इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में गाजियाबाद में फर्जी दूतावास चलाने और खुद को ‘रॉयल एडवाइजर’ (शाही सलाहकार) बताते हुए ‘ कॉन्सुलर’ कार्यालय संचालित करने के आरोपी 49 वर्षीय व्यक्ति को जमानत दी है। एसटीएफ ने जुलाई में पकड़ा था जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने आरोपी हर्षवर्धन जैन को यह राहत दी है। जैन को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने पिछले वर्ष जुलाई में गिरफ्तार किया था। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने खुद को वेस्ट आर्कटिका नामक गैर-मौजूद देश का राजनयिक बताकर कथित कांसुलेट संचालित किया और विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से संपर्क किया।
उसके पास से कथित तौर पर फर्जी कूटनीतिक पासपोर्ट, नकली दस्तावेज, और डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी गाड़ियां बरामद हुई थीं। बचाव पक्ष ने पेश की दलीलें वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी कि उसके पास मौजूद अतिरिक्त पासपोर्ट और नंबर प्लेट केवल स्मृति चिन्ह (नॉवेल्टी आइटम) थे और उनका उपयोग किसी सरकारी पहचान के रूप में नहीं किया गया। यह भी कहा गया कि आरोपी के खिलाफ किसी व्यक्ति द्वारा ठगी या धोखाधड़ी की कोई शिकायत दर्ज नहीं है।
राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच के दौरान आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, जो उसकी संलिप्तता को दर्शाते हैं। हालांकि, कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि चूंकि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, इसलिए आरोपी को आगे जेल में रखने का औचित्य नहीं बनता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत दी।


