घरों में इंसानों के साथ रहते हैं जहरीले नाग: भारत का अनोखा ‘सांपों वाला गांव’, जहां हर रोज मनाई जाती है नागपंचमी!

घरों में इंसानों के साथ रहते हैं जहरीले नाग: भारत का अनोखा ‘सांपों वाला गांव’, जहां हर रोज मनाई जाती है नागपंचमी!

Shetphal Snake Village Maharashtra: सांप का नाम सुनते ही डर महसूस होने लगता है, अगर कोई देख लेता है धड़कने बढ़ जाती है। इतना ही नहीं गांवों में सापों के काटने से कितने लोगों की मौत भी हो जाती है। इसी वजह से अक्सर घरों से सांप निकलते हैं तो लोग उन्हें मार देते हैं। वहीं, इसी देश में एक ऐसी जगह है, जहां सांप न लोगों का काटते हैं और न ही लोग सापों को मारते हैं, बल्कि वे उन्हें अपने घरों में अपने साथ रखते हैं। आपको यह सुनकर थोड़ी हैरानी जरूर हो हुई होगी लेकिन ये सत्य है। आपको बता दें कि महाराष्ट्र के सोलापुर के गांव में बच्चे-बच्चे सांपों के साथ खेतले हैं। इतना ही नहीं देश में पूरे साल में एक बार नागपंचमी मनाई जाती है, लेकिन इस गांव में नागपंचमी रोज की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।

आपको बता दें कि यहां लोग सांपों को भी अपने परिवार का एक हिस्सा मानते हैं। यही वजह है कि जब यहां के लोग घर बनाते हैं तो वे लोग सांपों को रहने और उनके आराम करने के लिए भी एक हिस्सा बनाते हैं। यहां रहने वाला हर ग्रामीण सांपों को डर या नफरत की निगाह से देखने के बजाय उन्हें बेहद सम्मान और सम्मान की नजर से देखता है। दशकों पुरानी इस अनूठी परंपरा के कारण यहां के बच्चे भी सांपों के साथ बिना किसी खौफ के बड़े होते हैं और उनके व्यवहार व हरकतों को बखूबी समझते हैं। इस गांव में इंसान और सांपों के बीच का प्यार ही दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रही है।

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नागपंचमी साल में एक बार नहीं, यहां हर रोज मनाई जाती है

इस देश में सांपों को शिव जी के गले का हार माना जाता है और साल में एक बार नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सांपों को दूध पिलाकर उनकी पूजा की जाती है, लेकिन सोलापुर में साल में एक बार नहीं हर रोज ही सांपों की पूजा की जाती है। इस गांव की यह अनोखी पहचान सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं और नाग-पूजा की परंपरा से गहराई से जुड़ी हुई है। वहां के बुजुर्गों का अटूट विश्वास है कि इस आपसी प्रेम और आपसी सम्मान के कारण आज तक इन जहरीले सांपों ने गांव के किसी भी सदस्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है।

पर्यटकों के लिए तय किए गए हैं कड़े नियम

इंसानोंं और सांपों के बीच के अटूट संबंध को देखन के लिए देश से ही नहीं बल्कि विदेश से भी लोग इस गांव में आते हैं। इस गांव की परंपरा को देख कर पर्यटक मोहित हो जाते हैं। इसके साथ ही शोधकर्ता भी इस गांव शोध करने के उद्देश्य से आते हैं। वहीं, गांव वालों के अलावा बाहर से आने वाले लोगों के लिए कुछ सख्त नियम तय किए गए हैं, जिनका वे सभी लोग पालन करते हैं। दरअसल, पर्यटकों को सख्त हिदायत दी जाती है कि वे किसी भी परिस्थिति में सांपों को नुकसान न पहुंचाएं, उन्हें न भड़काएं और न ही उनके प्रति हिंसक व्यवहार करें। इस अनोखे गांव में बाहर से आने वाले सभी पर्यटकों को स्थनीय लोगों का कहना मानना पड़ता है, इसके साथ ही बिना उनके इजाजत के उस गांव में किसी के घर में जाने की इजाजत नहीं होती है।

शेतफल गांव जाने का सबसे सही समय

अगर आप भी इस विचित्र गांव में जाकर रोंगटे खड़े कर देने वाले नजारे को देखना चाहते हैं तो शेतफल गांव जाने का सबसे सही समय अक्टूबर से फरवरी के बीच का माना जाता है। इस दौरान यहां का मौसम काफी सुहावना और ठंडा रहता है। इसके विपरीत, गर्मियों के महीनों में इस क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी पड़ती है, जिससे दिन के समय यात्रा करना काफी थकाऊ और कठिन हो सकता है।

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