Pleomorphic Rhabdomyosarcoma Cause: नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, प्लेओमोर्फिक रैबडोमायोसारकोमा (PRMS) एक प्रकार का सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा (Soft Tissue Sarcoma) यानी नरम ऊतकों का कैंसर है। यह कैंसर मुख्य रूप से शरीर की कंकाल मांसपेशियों (Skeletal Muscles) को प्रभावित करने वाली कोशिकाओं से शुरू होता है।
वैसे तो रैबडोमायोसारकोमा के अधिकांश मामले बच्चों में देखे जाते हैं, लेकिन इसका प्लेओमोर्फिक रूप बच्चों में न होकर विशेष रूप से वयस्कों और बुजुर्गों (आमतौर पर 50 से 70 वर्ष की आयु के बीच) में पाया जाता है। यह एक हाई-ग्रेड कैंसर है, जिसका मतलब है कि इसकी कोशिकाएं बहुत अजीब दिखती हैं और शरीर में बहुत तेजी से फैलती हैं। आइए जानते हैं कि इसके कारण और लक्षण क्या होते हैं?
इसके शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, अमेरिका में हर साल 400 से 500 लोगों में रैबडोमायोसारकोमा का निदान होता है। इसके शुरूआती लक्षण निम्न होते हैं;
- मांसपेशियों में गांठ या सूजन होना।
- गांठ का तेजी से बढ़ना।
- नसों या अंगों में तेज दर्द होना।
- पेट में दर्द, कब्ज या उल्टी।
- अंडकोष के आसपास गांठ बनना।
यह कितना खतरनाक होता है?
नेचर में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, रैबडोमायोसारकोमा (RMS) बच्चों में होने वाला तीसरा सबसे आम मस्तिष्क ट्यूमर है, जो बचपन में होने वाले सभी घातक ट्यूमरों का लगभग 3% होता है। यह कैंसर चिकित्सा विज्ञान में इसे बहुत खराब रोगनिदान (Poor Prognosis) वाली श्रेणी में रखा गया है क्योंकि;
- यह शरीर के अन्य अंगों में बहुत तेजी से फैलता है।
- फेफड़े (Lungs) इसके प्रसार का सबसे आम स्थान हैं।
- बच्चों के मुकाबले वयस्कों में इस कैंसर के ठीक होने की संभावना काफी कम होती है।
- यह कैंसर पारंपरिक कीमोथेरेपी दवाओं के प्रति अक्सर कम प्रतिक्रिया देता है (Chemoresistant)।
इसके कारण क्या हैं?
वर्तमान में प्लेओमोर्फिक रैबडोमायोसारकोमा होने का कोई सटीक या स्पष्ट कारण ज्ञात नहीं है। हालांकि, शोध से पता चलता है कि यह कोशिकाओं के भीतर होने वाले कुछ आनुवंशिक म्यूटेशन (Genetic Mutations) और गड़बड़ियों के कारण होता है;
- कोशिकाओं के भीतर p53 जीन का म्यूटेशन होना।
- सेल सिग्नलिंग पाथवे (जैसे MAPK या PI3K/AKT) में गड़बड़ी आना।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


