बेगूसराय में संभावित बाढ़ की तैयारी, 80 राहत शिविर:228 जगहों पर सामुदायिक रसोई केंद्र बनाने की योजना; एक लाख से अधिक परिवार का आधार सत्यापन पूरा

बेगूसराय में संभावित बाढ़ की तैयारी, 80 राहत शिविर:228 जगहों पर सामुदायिक रसोई केंद्र बनाने की योजना; एक लाख से अधिक परिवार का आधार सत्यापन पूरा

बेगूसराय जिला प्रशासन ने संभावित बाढ़ को लेकर तैयारियां तेज कर दी है। डीएम श्रीकांत शास्त्री की अध्यक्षता में संभावित बाढ़ एवं आपदा की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयारियों की समीक्षा की गई है। बैठक में अलग-अलग विभागों की ओर से की गई तैयारी, संसाधनों की उपलब्धता, राहत एवं बचाव कार्यों की रणनीति और संवेदनशील क्षेत्रों में की जा रही व्यवस्थाओं का मूल्यांकन किया गया। नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जिले के सभी नगर निकायों में आमजन को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 162 स्थायी एवं अस्थायी प्याऊ संचालित किए जाने की जानकारी दी गई। इसमें बेगूसराय नगर निगम, बरौनी, बीहट, तेघड़ा, बलिया और बखरी नगर परिषद क्षेत्र शामिल है। डीएम ने सभी प्याऊ केंद्रों के नियमित संचालन एवं स्वच्छता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। 2421 चापाकल की मरम्मती का कार्य पूरा स्वास्थ्य विभाग की ओर से संभावित आपदा के दौरान त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए व्यापक तैयारी की गई है। सदर अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक 94 बेड की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त 22 चलंत चिकित्सा दल और 55 एंबुलेंस को विभिन्न क्षेत्रों में तैनात रखने की योजना बनाई गई है। जिससे आपातकालीन स्थिति में प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सके। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में 3542 खराब चापाकलों में से अब तक 2421 की मरम्मती का कार्य पूरा कर लिया गया है। बेगूसराय एवं तेघड़ा प्रमंडल के भू-जल स्तर की स्थिति का विश्लेषण किया गया। शेष चापाकलों की मरम्मती शीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। रसोई केंद्रों के स्थापना की योजना जल संसाधन विभाग द्वारा संभावित कटाव एवं बाढ़ से सुरक्षा के लिए आवश्यक सामग्रियों के भंडारण की जानकारी दी गई। प्रमंडलीय एवं केंद्रीय स्टोर्स में 5.29 लाख ईसी बैग, पर्याप्त संख्या में जियो बैग, वायर क्रेट्स और पॉर्क्यूपाइन सेट सुरक्षित रखे गए हैं। इन सामानों का उपयोग संवेदनशील तटबंधों एवं कटाव प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकता अनुसार किया जाएगा। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा अंचलवार संवेदनशील आबादी का अद्यतन डाटाबेस तैयार किया गया है। जिले के विभिन्न राजस्व गांवों में 7910 दिव्यांगजन, 2108 गर्भवती महिलाएं तथा 1531 धात्री माताओं की पहचान की गई है। इनके अतिरिक्त आपदा के समय बचाव कार्यों के लिए 92 प्रशिक्षित गोताखोरों को चिन्हित किया गया है। राहत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 80 राहत शिविर तथा 228 सामुदायिक रसोई केंद्रों के स्थापना की योजना तैयार की गई है। कृषि योजना तैयार की गई श्रम संसाधन विभाग द्वारा आपदा अवधि में कार्यरत श्रमिकों के लिए कार्य अवधि एवं सुरक्षा मानकों से संबंधित दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। वहीं, समाज कल्याण विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही विशेष सेवाओं एवं पोषण सुविधाओं की समीक्षा की गई। कृषि विभाग द्वारा बाढ़ अथवा सुखाड़ जैसी परिस्थितियों के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से आकस्मिक कृषि योजना तैयार की गई है। इसके तहत 23621 हेक्टेयर संभावित प्रभावित कृषि क्षेत्र के लिए करीब 7400 क्विंटल वैकल्पिक बीजों की उपलब्धता एवं वितरण की कार्ययोजना तैयार की गई है। जिससे किसानों को फसल क्षति की स्थिति में शीघ्र वैकल्पिक खेती का अवसर मिल सके। प्रभावित परिवारों की सूची तैयार आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सम्पूर्ति पोर्टल पर प्रभावित परिवारों के सत्यापन की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि 101058 संभावित प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की गई है। जिनमें से 100084 परिवारों का आधार आधारित सत्यापन पूरा कर लिया गया है। शेष परिवारों का सत्यापन अभियान मोड में जारी है। हवाई मार्ग से राहत सामग्री वितरण की संभावित आवश्यकता को देखते हुए जिले में 16 विशिष्ट हेलीपैड स्थलों का चयन किया गया है। इन स्थलों को आपातकालीन स्थिति में राहत पैकेट ड्रॉपिंग एवं अन्य आवश्यक हवाई गतिविधियों के लिए उपयोग में लाया जाएगा। इसके साथ ही तेघड़ा क्षेत्र के लिए चयनित खाद्यान्न आपूर्ति एजेंसी की भी घोषणा की गई। जिससे राहत सामग्री की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। बैठक में डीएम ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि संभावित आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, समन्वित कार्रवाई तथा राहत एवं बचाव कार्यो की जाए। आमजन की सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा