रील विधायक Vs रियल विधायक:पंकज झा बोले-सिनेमा में काम करने से या MLA बनने से कोई बड़ा नहीं होता;काव्य कुंभ में छिड़ी दिलचस्प बहस

रील विधायक Vs रियल विधायक:पंकज झा बोले-सिनेमा में काम करने से या MLA बनने से कोई बड़ा नहीं होता;काव्य कुंभ में छिड़ी दिलचस्प बहस

काव्य कुंभ के मंच पर शनिवार को एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला। एक तरफ ‘पंचायत’ वेब सीरीज में विधायक का किरदार निभाकर घर-घर पहचान बनाने वाले अभिनेता पंकज झा थे, तो दूसरी तरफ असली जिंदगी में विधायक और अभिनेता अनुज शर्मा। मंच पर दोनों के बीच हंसी-मजाक, वैचारिक नोकझोंक और जिंदगी के अनुभवों से भरी बातचीत ने श्रोताओं को बांधे रखा। बातचीत के दौरान पंकज झा ने नेताओं और अभिनेताओं को जरूरत से ज्यादा महत्व दिए जाने के कल्चर पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “सिनेमा में काम करने से या विधायक बनने से कोई बड़ा नहीं हो जाता। हम सब आखिर इंसान ही हैं। नेताओं और अभिनेताओं को लेकर जो अनावश्यक महिमामंडन है, उसे खत्म होना चाहिए।” इसके बाद उन्होंने अपनी कविता की पंक्तियां सुनाकर पूरे माहौल को गंभीर बना दिया- “आदमी से पूछता है आदमी, किधर मिलेगा आदमी…
दूसरों की निगाहों में खुद का पता खोजता है आदमी…” पंकज झा ने कहा कि आज सबसे बड़ी जरूरत इंसान को खोजने और संवाद को बचाए रखने की है। उन्होंने कहा, “मैंने फिल्में लिखी हैं, अभिनय किया है, पेंटिंग करता हूं, लेकिन आखिर में मैं भी आपकी तरह एक सामान्य इंसान हूं। जिस पर जितनी ज्यादा रोशनी पड़ती है, उसके हिस्से उतना ही अंधेरा भी आता है।” अनुज शर्मा बोले- पहचान नहीं, इंसानियत मायने रखती है पंकज झा की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि वे उनके विचारों का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा, “सम्मान हर व्यक्ति का होना चाहिए, चाहे वह आम नागरिक हो, गरीब हो, विधायक हो या अभिनेता। आखिर में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप इंसान कैसे हैं। अगर इंसानियत है तो सब कुछ है, नहीं तो उपलब्धियों का भी कोई अर्थ नहीं रह जाता।” सबसे बड़ी क्रिएटिविटी खुद को पहचानना है पंकज झा ने जब कहा कि “रचनात्मक व्यक्ति कभी संतुष्ट नहीं हो सकता, सबसे बड़ी क्रिएटिविटी खुद को पहचानना है”, तो माहौल गंभीर हो गया। उन्होंने कहा कि कलाकार को लोगों की तालियों और तारीफों से ज्यादा अपने भीतर झांकने की जरूरत होती है। अपनी कविता की पंक्तियां सुनाते हुए उन्होंने कहा, “तारीफों से घर भर गए हैं मेरे, सांस लेने के लिए मुझे छत पर जाना होता है।” पंकज झा ने कहा कि समाज, परिवार और व्यवस्था इंसान पर कई परतें चढ़ा देते हैं, जबकि असली काम उन परतों को हटाकर खुद को पहचानना है। पंकज झा ने कहा, “सेल्फ रियलाइजेशन ही असली शिक्षा है। पेंटिंग, अभिनय या लेखन से भी बड़ी क्रिएटिविटी है खुद को गढ़ना।” अनुज बोले- यहां कोई पक्ष-विपक्ष नहीं चल रहा पंकज झा की बात खत्म होते ही अनुज शर्मा ने माइक संभाला और कहा, “सबसे पहले मैं स्पष्ट कर दूं कि यहां कोई पक्ष-विपक्ष नहीं चल रहा है। हम चर्चा कर रहे हैं। पंकज जी के विचारों का मैं सम्मान करता हूं, भले ही हमारे विचार अलग हो सकते हैं।” अनुज शर्मा बोले कि हम आज पहली बार मिले हैं और सच कहूं तो मैं इन्हें पहली बार सुन भी रहा हूं। अनुज ने आगे कहा, “पंकज जी दर्शन और अध्यात्म की बात कर रहे हैं। कोई कलाकार अगर खुद को नहीं समझेगा तो वह कला को भी नहीं समझ पाएगा। मुझे खुशी है कि पंकज जी खुद को अच्छी तरह जानते हैं। शायद यही वजह है कि वे इतने सफल अभिनेता हैं। अनुज शर्मा ने कहा, “दुनिया की नजर में पंकज जी सफल हैं, लेकिन पंकज जी की अपनी परिभाषा में मैं उन्हें सफल नहीं कहूंगा।”