नीट पेपरलीक के कारण दुखी होकर जान देने वाली एमपी के मऊगंज की छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी के माता-पिता से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फोन पर बात की। शुक्रवार को राहुल और आकांक्षा की मां के बीच हुई बातचीत का वीडियो आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ विक्रांत भूरिया ने फेसबुक शेयर किया है। राहुल ने आकांक्षा की मां से कहा कि मैं आपकी यदि कोई सहायता कर सकता हूं तो बताईए। इस पर आकांक्षा की मां ने कहा आप तो खुद देश की रक्षा कर रहे हैं। मेरा तो जो गया वो लौटकर तो आएगा नहीं। राहुल गांधी और आकांक्षा की मां के बीच हुई सीधी बातचीत आकांक्षा की मां: हैलो। राहुल गांधी: नमस्ते। आकांक्षा की मां: नमस्ते सर। राहुल गांधी: नमस्कार, आज मैं एयरपोर्ट जा रहा था। मैंने आपकी बेटी की चिट्ठी पढ़ी तो मुझे बहुत दुख हुआ। इसलिए मैंने आपको फोन किया। अगर मेरे लायक कोई मदद हो या काम हो तो मैं कर सकता हूं। आकांक्षा की मां: मैं आप से क्या कहूं, आप तो खुद ही देश की रक्षा कर रहे हैं, मेरा तो जो गया वो तो आएगा नहीं। राहुल गांधी: हां, मैंने देखा, बेचारी उसकी इसमें कोई गलती नहीं थी, उसने कुछ गलत नहीं किया था, बस पढ़ाई की थी, आपने कर्ज लिया। आकांक्षा की मां: सबसे सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उसने इतनी मेहनत की। शायद ये पेपरलीक न होता तो, यह नहीं होता, हमारा तो कोई दूसरा है भी नहीं। एक ही सहारा थी हमारा। उसी के भरोसे उसके पिताजी टिके थे, उसी के भरोसे मैं टिकी थी। राहुल गांधी: मैंने चिट्ठी में देखा कि उसको लगा कि उसने आपको बर्बाद कर दिया। कि आपने कर्जा लिया था और उसने आपको बर्बाद कर दिया। मतलब बेचारी को कितना दर्द दुख हुआ होगा उसको। आकांक्षा की मां: अब आप चिट्ठी पढ़कर खुद सोच सकते हैं कि इसके अलावा जब उसने ऐसा लिखा तो उसके माँ बाप उसको कैसे वहां तक पहुंचाए होंगे। राहुल गांधी: तो आपने अपनी पूरी मेहनत की और मेरे पूरा का पूरा ऐसे ही पूरा सपना टूट गया। आकांक्षा की मां: जी पूरा टूट गया। उसका सपना था कि मेरे अच्छे मार्क्स आए हैं, मेरा पेपर लीक ना होता, तो मैं डॉक्टर बन जाती। क्योंकि, मेरे घर में लड़की ही बड़ी थी, बेटा तो मेरा छोटा है, वो तो कुछ कर नहीं सकता, उसकी तो अभी ग्रेजुएशन भी नहीं हुई है। पिताजी को तो कोई कुछ कहने लायक है ही नहीं। पिताजी को तो पानी हाथ में दो तभी पी सकते हैं। राहुल गांधी: क्या उन्हें पैरालाइज अटैक हुआ था? आकांक्षा की मां: उनका दो अटैक का ऑपरेशन हुआ था, और पैरालाइज भी हुआ है उनका दायां हाथ नहीं चलता। राहुल गांधी: मैं आपको फोन करना चाहता था। कोई मेरे लायक कुछ हो तो एनएसयूआई (NSUI) वालों को बता देना। (इस बीच आकांक्षा के पिता ने राहुल गांधी से बात की और कहा- “आपके माध्यम से ढ़ाई लाख रुपए प्राप्त हो चुके हैं। 50 हजार रुपए आज आने वाले हैं।”) आकांक्षा चतुर्वेदी मामला क्या है वो समझिए मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के मगनिया गांव की रहने वाली 18 साल की होनहार नीट अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी एक बेहद साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उनके पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी ने अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए करीब 3 लाख रुपए का कर्ज लिया था। इस कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद बेटी की पढ़ाई और कोचिंग का खर्च उठाने के लिए आकांक्षा के पिता खुद नागपुर में एक रसोइया (कुक) के रूप में काम करने लगे, जहां आकांक्षा एक कोचिंग संस्थान से मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ की तैयारी कर रही थी। इसके अलावा आकांक्षा के पिता पहले से ही दिल के दो ऑपरेशनों और पैरालिसिस (लकवे) के हमले से जूझ रहे थे, जिसके कारण उनका दायां हाथ काम नहीं करता था, लेकिन इन तमाम संघर्षों के बाद भी पूरा परिवार बेटी की उम्मीद पर टिका हुआ था। परीक्षा देकर लौटी तो बहुत खुश थी आकांक्षा आकांक्षा ने पूरी मेहनत और लगन के साथ नीट की परीक्षा दी। परीक्षा देकर जब वह लौटी तो बेहद खुश थी और उसे पूरा भरोसा था कि वह 650 से अधिक अंक हासिल कर इस बार मेडिकल कॉलेज में सीट पक्की कर लेगी। पूरा परिवार अपनी तंगहाली दूर होने की उम्मीद में बेहद खुश था। परंतु इसके कुछ ही समय बाद जब देशभर में नीट परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली, गड़बड़ियों और पेपर लीक होने की खबरें मीडिया में सामने आने लगीं, तो आकांक्षा को एक गहरा मानसिक सदमा लगा। परीक्षा को लेकर फैली अनिश्चितता और पेपर लीक के विवादों ने उसे गहरे तनाव और डिप्रेशन में धकेल दिया। वह अंदर ही अंदर इस बात को लेकर बेहद अस्वस्थ और परेशान रहने लगी कि इतनी मेहनत और परिवार के कर्ज में डूबने के बाद भी इस भ्रष्ट सिस्टम के कारण उसका भविष्य अंधकार में चला गया है। परिवार नागपुर में था बेटी ने घर पर कर ली आत्महत्या तनाव और मानसिक दबाव जब अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया, तब नागपुर में जब परिवार के बाकी लोग काम पर गए हुए थे, आकांक्षा ने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद उनके कमरे से एक बेहद दर्दनाक और भावुक सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। अपनी आखिरी चिट्ठी में आकांक्षा ने अपनी बेबसी और मां-बाप के प्रति ग्लानि को बयां करते हुए लिखा कि “मम्मी-पापा, आपको पूरा भरोसा था कि आपकी बेटी पढ़ लिखकर डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब मुझमें दोबारा नीट की परीक्षा देने की बिल्कुल हिम्मत नहीं है। पहले प्रयास में मैं अच्छे नंबर ला रही थी, पर इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि दोबारा पेपर होने पर भी मैं वैसा ही कर पाऊंगी। मुझे माफ कर देना मम्मी-पापा, मैंने आप दोनों को बर्बाद कर दिया।” ये खबर भी पढ़ें… NEET पेपर लीक से टूटी मऊगंज की छात्रा ने खुदकुशी की, सामने आया सुसाइड नोट आकांक्षा ने 20 मई को नागपुर में फांसी लगा ली। अब उसका सुसाइड नोट सामने आया है। इसमें लिखा है- पहले पेपर में अच्छे मार्क्स आने की उम्मीद थी, लेकिन अब दोबारा अच्छा पेपर होगा, इसकी गारंटी नहीं है। सॉरी मम्मी-पापा, मैंने सब बर्बाद कर दिया। पूरी खबर पढ़ें…


