Patrika Explainer: ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली किस्मत, सेना प्रमुख से फील्ड मार्शल बने आसिम मुनीर, अब अमेरिका-ईरान युद्ध में बड़े किरदार

Patrika Explainer: ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली किस्मत, सेना प्रमुख से फील्ड मार्शल बने आसिम मुनीर, अब अमेरिका-ईरान युद्ध में बड़े किरदार

Asim Munir Field Marshal Pakistan: असीम मुनीर फील्ड मार्शल पाकिस्तान आज वैश्विक कूटनीति के केंद्र में हैं। कभी भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान सैन्य नेतृत्व के लिए चर्चा में रहने वाले मुनीर अब अमेरिका और ईरान के बीच मीडिएटर (Donald Trump Pakistan Peace Mediator) की भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया है। पिछले कुछ सालों में हुए घटनाक्रम खासतौर पर भारत के साथ संघर्ष, घरेलू राजनीतिक उथल-पुथल और बदलते वैश्विक समीकरण ने उनकी स्थिति को बेहद मजबूत बना दिया है।

कौन हैं आसिम मुनीर? (Who is Asim Munir)

आसिम मुनीर का जन्म वर्ष 1968 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रावलपिंडी शहर में हुआ था। वे एक पंजाबी मुस्लिम परिवार से आते हैं, जिनके माता-पिता 1947 के भारत-विभाजन के बाद जालंधर से पाकिस्तान आकर बसे थे। मुनीर ने अपनी प्रारंभिक धार्मिक शिक्षा रावलपिंडी के मरकजी मदरसा दार-उल-तजवीद से प्राप्त की और बाद में सैन्य प्रशिक्षण हासिल कर पाकिस्तान सेना में शामिल हुए।

वे मंगला स्थित अधिकारी प्रशिक्षण विद्यालय (OTS) के 17वें बैच से पास आउट हुए और स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किए गए। अपने सैन्य करियर में उन्होंने सऊदी अरब सहित कई महत्वपूर्ण तैनातियों पर काम किया, जहां उन्होंने पूरा कुरान कंठस्थ कर हाफिज की उपाधि भी हासिल की। मुनीर पाकिस्तान के उन चुनिंदा सैन्य अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने मिलिट्री इंटेलिजेंस और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) दोनों का नेतृत्व किया।

नवंबर 2022 में उन्हें पाकिस्तान का सेना प्रमुख नियुक्त किया गया और 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद उन्हें फील्ड मार्शल का दर्जा मिला। इसके बाद संवैधानिक बदलावों के जरिए वे देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्स (Chief of Defence Forces Asim Munir, CDF Pakistan) भी बने, जिससे उनकी शक्ति और प्रभाव दोनों में बड़ा विस्तार हुआ।

भारत-पाक संघर्ष की शुरुआत कैसे हुई? (India Pakistan War 2025)

अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम (Pahalgam Attack 2025) के बैसरन घाटी में आतंकियों ने 26 पर्यटकों की हत्या कर दी। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया, जबकि इस्लामाबाद ने आरोपों से इनकार करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की। इस घटना ने दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया और हालात युद्ध तक जा पहुंचे।

ऑपरेशन सिंदूर और चार दिन का युद्ध (Operation Sindoor India Pakistan War)

7 मई 2025 को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी जवाबी हमले किए और दोनों देशों के बीच ड्रोन, मिसाइल और भारी गोलाबारी हुई।

करीब चार दिन तक चले इस संघर्ष के बाद 10 मई को युद्धविराम हुआ। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्धविराम का श्रेय खुद को दिया, हालांकि भारत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह द्विपक्षीय बातचीत का परिणाम था और किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी।

युद्ध के बाद बढ़ा कद, मिली फील्ड मार्शल की उपाधि (Asim Munir Field Marshal Pakistan)

इस संघर्ष के बाद पाकिस्तान सरकार ने आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल की उपाधि दी। यह सम्मान पाकिस्तान के इतिहास में बेहद दुर्लभ है और इससे उनके कद में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई।

27वां संशोधन और अभूतपूर्व शक्ति (27th Amendment Pakistan CDF Asim Munir)

2025 में पाकिस्तान की संसद ने 27वां संविधान संशोधन पारित किया गया, जिसके तहत चीफ ऑफ डिफेंस फोर्स (CDF) का पद बनाया गया। यह पद भी आसिम मुनीर को दिया गया। इस संशोधन के तहत सेना, वायुसेना और नौसेना तीनों को एकीकृत कमान के अधीन लाया गया। साथ ही आसिम मुनीर का कार्यकाल बढ़ाकर 2030 तक कर दिया गया, फील्ड मार्शल का पद आजीवन बना दिया गया और उन्हें पद से हटाने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की शर्त तय की गई। इन सभी बदलावों ने उनकी शक्ति और प्रभाव को काफी बढ़ा दिया, जिससे वे पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बनकर उभरे हैं।

ट्रंप से करीबी के बाद मिली वैश्विक पहचान (Asim Munir Global Mediator US Iran Peace Talks)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी नजदीकी ने उन्हें वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई। व्हाइट हाउस में दोनों की मुलाकात और ट्रंप द्वारा उन्हें महत्वपूर्ण नेता बताना इस बात का संकेत था कि पाकिस्तान की भूमिका फिर से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ रही है। यही नहीं, पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित भी किया जो इस कूटनीतिक रिश्ते की गहराई को दिखाता है।

Asim Munir
वॉशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस में सितंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल Asim Munir। (फोटो: Asim Munir/X)

