राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में अपनी कॉमेडी से घर-घर में पहचान बनाने वाली ‘पंकू-बन्नू’ की जोड़ी आज टूटकर विवादों के भंवर में फंस गई है। मंगलवार की रात सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें हमेशा हंसाने वाले पंकज सोनी उर्फ पंकू फूट-फूटकर रो रहे थे। यह आंसू किसी स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं थे, बल्कि उस कथित ‘पुलिसिया कार्रवाई’ और ‘दोस्ती में मिले धोखे’ का दर्द थे, जिसने अब सीकर पुलिस अधीक्षक (SP) के दफ्तर तक दस्तक दे दी है।
‘5 मई की वो ‘खौफनाक’ रात’ : पंकू के गंभीर आरोप
बुधवार को सीकर एसपी प्रवीण नूनावत के पास शिकायत लेकर पहुंचे पंकज सोनी ने मीडिया के सामने अपनी आपबीती सुनाई। पंकज का आरोप है कि 5 मई की रात करीब 8 बजे पुलिस बिना किसी वारंट या नोटिस के उनके घर में घुसी। उस वक्त घर पर पंकू के माता-पिता और मामी मौजूद थे।
आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ ‘अपराधियों’ जैसा व्यवहार किया। पंकू ने दावा किया कि पुलिस ने घर की सुरक्षा के लिए लगे कैमरे जबरन निकाल दिए और उन्हें घर खाली करने की धमकी दी।
पंकू के घर का रात का वायरल वीडियो
दोस्ती, जमीन और वो ‘कागज’ जो कभी बने ही नहीं
इस पूरी कॉन्ट्रोवर्सी की जड़ 2019 में शुरू हुई पंकू और बन्नू (बनवारीलाल गोस्वामी) की अटूट दोस्ती में छिपी है। दोनों ने मिलकर गाड़ोदा गांव में जमीन और गाड़ी खरीदी थी। दोनों के परिवार अगल-बगल रहते थे।
पंकज ने भावुक होते हुए कहा, “दोस्ती में मैंने घर की रजिस्ट्री अपने नाम नहीं करवाई। मुझे क्या पता था कि जिस पर मैं भरोसा कर रहा हूं, वही कल इसे हथियार बनाएगा।”
बिजली का बिल और वीडियो: पंकू के पास फिलहाल घर पर अपना हक जताने के लिए बिजली का बिल और पुराने वीडियो ही एकमात्र सबूत हैं।
8 महीने से चल रहा था ‘कोल्ड वॉर’
पंकू और बन्नू के बीच विवाद आज का नहीं है। पिछले साल 28 सितंबर से ही दोनों के बीच घर को लेकर ठन गई थी।
- काम पर ब्रेक: इस विवाद का असर उनके करियर पर भी पड़ा। पिछले 8 महीनों से दोनों ने साथ में कोई वीडियो नहीं बनाया है।
- सुरक्षा की चिंता: पंकज ने बताया कि काम के सिलसिले में उन्हें बाहर रहना पड़ता है और पीछे से उनके बुजुर्ग माता-पिता अकेले रहते हैं। ऐसे में पुलिस की इस कार्रवाई ने उनके मन में डर पैदा कर दिया है।
जानें पूरे विवाद में बनवारीलाल उर्फ़ बन्नू की प्रतिक्रिया
एसपी ऑफिस में समर्थकों का रेला, आरएसी का पहरा
बुधवार दोपहर करीब 12 बजे जब पंकू एसपी ऑफिस पहुंचे, तो उनके साथ समर्थकों की भारी भीड़ मौजूद थी। स्थिति को देखते हुए प्रशासन को आरएसी (RAC) के जवानों को तैनात करना पड़ा। पंकू ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
क्या केवल संपत्ति का विवाद है?
हैरानी की बात यह है कि 8 महीने से चल रहे इस हाई-प्रोफाइल विवाद में अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी, फिर अचानक 5 मई की रात पुलिस किसके इशारे पर पंकू के घर पहुंची? क्या बन्नू की तरफ से कोई गुप्त शिकायत दी गई थी, या यह मामला कुछ और ही है? पुलिस की चुप्पी और पंकू के वीडियो ने इस विवाद को अब राजस्थान की सबसे बड़ी ‘सोशल मीडिया कॉन्ट्रोवर्सी’ बना दिया है।


