दिल्ली के एक होटल में लगी भीषण आग और उसमें 21 जिंदगियों के खाक होने के बाद भी अलवर का प्रशासन गहरी नींद में है। दिल्ली की उस भयावह घटना से सबक लेने के बजाय अलवर में जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। ‘दैनिक भास्कर’ की पड़ताल में सामने आया है कि दिल्ली-NCR क्षेत्र में शामिल अलवर शहर में कई होटल, गेस्ट हाउस और नए-नए खुले रूफ-टॉप रेस्टोरेंट बिना फायर NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के धड़ल्ले से चल रहे हैं। कइयों ने तो अवैध रूप से रूफ टॉप बना दिए। इस मामले में नगर निगम के कमिश्नर सोहन सिंह का कहना है कि ये कई साल पहले से बने हुए हैं। लेकिन हमने जांच के आदेश दिए हैं। नंगली सर्किल पर नियमों की धज्जियां: छत पर अवैध निर्माण शहर का सबसे व्यस्त इलाका ‘नंगली सर्किल’ इस समय सबसे बड़े खतरे की जद में है। यहाँ कॉमर्शियल बहुमंजिला इमारतों के ऊपर नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से रूफ-टॉप रेस्टोरेंट बना दिए गए हैं। जयंती मॉल पर टॉपनोच, एसएमडी से पहले स्काइलाइट रूफटॉप रेस्टोरेंट हैं। जो भवन बनने के बाद ऊपर अनाधिकृत बना दिए। बलग में अलवर रॉयल हॉल पर भी रूफटाॅप रेस्टोरेंट बना दिया। जिसकी फायर एनओसी भी रिन्यू नहीं है। इन अवैध रेस्टोरेंट्स में 24 घंटे कमर्शियल भट्टियां और गैस चूल्हे जलते हैं। नंगली सर्किल पर ऐसे तीन बड़े होटल और रेस्टोरेंट संचालित हैं, जो सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। 200 फीट रोड और कंट्रोल रूम के ठीक सामने ‘नो एंट्री’ में खेल! हैरानी की बात यह है कि पुलिस कंट्रोल रूम के ठीक सामने और 200 फीट रोड पर चल रहे गेस्ट हाउस व होटलों के पास आग से निपटने के न्यूनतम इंतजाम तक नहीं हैं। अधिकतर के पास फायर एनओसी तक नहीं है। ट्रेड लाइसेंस भी अनिवार्य इस मामले में नगर निगम के अधिकारी भुवन शुक्ला का कहना है कि रूफ टॉप रेस्टोरेंट संचालकों के पास लाइसेंस है या नहीं। यह पता करना होगा। वैसे ट्रेड लाइसेंस होना जरूरी होता है। लाइसेंस देते समय यह देखा जाता है कि किस जगह रेस्टोरेंट का संचालन होगा वह नियम के अनुसार बनी है या नहीं। वहीं नगर निगम के कमिश्रन सोहन सिंह का कहना है कि इस मामले की जांच करा रहे हैं। अभी अग्निश्नम अधिकारी को जांच करने के आदेश दिए हैं। बाकी जांच भी कराएंगे। उसके अनुसार आगे कार्यवाही की जाएगी।


