बालोतरा जिले की ग्राम पंचायत आकड़ली बख्शीराम के ग्रामीणों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने गौचर भूमि को नगर विकास न्यास (यूआईटी) के नाम दर्ज किए जाने का विरोध करते हुए इसे सुरक्षित रखने और इस प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लगभग 1600 बीघा भूमि उनके पूर्वजों द्वारा गौचर के लिए समर्पित की गई थी। इसके अतिरिक्त, कुछ ग्रामीणों ने अपनी निजी कृषि भूमि भी पशुओं और गौवंश के संरक्षण हेतु गौचर में दान की थी। यह भूमि वर्षों से गांव के पशुओं के चरागाह के रूप में उपयोग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अब सरकार द्वारा इसे यूआईटी के नाम दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है, जिससे उनमें भारी रोष है। पशुपालकों और ग्रामीणों को समस्याओं का सामना ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया- गौचर भूमि गांव की एक अमूल्य धरोहर है, जिसके संरक्षण से हजारों पशुओं को चारे की सुविधा मिलती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस भूमि का स्वरूप बदला गया, तो पशुपालकों और ग्रामीणों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। 2900 बीघा गौचर भूमि को यथावत रखा जाए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आकड़ली बख्शीराम क्षेत्र की करीब 2900 बीघा गौचर भूमि को यथावत रखा जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि इसे किसी अन्य विभाग या यूआईटी के नाम दर्ज न किया जाए। साथ ही, ग्रामीणों ने गौचर भूमि को अतिक्रमण और अन्य अनुपयोगी इस्तेमाल से मुक्त कर संरक्षित करने की भी मांग उठाई। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।


