पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) के नए भवन में रेडियोलॉजी विभाग अभी तक पूरी तरह से चालू नहीं हो पाया है। इसके कारण दूर-दराज से आने वाले मरीजों को एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी आवश्यक जांचों के लिए 150 मीटर पुराने भवन या इमरजेंसी ब्लॉक तक जाना पड़ रहा है। पीएमसीएच के पुनर्निर्माण परियोजना के तहत कई विभाग नए भवन में स्थानांतरित हो चुके हैं। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि यहां आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर इलाज व्यवस्था है। हालांकि, अस्पताल की रीढ़ माने जाने वाले रेडियोलॉजी विभाग में 2 एमआरआई और 1 सीटी स्कैन मशीन स्थापित होने के बावजूद वे अभी तक उपयोग में नहीं लाई जा सकी हैं। इन मशीनों को चालू करने में सबसे बड़ी बाधा एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) की मंजूरी है। सीटी स्कैन और अन्य रेडिएशन-आधारित उपकरणों के संचालन के लिए AERB की अनुमति अनिवार्य होती है, जो अभी तक नहीं मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षा मानकों के कारण इस मंजूरी के बिना उपकरणों का संचालन संभव नहीं है। इसके अलावा, रेडियोलॉजी विभाग को पूरी क्षमता से चलाने के लिए 60 से अधिक प्रशिक्षित टेक्नीशियन की आवश्यकता है। इन पदों पर अभी तक बहाली नहीं हो पाई है, जिससे विभाग के पूर्ण संचालन में देरी हो रही है। मरीजों की बढ़ी परेशानी
रेडियोलॉजी विभाग के पूरी तरह शुरू न होने का सबसे ज्यादा असर गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है। नए भवन में भर्ती मरीजों को जांच के लिए ट्रॉली या स्ट्रेचर के जरिए पुराने रेडियोलॉजी विभाग तक ले जाना पड़ता है, जो काफी दूरी पर स्थित है।
इस प्रक्रिया में समय की बर्बादी होती है, जिससे इलाज में देरी होती है। कई मामलों में मरीजों की स्थिति गंभीर होने के कारण यह जोखिम भरा भी साबित हो सकता है। परिजनों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
एकीकृत सुविधा का अधूरा सपना
नए रेडियोलॉजी विभाग में अत्याधुनिक सुविधाओं की योजना बनाई गई है, जिसमें 4 एमआरआई मशीन (दो 1.5 टेसला और दो 3 टेसला), दो सीटी स्कैन, 7 अल्ट्रासाउंड मशीन और 3 एक्स-रे मशीन शामिल हैं।
यदि यह विभाग पूरी तरह शुरू हो जाता है, तो मरीजों को एक ही ब्लॉक में सभी जांच सुविधाएं मिलेंगी। इससे समय की बचत होगी और इलाज की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी। फिलहाल यह सपना अधूरा नजर आ रहा है। आधुनिक हेल्थ सिस्टम की ओर बढ़ता पीएमसीएच
पीएमसीएच का नया भवन सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड हेल्थ-केयर सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें मल्टी-डिसिप्लिनरी इमरजेंसी, अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, ट्रॉमा केयर यूनिट और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
अब तक मेडिसिन इमरजेंसी (60 बेड), ईएनटी विभाग की इनडोर सेवाएं और ऑपरेशन थिएटर, स्किन-वीडी विभाग की आंशिक शिफ्टिंग और डॉक्टरों के चैंबर नए भवन में स्थानांतरित किए जा चुके हैं।
सेवाओं का हो रहा एकीकरण
