साउथ-ईस्ट एशिया के साइबर क्रिमिनल्स का प्रयागराज कनेक्शन:म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल हुए शहर में खुलवाए गए खाते, FIR

साउथ-ईस्ट एशिया के साइबर क्रिमिनल्स का प्रयागराज कनेक्शन:म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल हुए शहर में खुलवाए गए खाते, FIR

प्रयागराज में साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से संचालित साइबर फ्रॉड गैंग के लिए प्रयागराज से बैंक खातों का इस्तेमाल “म्यूल अकाउंट” के रूप में किया जा रहा था। इस मामले में साइबर क्राइम थाना में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
एफआईआर प्रशांत सिंह के खिलाफ दर्ज की गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उसके नाम और उसकी फर्म “APTIVEDA ENTERPRISES” से जुड़े कई बैंक खातों में देशभर की साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर होने के साक्ष्य मिले हैं। एडीजी साइबर क्राइम के निर्देश पर शुरू हुई जांच
मामले की जांच अपर पुलिस महानिदेशक साइबर क्राइम उत्तर प्रदेश और डीसीपी गंगानगर/नोडल साइबर क्राइम के निर्देश पर शुरू की गई थी। पुलिस को थाईलैंड, वियतनाम, लाओस और कंबोडिया जैसे देशों से संचालित साइबर फ्रॉड नेटवर्क में इस्तेमाल हो रहे भारतीय बैंक खातों की पहचान करने का निर्देश मिला था।
इसी क्रम में सिविल लाइंस क्षेत्र से जुड़े बैंक खातों का सत्यापन किया जा रहा था। जांच के दौरान केनरा बैंक सिविल लाइंस शाखा का एक खाता पुलिस के रडार पर आया।
एनसीआरपी पोर्टल पर मिलीं 101 शिकायतें
पुलिस ने जब खाते को गृह मंत्रालय के एनसीआरपी पोर्टल पर चेक किया तो उसके खिलाफ देशभर से साइबर अपराध की 101 शिकायतें दर्ज मिलीं। शिकायतें राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब, असम, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से जुड़ी मिलीं। इन शिकायतों में दर्ज कुल संदिग्ध रकम करीब 7 लाख 49 हजार 764 रुपये पाई गई।
फर्म के अन्य खातों में भी करोड़ों की रकम
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि उक्त बैंक खाता “अप्तीवेदा इंटरप्राइजेज” नामक फर्म से जुड़ा है। इसके बाद फर्म से जुड़े अन्य बैंक खातों की जांच की गई, जिसमें और भी बड़े साइबर ट्रांजेक्शन सामने आए।
इंडियन बैंक खाते में 3.40 लाख रुपये आने की शिकायत मिली। इसी तरह फर्म के इंडियन बैंक खाते के खिलाफ ओडिशा से साइबर फ्रॉड की एक शिकायत दर्ज मिली। इस खाते से जुड़ी संदिग्ध रकम 3 लाख 40 हजार रुपये बताई गई। यूको बैंक खाते में साइबर फ्रॉड से 92.45 लाख रुपये ट्रांसफर कराने की शिकायतें मिलीं।
करोड़ों की साइबर ठगी का ट्रांजेक्शन रूट
साइबर पुलिस का कहना है कि जांच में मिले बैंक खातों का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों में हुई ऑनलाइन ठगी की रकम को ट्रांसफर करने और निकालने के लिए किया जा रहा था। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि खातों का उपयोग साइबर अपराधियों के लिए “लेयरिंग” और ट्रांजेक्शन ट्रेल छिपाने में किया गया।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
साइबर अपराध में “म्यूल अकाउंट” ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। कई बार खाताधारक कमीशन के लालच में अपने खाते उपलब्ध कराते हैं, जबकि कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों से खाते खुलवाए जाते हैं। साइबर अपराधी इन खातों के जरिए रकम को तेजी से अलग-अलग खातों में भेजकर जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश करते हैं।
साइबर थाना में दर्ज हुई एफआईआर
पूरे मामले में नोडल साइबर सेल की ओर से साइबर क्राइम थाना कमिश्नरेट प्रयागराज में तहरीर दी गई थी। इसके बाद मुकदमा दर्ज कर लिया गया। साइबर थाना पुलिस अब बैंक खातों की विस्तृत ट्रांजेक्शन हिस्ट्री, मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस, केवाईसी दस्तावेज और खातों से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। साइबर टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि नेटवर्क का संबंध किन विदेशी साइबर गिरोहों से है और इसमें स्थानीय स्तर पर कौन-कौन लोग शामिल हैं।

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