां भी निकलती हैं। इसमें महिलाएं अपने परिवार और पति के बिजनेस को लेकर लिखती हैं। बिजनेसमैन स्टाम्प पर लिखवा कर पार्टनरशिप लेकर आते हैं। चिट्ठी 1 : स्टाम्प लिखा कर ले आया भक्त मैं …..निवासी जयपुर, राजस्थान यह साझेदारी करार ठाकुर जी महाराज श्री सांवलिया सेठ सांवरिया की मंदिर मंडल, मंडफिया, तहसील भदेसर, जिला चित्तौड़गढ़, पिन कोड -312027 के साथ करता हूं। जिसकी साझेदारी प्रतिशत और संपूर्ण सहमति शर्तें निम्नलिखित हैं- 1) यह कि मेरी समस्त शेयर बाजार एवं अन्य स्रोत से आय (वेतन को छोड़कर) के 10 प्रतिशत हिस्से की साझेदारी मैं ठाकुर जी महाराज श्री सांवरिया सेठ के साथ करता हूं। 2) यह है कि मेरी आय का 10 प्रतिशत हिस्सा एक/तीन माह या ठाकुर जी महाराज की इच्छा अनुसार ठाकुर जी महाराज श्रीमान सांवरिया सेठ को देने का करार करता हूं। 3) यह कि मेरी शेयर बाजार से अधिकांश तीन माह में होने वाली आय का 10 प्रतिशत हिस्से की राशि तीन माह पूर्ण होने पर अगले माह की 10 तारीख तक श्री सांवलिया सेठ जी, मंदिर परिसर में मैं स्वयं आकर अर्पित करूंगा। चिट्ठी 2 : अपने बालक को संभालिए सांवलिया सेठ हे सांवरिया सेठ बाबा, एक नजर मेरे बिजनेस पर भी डाल दीजिए कि वह खूब आगे बढ़े और मेरी हर मनोकामना पूरी करिए। बाबा, प्रभु अपने बालक को संभाल लीजिए। चिट्ठी 3 : हम पति-पत्नी बच्चों की पढ़ाई करवा सकें मैं ……. संबलपुर (उड़ीसा) से। सेठ जी, मैं आपको अर्जी लगाने आई हूं। सेठ जी, मेरे दो बच्चे हैं। आप कृपा कीजिए कि हम पति-पत्नी उनकी पढ़ाई अच्छे से करवा सकें। बच्चे दोनों आपकी कृपा से अपने-अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठावान बनें। सेठ जी, हम कर्ज मुक्त हो जाएं और हमारे हिस्से की प्रॉपर्टी हमें मिल जाए तो सेठ जी मैं आपको ₹100000 नकद भेंट चढ़ाऊंगी। ग्राफिक्स में देखिए सांवलिया सेठ का इतिहास… सांवलिया सेठ से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सांवलिया सेठ को 32.87 करोड़ रुपए का चढ़ावा:छठे राउंड में 54 लाख की गिनती हुई; जानें कितने चढ़ावे का है रिकॉर्ड सांवलिया सेठ के चढ़ावे का रिकॉर्ड टूटा, ₹51 करोड़ आए:भक्तों ने 1 किलो से ज्यादा सोना, 207 किलो से ज्यादा चांदी दान की 10 मिनट होते हैं सांवलियाजी के अनोखे-स्वरूप के दर्शन:इकलौती मूर्ति जिनके सीने पर पैरों के निशान, 3 मंदिरों में विराजे हैं सांवरा सेठ