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अगले चरण में सर्जरी इमरजेंसी, ट्रॉमा सेवाएं, ओपीडी और डायग्नोस्टिक सेवाओं का पूर्ण एकीकरण किया जाएगा। रेडियोलॉजी विभाग को भी जल्द पूरी तरह चालू करने का प्रयास जारी है। पीएमसीएच का नया भवन स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है, लेकिन जब तक रेडियोलॉजी जैसी बुनियादी और जरूरी सेवाएं पूरी तरह शुरू नहीं होतीं, तब तक इसका लाभ मरीजों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाएगा। पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) के नए भवन में रेडियोलॉजी विभाग अभी तक पूरी तरह से चालू नहीं हो पाया है। इसके कारण दूर-दराज से आने वाले मरीजों को एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी आवश्यक जांचों के लिए 150 मीटर पुराने भवन या इमरजेंसी ब्लॉक तक जाना पड़ रहा है। पीएमसीएच के पुनर्निर्माण परियोजना के तहत कई विभाग नए भवन में स्थानांतरित हो चुके हैं। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि यहां आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर इलाज व्यवस्था है। हालांकि, अस्पताल की रीढ़ माने जाने वाले रेडियोलॉजी विभाग में 2 एमआरआई और 1 सीटी स्कैन मशीन स्थापित होने के बावजूद वे अभी तक उपयोग में नहीं लाई जा सकी हैं। इन मशीनों को चालू करने में सबसे बड़ी बाधा एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) की मंजूरी है। सीटी स्कैन और अन्य रेडिएशन-आधारित उपकरणों के संचालन के लिए AERB की अनुमति अनिवार्य होती है, जो अभी तक नहीं मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षा मानकों के कारण इस मंजूरी के बिना उपकरणों का संचालन संभव नहीं है। इसके अलावा, रेडियोलॉजी विभाग को पूरी क्षमता से चलाने के लिए 60 से अधिक प्रशिक्षित टेक्नीशियन की आवश्यकता है। इन पदों पर अभी तक बहाली नहीं हो पाई है, जिससे विभाग के पूर्ण संचालन में देरी हो रही है। मरीजों की बढ़ी परेशानी
रेडियोलॉजी विभाग के पूरी तरह शुरू न होने का सबसे ज्यादा असर गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है। नए भवन में भर्ती मरीजों को जांच के लिए ट्रॉली या स्ट्रेचर के जरिए पुराने रेडियोलॉजी विभाग तक ले जाना पड़ता है, जो काफी दूरी पर स्थित है।
इस प्रक्रिया में समय की बर्बादी होती है, जिससे इलाज में देरी होती है। कई मामलों में मरीजों की स्थिति गंभीर होने के कारण यह जोखिम भरा भी साबित हो सकता है। परिजनों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
एकीकृत सुविधा का अधूरा सपना
नए रेडियोलॉजी विभाग में अत्याधुनिक सुविधाओं की योजना बनाई गई है, जिसमें 4 एमआरआई मशीन (दो 1.5 टेसला और दो 3 टेसला), दो सीटी स्कैन, 7 अल्ट्रासाउंड मशीन और 3 एक्स-रे मशीन शामिल हैं।
यदि यह विभाग पूरी तरह शुरू हो जाता है, तो मरीजों को एक ही ब्लॉक में सभी जांच सुविधाएं मिलेंगी। इससे समय की बचत होगी और इलाज की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी। फिलहाल यह सपना अधूरा नजर आ रहा है। आधुनिक हेल्थ सिस्टम की ओर बढ़ता पीएमसीएच
पीएमसीएच का नया भवन सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड हेल्थ-केयर सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें मल्टी-डिसिप्लिनरी इमरजेंसी, अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, ट्रॉमा केयर यूनिट और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
अब तक मेडिसिन इमरजेंसी (60 बेड), ईएनटी विभाग की इनडोर सेवाएं और ऑपरेशन थिएटर, स्किन-वीडी विभाग की आंशिक शिफ्टिंग और डॉक्टरों के चैंबर नए भवन में स्थानांतरित किए जा चुके हैं।
सेवाओं का हो रहा एकीकरण
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अगले चरण में सर्जरी इमरजेंसी, ट्रॉमा सेवाएं, ओपीडी और डायग्नोस्टिक सेवाओं का पूर्ण एकीकरण किया जाएगा। रेडियोलॉजी विभाग को भी जल्द पूरी तरह चालू करने का प्रयास जारी है। पीएमसीएच का नया भवन स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है, लेकिन जब तक रेडियोलॉजी जैसी बुनियादी और जरूरी सेवाएं पूरी तरह शुरू नहीं होतीं, तब तक इसका लाभ मरीजों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाएगा।


