Bharat Bhushan actor biography tragedy: बॉलीवुड की चकाचौंध दूर से देखने वाले हर शख्स को आकर्षित करती है। लोगों को लगता है कि सिनेमा की दुनिया में अगर एक बार कामयाबी मिल गई, तो इंसान ताउम्र धन-दौलत में डूबा रहेगा। लेकिन मायानगरी का एक कड़वा सच यह भी है कि यहां वक्त बदलते देर नहीं लगती और कामयाबी के शिखर पर बैठा सितारा भी रातोंरात सब कुछ खो सकता है। ऐसा ही कुछ हुआ था 1950 के दशक के सबसे बड़े सुपरस्टार भरत भूषण के साथ। आइये जानते हैं…
भरत भूषण को बेचने पड़े थे तीन बंगले (Rajesh khanna bungalow Aashirwad history)
राज कपूर, दिलीप कुमार, मीना कुमारी और मधुबाला के साथ ही फेमस हुए भरत भूषण की लोकप्रियता का आलम यह था कि संजय लीला भंसाली आज भी उनकी फिल्म ‘बैजू बावरा’ का रीमेक बनाने की योजना बुनते हैं, जिसमें वह रणवीर सिंह को लेना चाहते थे। वहीं, उनकी फिल्म ‘बरसात की रात’ का गाना “ना तो कारवां की तलाश है” छह दशक बाद भी रीमेक किया जाता है।

लेकिन उस दौर में आज की तरह कड़े कॉपोरेट नियम, ओटीटी या सैटेलाइट राइट्स जैसी चीजें नहीं होती थीं। निर्माता खुद बैंकों से कर्ज लेकर फिल्में बनाते थे। भरत भूषण ने भी फिल्म निर्माण में हाथ आजमाया, लेकिन उनकी फिल्में (जैसे ‘दूज का चांद’) बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गईं। कर्ज चुकाने के लिए उन्हें बांद्रा और पाली हिल स्थित अपने तीन आलीशान बंगले बेचने पड़े। इनमें से एक बंगला ‘आशीर्वाद’ था, जिसे बाद में राजेंद्र कुमार और फिर सुपरस्टार राजेश खन्ना ने खरीदा।
जब अमिताभ बच्चन ने बस स्टॉप पर देखा (Amitabh Bachchan blog on Bharat Bhushan)
बंगले बिकने के बाद भरत भूषण मुंबई के मलाड इलाके में एक फ्लैट में आ गए। इसी दौर की एक झकझोर देने वाली घटना सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने साल 2008 में अपने ब्लॉग पर साझा की थी। बिग बी ने लिखा था, “एक सुबह जब मैं काम के लिए सांता क्रूज से गुजर रहा था, तो मैंने 50 के दशक के महान रोमांटिक हीरो भरत भूषण को एक बस स्टॉप पर आम नागरिक की तरह कतार में खड़े देखा। भीड़ का हिस्सा, अकेले, बिना किसी तामझाम के। कोई उन्हें पहचान नहीं रहा था। मैं गाड़ी रोककर उन्हें छोड़ना चाहता था, लेकिन हिम्मत नहीं हुई कि कहीं वह शर्मिंदा न हो जाएं। वह सीन आज भी मेरे मन में बसा है कि वक्त किसी के साथ भी खेल कर सकता है।”

भरत भूषण की बेटी ने किया था खुलासा (Aparajita Bhushan Mandodari daughter)
भरत भूषण के अंतिम दिनों को लेकर अक्सर यह अफवाह उड़ती रही कि तंगहाली के कारण उन्हें आखिरी समय में सिक्योरिटी गार्ड या चौकीदार की नौकरी करनी पड़ी थी, लेकिन, साल 2020 में उनकी बेटी अपराजिता भूषण जो रामानंद सागर की ‘रामायण’ में रावण की पत्नी मंदोदरी बनी थी उन्होंने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।
अपराजिता ने भावुक होते हुए कहा, “यह सच है कि फिल्मों के फ्लॉप होने से पापा को बड़ा नुकसान हुआ और हमें बंगले बेचने पड़े। लेकिन उन्होंने मलाड में एक अच्छा अपार्टमेंट खरीदा था और वह वहां एक बेहद आरामदायक जिंदगी जी रहे थे। गुजारे के लिए उन्होंने कभी गरिमा से समझौता नहीं किया और जो भी छोटी-मोटी चरित्र भूमिकाएं मिलीं, उन्हें पूरी ईमानदारी से किया। वह कोई चौकीदार नहीं थे, लोग ऐसी गलत अफवाहें फैलाकर उनके गौरव का अपमान न करें।” साल 1992 में 72 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से भरत भूषण का निधन हो गया था, कहा जाता है कि उनके अंतिम संस्कार में महज 8 लोग ही शामिल हुए थे, लेकिन उनकी कहानी आज भी बॉलीवुड के उतार-चढ़ाव की सबसे बड़ी सीख है।


