6 साल पहले एक दर्दनाक ट्रेन हादसे में दोनों पैर गंवाने वाले बाराबंकी के राजू की जिंदगी में अब नई रोशनी लौट आई है। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप और KGMU के चिकित्सकों के प्रयासों से राजू एक बार फिर अपने पैरों पर खड़ा हो सका है। कृत्रिम पैरों की मदद से वह अब न केवल चल-फिर सकता है, बल्कि सीढ़ियां चढ़ने, बैठने-उठने और दैनिक कार्य भी आत्मनिर्भर होकर कर रहा है। बेटे को दोबारा चलते देख परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है। हादसे ने बदल दी थी जिंदगी बाराबंकी जिले की रामनगर तहसील के लोहटी जेई गांव निवासी मजदूर फूलचंद्र का बेटा राजू (22) वर्ष 2018 में घाघरा घाट रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरते समय दुर्घटना का शिकार हो गया था। गंभीर रूप से घायल राजू को KGMU ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उसकी जान बचाने के लिए चिकित्सकों को दाहिना पैर घुटने के ऊपर से और बायां पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा। इलाज के बाद वह घर तो लौट आया, लेकिन चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गया। मुख्यमंत्री जनता दरबार से मिली मदद आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए कृत्रिम पैर लगवाना संभव नहीं था। लंबे समय तक संघर्ष करने के बाद परिजनों ने 2 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री जनता दरबार में अपनी समस्या रखी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राजू का मामला KGMU के शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग (डीपीएमआर) को सौंपा गया। KGMU ने तैयार किए कृत्रिम पैर प्रोस्थेटिक एवं ऑर्थोटिक यूनिट की प्रभारी शगुन सिंह ने बताया कि विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल गुप्ता और डॉ. आराधना की देखरेख में राजू का उपचार शुरू किया गया। सबसे पहले पैरों में पड़े छालों का इलाज किया गया। इसके बाद लुधियाना की एक कंपनी से आवश्यक सामग्री दान स्वरूप प्राप्त हुई, जबकि अन्य उपकरण और सामग्री KGMU की निर्धन मरीज सहायता योजनाओं से उपलब्ध कराई गई। ढाई महीने की ट्रेनिंग के बाद लौटी मुस्कान करीब 50 हजार रुपये की लागत से राजू के लिए दोनों कृत्रिम पैर तैयार किए गए, जिसका पूरा खर्च संस्थान और सहयोगी योजनाओं ने वहन किया। कृत्रिम पैर लगाने के बाद उसे लगभग ढाई महीने तक विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद राजू अब आत्मविश्वास के साथ स्वयं चलने लगा है। सोमवार को उसे अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेजा जाएगा।


