पद्मविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने श्रीराम कथा के तीसरे दिन भगवान के अवतारों की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जब संसार में अधर्म और अनीति बढ़ती है, तब भगवान सज्जनों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए अवतरित होते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम का अवतार भी धर्म की पुनर्स्थापना के लिए हुआ था। इस दौरान उन्होंने लखनऊ की सांस्कृतिक पहचान को भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण से जोड़ते हुए कहा कि यह नगर नवाबों का नहीं, बल्कि कुमार लक्ष्मण का नगर है।
भगवान राम का जीवन मानवता के लिए आदर्श : रामभद्राचार्य सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने कहा कि भगवान राम का जीवन केवल एक राजकुमार का जीवन नहीं था, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए आदर्श और प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि भगवान के विभिन्न अवतारों का उद्देश्य समाज को नई दिशा देना, आसुरी शक्तियों का नाश करना और दैवीय मूल्यों की स्थापना करना रहा है।
बड़े मंगल और धार्मिक परंपराओं का किया उल्लेख रामभद्राचार्य ने कहा कि लखनऊ अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के कारण देश में विशिष्ट स्थान रखता है। उन्होंने बड़े मंगल की परंपरा और शहर में आयोजित होने वाले विशाल भंडारों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर भगवान लक्ष्मण की नगरी के रूप में अपनी अलग पहचान रखता है।
भारतीय संविधान पर उठाए सवाल अपने संबोधन में रामभद्राचार्य ने भारतीय संविधान को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया दैट इज भारत’ के स्थान पर ‘भारत दैट इज इंडिया’ होना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में मनुस्मृति का उल्लेख नहीं किया गया, जबकि स्वयंभू मनु को उन्होंने प्रथम संविधान निर्माता बताया।
भजनों पर झूम उठे श्रद्धालु कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने अपने विशेष अंदाज में कई भजनों की प्रस्तुति दी। ‘हमनी के धन एगो राघव के चरण बा’, ‘अब तो स्वयंभू मनु को अवतारी चाहिए’ और ‘शंकर तू ले ल कैलाश, हम त भारते रहबे’ जैसे भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। संगीत मंडली ने भी प्रभावी संगत प्रस्तुत की।
कई प्रमुख हस्तियां पहुंचीं कथा स्थल कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विपणन एवं उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री और विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक डॉ. नीरज बोरा, पद्मश्री मालिनी अवस्थी, यूपी कोऑपरेटिव यूनियन के उपसभापति ब्रजकिशोर गुप्ता समेत कई गणमान्य लोगों ने व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के बाद विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों तथा श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती में सहभागिता की।


