PBM अस्पताल में जल्द शुरू होंगे पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग:मिर्गी, और दिल के छेद से पीड़ित बच्चों को बीकानेर में ही मिलेगा सुपर स्पेशियलिटी इलाज

PBM अस्पताल में जल्द शुरू होंगे पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग:मिर्गी, और दिल के छेद से पीड़ित बच्चों को बीकानेर में ही मिलेगा सुपर स्पेशियलिटी इलाज

पश्चिम राजस्थान के बीकानेर संभाग के हजारों परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। अब नवजात से लेकर किशोर उम्र तक के बच्चों को गंभीर दिमागी, नसों और दिल से जुड़ी जटिल बीमारियों के इलाज के लिए जयपुर, दिल्ली या अन्य बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के अधीन पीबीएम शिशु चिकित्सालय में दो नए सुपर स्पेशियलिटी विभाग-बाल चिकित्सा न्यूरोलॉजी और बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजी प्रारम्भ करने की तैयारी है। राजस्थान सरकार की मंशा के अनुरूप दोनों विभागों के गठन का प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को भेज दिया गया है। पीबीएम शिशु चिकित्सालय में शुरू होने वाले दो नए सुपर स्पेशियलिटी विभागों से बच्चों की गंभीर बीमारियों का इलाज अब स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगा। बाल चिकित्सा न्यूरोलॉजी विभाग में डॉ. जी.एस. तंवर के नेतृत्व में मिर्गी, बार-बार दौरे पड़ना, दवाओं से नियंत्रित न होने वाली दिमागी समस्याएं, मस्तिष्क व तंत्रिका तंत्र के संक्रमण, न्यूरोमस्कुलर रोग, मांसपेशियों की कमजोरी तथा चलने, बोलने व सीखने में देरी (विकासात्मक विलंब) जैसी जटिल बीमारियों का विशेषज्ञ मूल्यांकन और नियमित उपचार मिलेगा। वहीं, बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजी विभाग में डॉ. मुकेश बेनीवाल की देखरेख में जन्मजात हृदय रोग, दिल में छेद, हृदय की संरचनात्मक विकृतियों और धड़कन की समस्याओं की समय पर पहचान और फॉलोअप की सुविधा उपलब्ध होगी। स्थानीय स्तर पर इन दोनों विभागों के शुरू होने से नवजात से लेकर किशोरावस्था तक के बच्चों को सही समय पर सटीक इलाज और परिजनों को स्पष्ट मार्गदर्शन मिल सकेगा सकारात्मक बदलाव: क्यों खास है यह पहल? संभाग के 4 जिलों के परिवारों को सीधा फायदा: बीकानेर के अलावा आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों के हजारों बच्चों को अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय परामर्श और इलाज मिलेगा। समय और पैसों की भारी बचत: जयपुर/दिल्ली जाने का सफर, रहने-खाने का खर्च, नौकरी/मजदूरी का नुकसान और यात्रा का मानसिक तनाव अब पूरी तरह खत्म होगा। शुरुआती दौर में ही सटीक पहचान: नवजात शिशुओं में जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, मिर्गी के दौरे, चलने-बोलने में देरी और जन्मजात दिल के छेद का समय पर डायग्नोसिस हो सकेगा। क्यों थी इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत? 1000 से 1200 बच्चे प्रति महीने न्यूरोलॉजी (दिमाग व नसों) से जुड़ी जांच व परामर्श के लिए आते हैं।
200 बच्चे प्रति महीने हृदय रोग मूल्यांकन (हार्ट चेकअप) के लिए पहुँचते हैं।
5 कार्यशालाएं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चिकित्सकों की दक्षता बढ़ाने के लिए आयोजित किए जा चुके हैं। मिर्गी, विकासात्मक विलंब और जन्मजात हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याओं के समयबद्ध इलाज से बच्चे का पूरा भविष्य संवर जाता है। हमारा मुख्य उद्देश्य है कि किसी भी परिवार को विशेषज्ञ सेवाओं के अभाव में दूसरे शहरों के चक्कर न काटने पड़ें। आवश्यक स्वीकृतियां मिलते ही सेवाएं शीघ्र प्रारम्भ होंगी। डॉ. जी.एस. तंवर, विभागाध्यक्ष (बाल रोग), पीबीएम शिशु चिकित्सालय बीकानेर में इन दोनों विशिष्ट विभागों का विकास पूरे संभाग के लिए मील का पत्थर साबित होगा। स्थानीय स्तर पर सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं मिलने से मरीजों को बड़ी राहत मिलने के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज में रिसर्च और ट्रेनिंग को भी नया बल मिलेगा। डॉ. एस.के. वर्मा, प्राचार्य एवं नियंत्रक, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *