ईद-उल-अज़हा (बकरा ईद) को लेकर शहर में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। त्योहार को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। मस्जिदों और ईदगाहों के आसपास अतिरिक्त सफाई कर्मियों को तैनात किया जा रहा है, ताकि त्योहार के दौरान स्वच्छता बनी रहे। मस्जिद प्रबंधनों ने भी नमाज के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मोती मस्जिद में 8 बजे अदा होगी नमाज मोती मस्जिद के इमाम मुफ़्ती नफीस मरकज़ी ने बताया कि फूल बाग स्थित शाही मोती मस्जिद में ईद की नमाज सुबह 8:00 बजे अदा की जाएगी। ईद के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। गर्मी को ध्यान में रखते हुए मस्जिद के अंदर नमाजियों के लिए कूलर और एसी की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि मस्जिद के बाहरी क्षेत्र में नमाजियों के लिए टेंट और बिछावन की व्यवस्था की जा रही है। गर्मी के मद्देनजर साफ-सफाई और ठंडे पानी का भी इंतजाम किया गया है, ताकि किसी को असुविधा न हो। त्याग, भाईचारा का त्योहार ईद-उल-अज़हा, जिसे बकरीद भी कहते हैं, कुर्बानी का त्योहार है। मुसलमान इसे हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की अल्लाह के हुक्म पर दिखाई गई बेमिसाल कुर्बानी की याद में मनाते हैं। मान्यता है कि जब अल्लाह ने इब्राहीम अलैहिस्सलाम की परीक्षा ली, तो वे अपने बेटे इस्माईल को कुर्बान करने के लिए तैयार हो गए। अल्लाह को उनकी यह नीयत इतनी पसंद आई कि उन्होंने बेटे की जगह जन्नत से एक दुम्बा भेज दिया। इसी जज्बे को जीवित रखने के लिए मुसलमान बकरीद पर कुर्बानी करते हैं। इसका उद्देश्य केवल जानवर की कुर्बानी देना नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराई, लालच और घमंड को अल्लाह की राह में कुर्बान करना है। कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है, एक हिस्सा गरीबों के लिए, दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए, और तीसरा अपने परिवार के लिए। यह त्योहार त्याग, भाईचारा और गरीबों का ख्याल रखने का संदेश देता है।


