पंजाब सरकार की शिवालिक रेंज में कंस्ट्रक्शन को मंजूरी देने के लिए बनाई गई पॉलिसी फॉर अप्रूवल/रेगुलराइजेशन ऑफ लो इम्पैक्ट ग्रीन हैबिटेट्स (LIGH) इन द स्टेट ऑफ पंजाब, 2025 पर नया विवाद खड़ा हो गया। पब्लिक एक्शन कमेटी (PAC) ने NGT में एक याचिका दायर की और उसमें कहा है कि सरकार के अफसरों ने यह पॉलिसी खुद को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई है। PAC का दावा है कि शिवालिक रेंज में पंजाब के चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा के बेटे व हाउसिंग डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी विकास गर्ग के पिता के नाम भी जमीन है। इन अफसरों की जमीन होने के दस्तावेज मिले हैं। ऐसे ही वहां पर कई अफसरों और नेताओं की जमीनें होंगी। पीएसी ने एनजीटी में दायर याचिका में लिखा है कि अफसरों ने खुद व अपने राजनीतिक आकाओं को फायदा पहुंचाने के लिए यह पॉलिसी बनाई है। PAC के जसकीरत सिंह व कपिल अरोड़ा ने कहा कि शिवालिक रेंज में किन किन अफसरों व नेताओं ने जमीनें ली हैं, इसकी विस्तार से जांच होनी चाहिए ताकि इस बात का खुलासा हो सके कि आखिर LIGH पॉलिस किन-किन रसूखदारों के लिए लाई गई थी। कपिल अरोड़ा का कहना है कि काउंसिल ऑफ इंजीनियर्स की याचिका पर एनजीटी पहले ही पंजाब सरकार की पॉलिसी पर स्टे लगा चुकी है। कपिल अरोड़ा का कहना है कि जिन अफसरों पर प्रदेश में अच्छी पॉलिसी बनाकर लागू करने का जिम्मा है वो ही अपने हितों को ध्यान में रखकर पॉलिसी बना रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि काउंसिल ऑफ इंजीनियर्स व पब्लिक एक्शन कमेटी एनजीटी में इस मामले को लेकर केस लडे़ेगी और अफसरों व नेताओं के मनसूबों को पूरा होने नहीं दिया जाएगा। खास बात है कि चीफ सेक्रेटरी व विकास गर्ग भी शिवालिक रेंज में परिजनों की जमीन होने से इनकार नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि जो जमीन खरीदी गई है वो पॉलिसी से पहले की है और इसमें किसी तरह से नियमों की अनेदखी नहीं की गई। पब्लिक एक्शन कमेटी की याचिका में क्या-क्या है; सिलसिलेवार जानिए… हाईकोर्ट ने पीएसी को दिए थे NGT में जाने के आदेश
पब्लिक एक्शन कमिटी (PAC) ने सरकार द्वारा 20 नवंबर 2025 की शाम को अधिसूचना जारी करने के तुरंत बाद दिसंबर 2025 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया था। कार्यकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस जनविरोधी और पर्यावरण विरोधी अधिसूचना को तुरंत रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने विवाद की प्रकृति को पूरी तरह ‘पर्यावरणीय’ पाया और चूंकि एनजीटी ऐसी तकनीकी पर्यावरण जांच के लिए विशेष अदालत है, इसलिए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपनी अर्जी वापस लेने और इसे और पुख्ता सबूतों के साथ एनजीटी जाने की मंजूरी दे दी। काउंसिल ऑफ इंजीनियर्स क्यों गई एनजीटी, जानिए.. पंजाब सरकार की LIGH पॉलिसी
पॉलिसी फॉर अप्रूवल/रेगुलराइजेशन ऑफ लो इम्पैक्ट ग्रीन हैबिटेट्स (LIGH) इन द स्टेट ऑफ पंजाब, 2025″ पंजाब सरकार द्वारा जारी की गई एक ऐसी विवादित नीति है, जिसके तहत शिवालिक की पहाड़ियों और कंडी क्षेत्र के इन्वायरमेंटली सेंसिटिव एंड रेस्ट्रिक्टेड (PLPA) इलाकों में बड़े निर्माणों को कानूनी अमलीजामा पहनाने की कोशिश की गई है। कागजों पर सरकार का दावा है कि इस पॉलिसी का मकसद वनों को नुकसान पहुंचाए बिना “कम प्रभाव वाले हरे आवास” विकसित करना और वहां पहले से बने अवैध निर्माणों से जुर्माना लेकर उन्हें नियम के दायरे में लाना है। लेकिन जमीनी हकीकत में, इस पॉलिसी के तहत कम से कम 4,000 वर्ग गज (1 एकड़) के प्लॉट पर ग्राउंड फ्लोर के साथ एक मंजिल (G+1) की पक्की कोठियां/फार्महाउस बनाने, बाउंड्री वॉल खींचने और मात्र 11 फीट चौड़ी संकरी सड़कों पर बड़े निर्माणों की छूट दे दी गई है। हालांकि इस पॉलिसी पर अभी एनजीटी ने अस्थाई रोक लगाई है। मैं बयान दे चुका हूं बार-बार नहीं कहूंगा
प्रिंसिपल सेक्रेटरी विकास गर्ग का कहना है कि मैं इस बारे में स्पष्ट कर चुका हूं बार-बार नहीं कहूंगा। पूर्व में विकास गर्ग कह चुके हैं कि मेरे या मेरे परिवार के किसी भी सदस्य के साथ इस नीति के संबंध में कोई कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरस्ट नहीं है। मैंने राज्य सरकार को अपनी पिता की भूमि के बारे में बहुत पहले ही सूचित कर दिया था। मेरे पिता की यह भूमि पुरानी है और LIGH नीति जारी होने से काफी पहले से उनके पास है। इस नीति के निर्माण या लागू करने में मैंने कभी भी किसी व्यक्तिगत लाभ को ध्यान में नहीं रखा। यह आरोप पूरी तरह से निराधार है। चीफ सेक्रेटरी ने नहीं दिया जवाब
चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया तो उन्होंन फोन रिसीव नहीं किया। हालांकि वह एक मीडिया ग्रुप से बातचीत में यह मान चुके हैं कि उनके बेटे की जमीन शिवालिक रेंज में है। उनके बेटे ने करीब सात साल पहले यह जमीन खरीदी थी। अभी तक हमें इसके कब्जे की प्राप्ति नहीं हुई है। LIGH नीति के समय इस भूमि का कोई संबंध नहीं था और न ही इस नीति के निर्माण में मेरे या मेरे परिवार का कोई व्यक्तिगत स्वार्थ शामिल है। कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का आरोप पूरी तरह गलत और निराधार है। डॉ नवजोत कौर भी उठा चुकी है शिवालिक रेंज का मामला
पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू शिवालिक रेंज के मुद्दे पर पंजाब सरकार को घेर चुकी है। नवजोत कौर सिद्धू ने पंजाब सरकार पर शिवालिक रेंज में अवैध कब्ज करवाने का आरोप लगाया था। नवजोत कौर ने इस संबंध में राज्यपाल को भी शिकायत दी थी। डा. कौर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए शिवालिक रेंज में जमीन खरीदने वाले नेताओं के नाम भी सार्वजनिक किए थे। उन्होंने कहा था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुखबीर बादल के शिवालिक रेंज में अवैध कब्जों का रजिस्ट्रेशन नहीं होने नहीं दिया जाएगा। उन्हें यह जमीन पंजाब को वापस करनी होगी।