सभी विभाग को निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप पूरी तत्परता एवं जवाबदेही के साथ काम करना होगा। बेगूसराय जिला प्रशासन ने संभावित बाढ़ को लेकर तैयारियां तेज कर दी है। डीएम श्रीकांत शास्त्री की अध्यक्षता में संभावित बाढ़ एवं आपदा की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयारियों की समीक्षा की गई है। बैठक में अलग-अलग विभागों की ओर से की गई तैयारी, संसाधनों की उपलब्धता, राहत एवं बचाव कार्यों की रणनीति और संवेदनशील क्षेत्रों में की जा रही व्यवस्थाओं का मूल्यांकन किया गया। नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जिले के सभी नगर निकायों में आमजन को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 162 स्थायी एवं अस्थायी प्याऊ संचालित किए जाने की जानकारी दी गई। इसमें बेगूसराय नगर निगम, बरौनी, बीहट, तेघड़ा, बलिया और बखरी नगर परिषद क्षेत्र शामिल है। डीएम ने सभी प्याऊ केंद्रों के नियमित संचालन एवं स्वच्छता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। 2421 चापाकल की मरम्मती का कार्य पूरा स्वास्थ्य विभाग की ओर से संभावित आपदा के दौरान त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए व्यापक तैयारी की गई है। सदर अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक 94 बेड की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त 22 चलंत चिकित्सा दल और 55 एंबुलेंस को विभिन्न क्षेत्रों में तैनात रखने की योजना बनाई गई है। जिससे आपातकालीन स्थिति में प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सके। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में 3542 खराब चापाकलों में से अब तक 2421 की मरम्मती का कार्य पूरा कर लिया गया है। बेगूसराय एवं तेघड़ा प्रमंडल के भू-जल स्तर की स्थिति का विश्लेषण किया गया। शेष चापाकलों की मरम्मती शीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। रसोई केंद्रों के स्थापना की योजना जल संसाधन विभाग द्वारा संभावित कटाव एवं बाढ़ से सुरक्षा के लिए आवश्यक सामग्रियों के भंडारण की जानकारी दी गई। प्रमंडलीय एवं केंद्रीय स्टोर्स में 5.29 लाख ईसी बैग, पर्याप्त संख्या में जियो बैग, वायर क्रेट्स और पॉर्क्यूपाइन सेट सुरक्षित रखे गए हैं। इन सामानों का उपयोग संवेदनशील तटबंधों एवं कटाव प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकता अनुसार किया जाएगा। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा अंचलवार संवेदनशील आबादी का अद्यतन डाटाबेस तैयार किया गया है। जिले के विभिन्न राजस्व गांवों में 7910 दिव्यांगजन, 2108 गर्भवती महिलाएं तथा 1531 धात्री माताओं की पहचान की गई है। इनके अतिरिक्त आपदा के समय बचाव कार्यों के लिए 92 प्रशिक्षित गोताखोरों को चिन्हित किया गया है। राहत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 80 राहत शिविर तथा 228 सामुदायिक रसोई केंद्रों के स्थापना की योजना तैयार की गई है। कृषि योजना तैयार की गई श्रम संसाधन विभाग द्वारा आपदा अवधि में कार्यरत श्रमिकों के लिए कार्य अवधि एवं सुरक्षा मानकों से संबंधित दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। वहीं, समाज कल्याण विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही विशेष सेवाओं एवं पोषण सुविधाओं की समीक्षा की गई। कृषि विभाग द्वारा बाढ़ अथवा सुखाड़ जैसी परिस्थितियों के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से आकस्मिक कृषि योजना तैयार की गई है। इसके तहत 23621 हेक्टेयर संभावित प्रभावित कृषि क्षेत्र के लिए करीब 7400 क्विंटल वैकल्पिक बीजों की उपलब्धता एवं वितरण की कार्ययोजना तैयार की गई है। जिससे किसानों को फसल क्षति की स्थिति में शीघ्र वैकल्पिक खेती का अवसर मिल सके। प्रभावित परिवारों की सूची तैयार आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सम्पूर्ति पोर्टल पर प्रभावित परिवारों के सत्यापन की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि 101058 संभावित प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की गई है। जिनमें से 100084 परिवारों का आधार आधारित सत्यापन पूरा कर लिया गया है। शेष परिवारों का सत्यापन अभियान मोड में जारी है। हवाई मार्ग से राहत सामग्री वितरण की संभावित आवश्यकता को देखते हुए जिले में 16 विशिष्ट हेलीपैड स्थलों का चयन किया गया है। इन स्थलों को आपातकालीन स्थिति में राहत पैकेट ड्रॉपिंग एवं अन्य आवश्यक हवाई गतिविधियों के लिए उपयोग में लाया जाएगा। इसके साथ ही तेघड़ा क्षेत्र के लिए चयनित खाद्यान्न आपूर्ति एजेंसी की भी घोषणा की गई। जिससे राहत सामग्री की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। बैठक में डीएम ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि संभावित आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, समन्वित कार्रवाई तथा राहत एवं बचाव कार्यो की जाए। आमजन की सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा सभी विभाग को निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप पूरी तत्परता एवं जवाबदेही के साथ काम करना होगा।  

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