अमेरिका से सैन्य सहयोग और भरोसे की नींव (US Pakistan Military Cooperation CENTCOM)

पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग भी बढ़ाया। यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के साथ मिलकर एक बड़े आतंकी संदिग्ध को पकड़ने की कार्रवाई को अमेरिका में सराहा गया। इससे दोनों देशों के बीच विश्वास मजबूत हुआ और मुनीर की साख भी बढ़ी।

अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका (US Iran Peace Talks 2026)

2026 में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान पाकिस्तान ने एक अहम कूटनीतिक भूमिका निभाई है। जिसमें आसिम मुनीर केंद्र में रहे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पर्दे के पीछे चल रही बातचीत की जिम्मेदारी मुनीर को सौंपी थी।

रिपोर्ट्स बताती हैं मुनीर ने अमेरिकी नेतृत्व जैसे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। 6 अप्रैल 2026 को तो वे पूरी रात दोनों पक्षों के साथ बातचीत में जुटे रहे ताकि तनाव कम किया जा सके।

इसी प्रयास के चलते इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच आमने-सामने की बातचीत भी संभव हो पाई थी जो अपने आप में एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि मानी गई। हालांकि इन बातचीत से कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका, लेकिन संवाद की प्रक्रिया को जारी रखने में यह पहल अहम रही है।

बाद में 15 अप्रैल 2026 को असीम मुनीर ने तेहरान का दौरा भी किया इसके पीछे का कारण अगले दौर की बातचीत के लिए जमीन तैयार की जा सके। इस पूरी प्रक्रिया ने पाकिस्तान और खासतौर पर मुनीर को क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में स्थापित कर दिया।

सऊदी-ईरान के बीच संतुलन की कूटनीति (Pakistan Saudi Iran Balancing Diplomacy Asim Munir)

पाकिस्तान की विदेश नीति में सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि वह एक साथ सऊदी अरब और ईरान दोनों के साथ संतुलन बनाए रखे। एक तरफ पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया जो उसकी सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए अहम है। वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ उसके भौगोलिक और ऐतिहासिक संबंध भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

इस जटिल संतुलन को बनाए रखने में आसिम मुनीर की भूमिका केंद्रीय रही है। उन्होंने दोनों पक्षों से संवाद बनाए रखा और यह संदेश देने की कोशिश की कि पाकिस्तान किसी एक खेमे में पूरी तरह नहीं जाएगा। यही रणनीति पाकिस्तान को क्षेत्रीय राजनीति में एक ऐसे देश के रूप में पेश करती है जो टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देता है।

इजरायल फैक्टर और क्षेत्रीय समीकरण

मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। ऐसे माहौल में हर देश को अपनी रणनीति बेहद सावधानी से तय करनी पड़ रही है।

भारत और इजरायल के बीच मजबूत रक्षा सहयोग भी इस समीकरण को और जटिल बनाता है। पाकिस्तान के रणनीतिक हलकों में यह चिंता जताई जाती रही है कि अगर ईरान कमजोर होता है तो इसका सीधा असर उसकी पश्चिमी सीमा पर पड़ेगा। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे पाकिस्तान के लिए सुरक्षा चुनौतियां बढ़ सकती हैं और क्षेत्र में नए समीकरण बन सकते हैं।

घरेलू राजनीति और सत्ता का केंद्रीकरण (Asim Munir Power Consolidation Pakistan Politics)

आसिम मुनीर के उभार को सिर्फ अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से नहीं समझा जा सकता है। इसके पीछे पाकिस्तान की घरेलू राजनीति भी एक बड़ा कारण रही है।

9 मई 2023 को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। कई जगहों पर सेना से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। इसके बाद सेना ने कड़ा रुख अपनाया और बड़े स्तर पर कार्रवाई की, जिससे राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए।

इसके साथ ही बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में बढ़ती हिंसा, प्रेस की आजादी पर उठते सवाल और विपक्ष की लगातार आलोचना, इन सबने यह दिखाया कि देश के भीतर हालात आसान नहीं हैं। ऐसे माहौल में सेना की भूमिका और भी मजबूत होती चली गई।

मुनीर की ताकत पर देश में दो राय

आसिम मुनीर की बढ़ती ताकत को लेकर पाकिस्तान के भीतर दो तरह की राय देखने को मिलती है। एक तरफ आलोचकों का कहना है कि इतनी ज्यादा शक्ति एक ही व्यक्ति के हाथ में होना लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है। उनका मानना है कि इससे नागरिक संस्थाएं कमजोर होती हैं और फैसलों में पारदर्शिता कम होती है।

वहीं दूसरी ओर, उनके समर्थकों का तर्क है कि मौजूदा वैश्विक हालात में एक मजबूत और निर्णायक नेतृत्व जरूरी है। उनका मानना है कि मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति मजबूत की है और देश को एक स्पष्ट दिशा मिली है।

बढ़ता प्रभाव और आगे की राह

आसिम मुनीर की उभरती ताकत सिर्फ सैन्य नेतृत्व तक सीमित नहीं रही है। यह पाकिस्तान के भीतर बदलते सत्ता संतुलन और क्षेत्रीय राजनीति का भी संकेत देता है। भारत के साथ संघर्ष के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा, वहीं अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में ला दिया है।

हालांकि, उनकी बढ़ती शक्ति को लेकर देश के भीतर सवाल भी उठ रहे हैं खासतौर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले समय में उनका प्रभाव पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों को किस दिशा में ले जाता है।

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