भिलाई में शेयर मार्केट में इन्वेस्ट कर मोटा मुनाफा दिलाने का लालच देकर लोगों से 48 लाख रुपए की ठगी करने वाले आरोपी को सुपेला पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को शेयर ट्रेडिंग का जानकार बताकर निवेशकों को हर महीने 3 प्रतिशत तक रिटर्न देने का भरोसा देता था। शुरुआती कुछ महीनों तक उसने निवेशकों को रकम भी लौटाई, लेकिन बाद में पैसा वापस देने से इनकार कर दिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी टोमन दास साहू, हनुमान मंदिर के पास पुरानी बस्ती सुपेला का निवासी है। उसके खिलाफ शेयर मार्केट में निवेश कराने के नाम पर धोखाधड़ी की कई शिकायतें मिली थीं। शिकायतों की जांच के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी के घर और कार्यालय की तलाशी के दौरान पुलिस ने एक कार, एक लैपटॉप, एक सीपीयू, एक की-बोर्ड, दो मॉनिटर, 10 चेक बुक, दो मोबाइल फोन, लेन-देन से संबंधित चार डायरी और 10 ट्रॉफियां जब्त की हैं। जब्त दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। हालांकि, पुलिस के अनुसार 10 से अधिक अन्य पीड़ितों के सामने आने की जानकारी है। ऐसे में जांच आगे बढ़ने पर ठगी की कुल राशि 48 लाख रुपए से अधिक हो सकती है। रिटायर्ड कर्मचारी से 10 लाख की ठगी पहले मामले में सेक्टर-6 भिलाई निवासी पीपी. राव (63) ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि वे शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। मोहल्ले के एक परिचित ने उनकी मुलाकात टोमन दास साहू से कराई थी। आरोपी ने खुद को शेयर ट्रेडिंग का विशेषज्ञ बताते हुए कहा कि निवेश करने पर हर महीने 3 प्रतिशत तक मुनाफा मिलेगा और मूलधन पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। उसकी बातों पर भरोसा कर पीपी राव ने 18 दिसंबर 2024 को उसे 10 लाख रुपए नकद निवेश के लिए दिए थे। शुरुआती 6 महीने तक आरोपी ने तय रकम के अनुसार लाभांश का भुगतान किया, जिससे उनका भरोसा और बढ़ गया। इसके बाद उसने भुगतान बंद कर दिया। जब पीपी राव ने अपनी मूल रकम वापस मांगी, तो आरोपी ने अलग-अलग बैंकों के कई चेक दिए। हालांकि खातों में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण सभी चेक बाउंस हो गए। सरकारी कर्मचारी और उसके साथी से 38 लाख की ठगी दूसरे मामले में रायपुर निवासी दीपक गाडगे ने शिकायत दर्ज कराई है। वे मेकाहारा अस्पताल में स्टोर कीपर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके साथी भीष्म महिलांग पहले से ही टोमन दास साहू के यहां निवेश कर चुके थे। उन्हीं के माध्यम से उनकी मुलाकात आरोपी से हुई थी। दीपक गाडगे के अनुसार, टोमन दास साहू ने उन्हें भी हर महीने 3 प्रतिशत तक मुनाफा देने और मूल रकम पूरी तरह सुरक्षित रहने का भरोसा दिलाया था। इस भरोसे पर उन्होंने अलग-अलग समय में अपनी मां के बैंक खाते और अन्य माध्यमों से कुल 23 लाख रुपए निवेश किए। वहीं उनके साथी भीष्म महिलांग ने भी करीब 15 लाख रुपए लगाए थे। शुरुआती कुछ महीनों तक दोनों निवेशकों को तय मुनाफे के अनुसार भुगतान मिलता रहा, लेकिन बाद में आरोपी ने रकम देना बंद कर दिया। जब दोनों ने अपनी जमा पूंजी वापस मांगी, तो आरोपी ने 12 लाख रुपए का एक चेक दिया। हालांकि बैंक में प्रस्तुत करने पर वह चेक बाउंस हो गया। पैसे वापस मांगने पर देता था धमकी शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निवेश की गई रकम वापस मांगने पर आरोपी लगातार बहाने बनाता था। कई बार उसका कार्यालय बंद मिलता था और वह जानबूझकर मिलने से बचता था। पीड़ितों के अनुसार आरोपी व्हाट्सएप कॉल पर गाली-गलौज करता था और उन्हें जान से मारने तथा गायब कर देने की धमकी भी देता था। जब भी वे अपनी रकम वापस लेने उसके पास पहुंचते, वह उनसे मिलने से कतराता था। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि आरोपी फोन पर धमकी देते हुए कहता था कि उसने जो चेक दिए हैं, वे सिर्फ उन्हें बहलाने के लिए दिए गए थे। इतना ही नहीं, वह यह भी दावा करता था कि उसके पास मौजूद एग्रीमेंट के आधार पर वे उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। 10 से ज्यादा पीड़ित आए सामने बताया जा रहा है कि आरोपी ने केवल इन शिकायतकर्ताओं ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों से भी निवेश के नाम पर लाखों रुपए की रकम जुटाई है। मामले में अब तक 10 से अधिक पीड़ितों के सामने आने की जानकारी मिली है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी शुरुआत में निवेशकों को तय मुनाफा देकर उनका भरोसा जीतता था। इसके बाद वह उनसे बड़ी रकम निवेश करवाता था और कुछ समय बाद भुगतान बंद कर देता था। पुलिस को आरोपी के कब्जे से बैंक से जुड़े दस्तावेज, चेक बुक और लेन-देन का रिकॉर्ड रखने वाली डायरियां मिली हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर अन्य निवेशकों और संभावित पीड़ितों की जानकारी भी सामने आ सकती है। जांच अधिकारी फिलहाल आरोपी के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल कर रहे हैं।


