वाराणसी जिला सत्र न्यायालय की एक कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में दुष्कर्म के आरोपी को रिहा कर दिया। गिरफ्तारी और चार्जशीट के बावजूद पुलिस और पीड़िता आरोपी के खिलाफ कोई मजबूत और ठोस सबूत जज के सामने पेश नहीं कर पाए। कई तारीखों में गवाह, बयान, साक्ष्य और पुलिस रिपोर्ट देखने के बावजूद आरोपी को कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई। फास्ट ट्रैक कोर्ट (द्वितीय) सुनील कुमार की अदालत ने बंजरवां, फूलपुर निवासी आरोपित अजय यादव को आरोप सिद्ध न होने पर संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। उस पर युवती से दुष्कर्म करने और उसका अश्लील वीडियो और फोटो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी देने का आरोप था, जिसका ट्रायल चल रहा था। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव गुड्डू, नरेश यादव व संदीप यादव ने पक्ष रखा। अभियोजन ने कोर्ट को बताया पूरा मामला अभियोजन ने कोर्ट को बताया कि गाजीपुर जनपद की निवासी पीड़िता ने बनारस के फूलपुर थाने में उससे दुष्कर्म करने और धमकाने समेत कई आरोपों को लगाते हुए गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया था। आरोप था कि उसके मायके का रहने वाला अजय यादव काफी मनबढ़ किस्म का व्यक्ति है। वह पीड़िता के विवाह के एक वर्ष पूर्व उसके दस वर्षीय छोटे भाई को जान से मारने की धमकी देकर जबरदस्ती उसके साथ बलात्कार किया और उसका अश्लील वीडियो फिल्म बना लिया। इसके बाद अजय यादव वीडियो फिल्म वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ लगातार बलात्कार करता रहा। पीड़िता का विवाह होने के बाद से ही अजय यादव अक्सर उसे धमकी देता रहा कि वह उसके साथ शारीरिक संबंध बनाएं, नहीं तो वह उसकी वीडियो को सारे रिश्तेदारों के मोबाइल पर भेजकर उसे बदनाम कर देगा। इस प्रकार वह बार-बार ब्लैकमेल कर पीड़िता के साथ बलात्कार करता रहा। पीड़िता पहले लोकलाज से यह बात लोगों से छिपाती रही, लेकिन जब उसका अत्याचार काफी बढ़ने लगा तो पीड़िता ने थाने में रिपोर्ट लिखवायी। जज ने जजमेंट में दिया संदेह का लाभ प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, वहीं विवेचना कर चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य के विश्लेषण करने के पश्चात यह स्पष्ट है कि पीड़िता आरोपित से पूर्व परिचित थी। एक मात्र साक्षी के साक्ष्य के आधार पर दोषसिद्धि उसी स्थिति में हो सकती है, जबकि परिस्थितियां ऐसी हो कि अन्य साक्षी उपलब्ध नही हो सकते हो तथा एक मात्र साक्षी का साक्ष्य विश्वास प्रेरित करता हो एवं विशुद्ध गुणवत्ता वाला बेदाग हो, जिस पर पूर्ण रूप से भरोसा किया जा सके। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि अभियोजन द्वारा अभियुक्त अजय यादव के विरुद्ध लगाये आरोप को युक्ति-युक्त संदेह से परे साबित करने में पूर्णरूप से असफल रहा है। ऐसे में आरोपित को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया जाता है।


