MP News: मध्यप्रदेश के सतना जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, यहां किसान ने जीते-जी अपना पिंडदान और तेरहवीं कराई। किसान ने पूरे गांव को तेरहवीं का कार्ड देकर आमंत्रित किया और फिर अपने ही हाथों से अपनी ही तेरहवीं का खाना लोगों को परोसा। जिस किसान ने ये सब किया वो कोई साधारण किसान नहीं बल्कि दुर्लभ जड़ी-बूटियों और पौधों के संरक्षण के लिए पूरे देश में पहचाना जाता है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उसकी तारीफ की थी।
जीते-जी तेरहवीं कराने की वजह
सतना जिले के उचेहरा क्षेत्र के अंतरवेदिया गांव में रहने वाले किसान रामलोटन कुशवाह ने जीते-जी अपनी तेरहवीं करवाई है। दरअसल किसान रामलोटन ने कुछ समय पहले शासकीय मेडिकल कॉलेज सतना में अपनी देहदान करने का फैसला लिया था। जब ये बात उन्होंने गांव वालों को बताई तो गांववालों ने उनका मजाक बनाया और ताने मारने शुरु कर दिए। गांव वाले उनसे कहते कि तुमने अपनी मौत के बाद होने वाली तेरहवीं और वर्षी का खर्चा बचाने के लिए देहदान करने का फैसला लिया है। गांव वालों के तानों से दुखी होकर और गांव वालों की सोच को बदलने के उद्देश्य से उन्होंने जीते-जी अपना पिंडदान और तेरहवीं कराने का फैसला लिया।
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13 मई को हुई तेरहवीं
रामलोटन कुशवाह पहले प्रयागराज गए और खुद ही विधि-विधान से अपना पिंडदान किया। इसके बाद उन्होंने तेरहवीं के कार्ड छपवाए और नाते-रिश्तेदारों के साथ ही ग्रामीणों को कार्ड देकर अपनी तेरहवीं में आमंत्रित किया। 13 मई को घर पर रामलोटन कुशवाह ने अपनी तेरहवीं का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान रामलोटन ने खुद तेरहवीं में आए लोगों का स्वागत किया और भोजन कराया। तेरहवीं में पद्मश्री बाबूलाल दाहिया भी शामिल हुए, रामलोटन कुशवाह की इस सोच की अब हर कोई तारीफ कर रहा है।
पीएम मोदी कर चुके हैं किसान रामलोटन की तारीफ
बता दें कि किसान रामलोटन कुशवाह कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं वो दुर्लभ जड़ी-बूटियों और पौधों का संरक्षण करते हैं और इसके लिए उन्होंने अपने छोटे से परिसर में एक ‘देशी म्यूजियम’ बना रखा है। रामलोटन की दुर्लभ जड़ी-बूटियों के संरक्षण की नेक पहल की पीएम नरेन्द्र मोदी भी तारीफ कर चुके हैं और पीएम नरेन्द्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में रामलोटन कुशवाह की तारीफ की थी। इतना ही नहीं रामलोटन को साल 2024 में जैव विविधता प्रोत्साहन के लिए राज्यस्तरीय प्रथम श्रेणी का पुरस्कार भी मिल चुका है।


