कटिहार के मनसाही प्रखंड की कुरेठा पंचायत में पंचवर्गा गांव और गोबरा घाट के बीच बहने वाली कमला नदी पर आजादी के दशकों बाद भी स्थायी पुल नहीं बन सका है। क्षेत्र के ग्रामीण आज भी बांस से बने अस्थायी पुल के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। यह मार्ग मनसाही क्षेत्र को आसपास के गांवों से जोड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, बांस से बना यह संकरा पुल इतना खतरनाक है कि इस पर एक समय में केवल एक दिशा से ही लोग आ-जा सकते हैं। दूसरी ओर से आने वाले लोगों को तब तक इंतजार करना पड़ता है, जब तक पहले वाले पार न हो जाएं। इससे हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है, फिर भी लोग जान जोखिम में डालकर इसका उपयोग करते हैं। कमला नदी के दोनों किनारों पर बड़ी आबादी रहती है
स्थानीय लोगों मो. शहाबुद्दीन, वार्ड सदस्य मो. आलमगीर और छात्र निशार आलम ने बताया कि कमला नदी के दोनों किनारों पर बड़ी आबादी रहती है। बाजार, स्कूल, अस्पताल, मस्जिद और अन्य जरूरी कामों के लिए लोगों को इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन लगभग ठप हो जाता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। चुनाव खत्म होते ही वादे भुला दिए जाते हैं
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि पुल निर्माण का आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वादे भुला दिए जाते हैं। पुल न होने से एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। प्रसव पीड़ित महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने, मरीजों के इलाज और मृतकों को कब्रिस्तान तक ले जाने में भी कठिनाई होती है। कई बार लोगों को 15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इस संबंध में मनिहारी विधायक मनोहर प्रसाद ने स्थल का दौरा कर पुल निर्माण का आश्वासन दिया है। वहीं, कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने लोगों की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल निशुल्क नाव संचालन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि पुल निर्माण के प्रस्ताव को संबंधित विभाग को भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कटिहार के मनसाही प्रखंड की कुरेठा पंचायत में पंचवर्गा गांव और गोबरा घाट के बीच बहने वाली कमला नदी पर आजादी के दशकों बाद भी स्थायी पुल नहीं बन सका है। क्षेत्र के ग्रामीण आज भी बांस से बने अस्थायी पुल के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। यह मार्ग मनसाही क्षेत्र को आसपास के गांवों से जोड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, बांस से बना यह संकरा पुल इतना खतरनाक है कि इस पर एक समय में केवल एक दिशा से ही लोग आ-जा सकते हैं। दूसरी ओर से आने वाले लोगों को तब तक इंतजार करना पड़ता है, जब तक पहले वाले पार न हो जाएं। इससे हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है, फिर भी लोग जान जोखिम में डालकर इसका उपयोग करते हैं। कमला नदी के दोनों किनारों पर बड़ी आबादी रहती है
स्थानीय लोगों मो. शहाबुद्दीन, वार्ड सदस्य मो. आलमगीर और छात्र निशार आलम ने बताया कि कमला नदी के दोनों किनारों पर बड़ी आबादी रहती है। बाजार, स्कूल, अस्पताल, मस्जिद और अन्य जरूरी कामों के लिए लोगों को इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन लगभग ठप हो जाता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। चुनाव खत्म होते ही वादे भुला दिए जाते हैं
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि पुल निर्माण का आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वादे भुला दिए जाते हैं। पुल न होने से एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। प्रसव पीड़ित महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने, मरीजों के इलाज और मृतकों को कब्रिस्तान तक ले जाने में भी कठिनाई होती है। कई बार लोगों को 15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इस संबंध में मनिहारी विधायक मनोहर प्रसाद ने स्थल का दौरा कर पुल निर्माण का आश्वासन दिया है। वहीं, कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने लोगों की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल निशुल्क नाव संचालन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि पुल निर्माण के प्रस्ताव को संबंधित विभाग को भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।