यह सुनते ही हॉल एक बार फिर तालियों और ठहाकों से गूंज उठा। पंकज झा भी कहां चूकने वाले थे। उन्होंने तुरंत जवाब दिया, “यही फर्क होता है… बात को थोड़ा घुमाकर, लपेटकर सामने रख देना।” भारतीय पुरुषों को महिलाओं के प्रेम पर भरोसा ही नहीं, इसलिए उन्हें बांधकर रखना चाहते हैं’ संवाद सत्र के दौरान अभिनेता पंकज झा ने पुरुष और महिला संबंधों पर बेबाक टिप्पणी करते हुए कहा कि भारतीय समाज में आज भी महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि स्त्री ही परिवार, समाज और पूरी दुनिया को संतुलित बनाए रखने का काम करती है, लेकिन इसके बावजूद उसे अक्सर दोयम दर्जे का माना जाता है। पंकज झा ने कहा कि भारतीय पुरुषों को शायद खुद पर इतना भरोसा नहीं होता कि कोई महिला उनसे प्रेम भी कर सकती है। इसलिए वे जल्दी शादी कर उन्हें घर की चारदीवारी में बांध देते हैं। मंच पर पैर पकड़कर फीस कम कराने की मांग करने लगे पंकज झा काव्य कुंभ के संवाद सत्र के अंतिम समय अभिनेता पंकज झा मंच से ही केपीएस स्कूल प्रबंधन से बच्चों की फीस कम करने की अपील कर दी। बात यहीं नहीं रुकी। पंकज झा मजाक-मजाक में स्कूल डायरेक्टर के पैर पकड़ने लगे और बोले कि पेरेंट्स बड़ी मेहनत से फीस भरते हैं, इसलिए बच्चों की फीस कम की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने शिक्षकों की मेहनत का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सैलरी में कम से कम 2 हजार रुपए की बढ़ोतरी की जानी चाहिए। पंकज झा के इस आग्रह पर स्कूल डायरेक्टर आशूतोष त्रिपाठी ने मंच से ही शिक्षकों के वेतन में न्यूनतम 2 हजार रुपए बढ़ाने की घोषणा कर दी। हैली शाह और अमनदीप ख्याल ने प्रेम, रिश्तों और जिंदगी की कहानियों से जीता दिल संवाद सत्र के बाद मंच पर हैली शाह और अमनदीप ख्याल की प्रस्तुतियों ने काव्य कुंभ के माहौल को भावनाओं से भर दिया। हैली शाह ने अपनी कविताओं के जरिए प्रेम, रिश्तों और जीवन के अनकहे एहसासों को शब्द दिए, वहीं अमनदीप ख्याल ने अपनी चर्चित स्टोरीटेलिंग शैली में प्यार, बिछड़ने, उम्मीद और आत्मीय रिश्तों की कहानियां सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया। हैली ने कहा कि शब्द तभी असर करते हैं, जब वे दिल से निकलते हैं। उनकी कविताओं पर युवाओं ने जमकर तालियां बजाईं और कई श्रोता मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर उनकी प्रस्तुति का आनंद लेते नजर आए। युग्म बैंड के गीतों पर देर रात तक झूमते रहे युवा काव्य कुंभ के पहले दिन का समापन संगीत के सुरों के साथ हुआ। रात में जैसे ही युग्म बैंड ने मंच संभाला, पूरा माहौल ऊर्जा और उत्साह से भर गया। बैंड ने अपने लोकप्रिय गीत “Doley All Alone” और “तुम तोते हो क्या” समेत कई प्रस्तुतियों से युवाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। गीतों के साथ दर्शक भी सुर में सुर मिलाते नजर आए और देर रात तक पूरा परिसर संगीत के रंग में डूबा रहा। प्रस्तुति के दौरान बैंड के सदस्यों ने कहा, “हमें जिंदगी की हर चीज से दूर होना मंजूर है, लेकिन मंच से कभी दूर न होना पड़े।” उन्होंने बताया कि उनके गीत किसी कल्पना की उपज नहीं, बल्कि जिंदगी में जिए गए अनुभवों, संघर्षों, प्रेम और भावनाओं से लिखे है। जैसे-जैसे रात बढ़ती गई, संगीत का सुरूर भी चढ़ता गया और युवा देर रात तक गानों पर झूमते रहे। युग्म बैंड की प्रस्तुति ने काव्य कुंभ के पहले दिन को यादगार समापन दिया। …………… यह खबर भी पढ़िए… सिंगर राहगीर बोले- बचपन की याद है ‘बाल-भास्कर’: पैसे बचाकर खरीदता था, राजनांदगांव में ‘ये जो हंस रही है दुनिया’ पर झूमे लोग मशहूर सिंगर और गीतकार राहगीर शुक्रवार को राजनांदगांव पहुंचे, ‘काव्य कुंभ’ में उन्होंने अपनी परफॉर्मेंस से ऑडिटोरियम में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया। दैनिक भास्कर डिजिटल से बातचीत में उन्होंने न केवल अपने संगीत के सफर और छत्तीसगढ़ से जुड़े एक्सपीरियंस को शेयर किया। पढ़ें पूरी खबर…

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