Runny Nose: नाक बहने के हो सकते हैं ये दस कारण

Runny Nose: नाक बहने के हो सकते हैं ये दस कारण

Runny Nose Cause: मौसम बदला नहीं कि नाक बहना शुरू! कभी ठंडी हवा लगी तो रुमाल जेब से बाहर, तो कभी कुछ तीखा खाया तो नाक बहने लगती है। हम में से ज्यादातर लोग इसे मामूली मानकर छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर बार नाक बहने की वजह सिर्फ सर्दी नहीं होती? इसके पीछे कई और चौंकाने वाले कारण हो सकते हैं। आइए क्लीवलैंड क्लिनिक में प्रकाशित शोध से समझते हैं कि आखिर इसके पीछे के 10 बड़े कारण क्या हैं।

नाक बहने की समस्या कितने दिन तक रहती है?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी नाक बह किस वजह से रही है। हर बीमारी के हिसाब से इसका टाइम अलग-अलग होता है। अगर नॉर्मल सर्दी-जुकाम हुआ है, तो नाक बहना या नाक बंद रहने की यह समस्या 10 से 14 दिन (करीब दो हफ्ते) तक खिंच सकती है। अगर आपको किसी चीज से एलर्जी है, तो नाक तब तक बहती रहेगी जब तक आप उस चीज के संपर्क में रहेंगे। उदाहरण के लिए, अगर आपको पेड़-पौधों के परागकणों (Pollens) से एलर्जी है, तो जब तक उनका मौसम रहेगा (जैसे वसंत या गर्मी के दिन), यह दिक्कत 6 हफ्ते (डेढ़ महीने) तक भी परेशान कर सकती है।

नाक बहने के 10 बड़े कारण क्या हैं?

1. सर्दी-जुकाम (Common Cold)- जब मौसम बदलता है या शरीर में कोई वायरस आ जाता है, तो हमारी नाक के अंदर सूजन आ जाती है। शरीर उस वायरस को बाहर निकालने के लिए ज्यादा बलगम (Mucus) बनाने लगता है, जिसे हम बहती नाक कहते हैं।

2. धूल-मिट्टी से एलर्जी (Allergy)- कई लोगों की नाक बहुत सेंसिटिव होती है। जैसे ही वो धूल, मिट्टी, घर की गंदगी या पालतू जानवरों के बालों के संपर्क में आते हैं, उनकी नाक बहने लगती है। इसके साथ ही लगातार छींकें आना और आंखों में खुजली होना भी शुरू हो जाता है।

3. साइनस की दिक्कत (Sinus)- सीडीसी (CDC,अमेरिका) के अनुसार, हमारी नाक के आस-पास चेहरे की हड्डियों में कुछ खाली जगह साइनस (Sinus) होती है। जब इनमें इंफेक्शन या सूजन आ जाती है, तो वहां गाढ़ा बलगम जमा होने लगता है। इसकी वजह से नाक से पीला पानी आने लगता है और सिर में भारीपन रहता है।

4. नाक के पॉलिप्स (Nasal Polyps)- इसे नाक में मांस बढ़ना कहते हैं। ये हमारी नाक या साइनस के अंदरूनी हिस्से में छोटे-छोटे अंगूर या आंसू की बूंद जैसे दिखने वाले मांस के टुकड़े होते हैं। अच्छी बात यह है कि इनमें कोई दर्द नहीं होता और न ही ये कैंसर वाले होते हैं (यानी ये बिल्कुल नॉर्मल गांठें होती हैं)। लेकिन जब ये धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं, तो नाक का रास्ता बंद करने लगते हैं। इसकी वजह से नाक से लगातार पानी बहना, नाक बंद रहना और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।

5. मस्तिष्क-रीढ़ की हड्डी के द्रव का रिसाव (CSF Leak)- इसे सीधे शब्दों में दिमाग का पानी बहना कह सकते हैं। हमारे दिमाग और रीढ़ की हड्डी के चारों तरफ एक खास तरह का साफ पानी (द्रव) होता है, जो इन्हें सुरक्षित रखता है। लेकिन कभी सिर में चोट लगने की वजह से, किसी सर्जरी के बाद या किसी और कारण से इस पानी की थैली में छोटा सा छेद हो जाता है। ऐसे में यह पानी लीक होकर हमारी नाक के रास्ते बाहर आने लगता है।

6. तीखा या बहुत गर्म खाना- क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि गरमा-गरम सूप, चाट या मिर्च-मसाले वाला खाना खाते ही नाक से पानी आने लगता है? दरअसल, मसालेदार खाना हमारी नाक की नसों को ट्रिगर करता है, जिससे तुरंत पानी बहने लगता है।

7. दवाइयों का साइड इफेक्ट- कुछ दवाइयां, जैसे हाई ब्लड प्रेशर या दर्द की दवाएं लेने की वजह से भी कुछ लोगों की नाक बहने लगती है। इसके अलावा, जो लोग बिना डॉक्टर से पूछे बार-बार नाक में डालने वाला स्प्रे (Nasal Spray) यूज करते हैं, उनकी दिक्कत भी बढ़ सकती है।

8. बहुत ज्यादा रोना- आपने ध्यान दिया होगा कि जब हम बहुत रोते हैं, तो आंख के साथ-साथ नाक भी बहने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारी आंखों के आंसू अंदर ही अंदर नाक के रास्ते में चले जाते हैं।

9. शरीर में हार्मोन्स का बदलना- महिलाओं में प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) के दौरान, पीरियड्स के समय या थायराइड की परेशानी होने पर शरीर में कई बदलाव होते हैं। इन बदलावों के कारण भी नाक की नसें फूल जाती हैं और नाक बहने लगती है।

10. नाक में किसी चीज का फंसना- छोटे बच्चे खेलते-खेलते अक्सर नाक में मटर का दाना, छोटा मोती या कोई खिलौना डाल लेते हैं। अगर बच्चे की सिर्फ एक तरफ की नाक से लगातार बदबूदार पानी या बलगम आ रहा हो, तो समझ जाएं कि नाक में कुछ फंसा हुआ है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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