बेतिया पुलिस अधीक्षक डॉ. शौर्य सुनम ने अपने कार्यालय कक्ष में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में जिला लोक अभियोजक, विशेष लोक अभियोजक, पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय और अभियोजन शाखा के प्रभारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करना था। बैठक में पटना उच्च न्यायालय द्वारा मॉनिटर किए जा रहे मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। पुलिस अधीक्षक ने इन केसों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर दिया कि इससे न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होगी और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा, जिससे न्याय व्यवस्था मजबूत होगी। न्यायालय में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने पर बल दिया
डॉ. सुनम ने अभियोजन से जुड़े सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय मजबूत करने का निर्देश दिया। उन्होंने साक्ष्य संकलन में तेजी लाने, केस डायरी को समय पर अपडेट करने और न्यायालय में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, गवाहों की उपस्थिति और केस से संबंधित दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने के महत्व पर भी जोर दिया गया। अन्य लंबित न्यायालयी मामलों पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। प्रत्येक मामले की प्रगति की समीक्षा की गई और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि सभी मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अभियोजन और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मामलों को मजबूत बनाने का भी निर्देश दिया, ताकि दोषियों को सजा मिल सके। इस बैठक को न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बेतिया पुलिस अधीक्षक डॉ. शौर्य सुनम ने अपने कार्यालय कक्ष में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में जिला लोक अभियोजक, विशेष लोक अभियोजक, पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय और अभियोजन शाखा के प्रभारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करना था। बैठक में पटना उच्च न्यायालय द्वारा मॉनिटर किए जा रहे मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। पुलिस अधीक्षक ने इन केसों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर दिया कि इससे न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होगी और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा, जिससे न्याय व्यवस्था मजबूत होगी। न्यायालय में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने पर बल दिया
डॉ. सुनम ने अभियोजन से जुड़े सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय मजबूत करने का निर्देश दिया। उन्होंने साक्ष्य संकलन में तेजी लाने, केस डायरी को समय पर अपडेट करने और न्यायालय में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, गवाहों की उपस्थिति और केस से संबंधित दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने के महत्व पर भी जोर दिया गया। अन्य लंबित न्यायालयी मामलों पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। प्रत्येक मामले की प्रगति की समीक्षा की गई और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि सभी मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अभियोजन और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मामलों को मजबूत बनाने का भी निर्देश दिया, ताकि दोषियों को सजा मिल सके। इस बैठक को न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


