यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती के तहत चयनित 1985 रंगरूट रविवार सुबह पासिंग आउट परेड के साथ प्रक्षिण पूरा हो गया। पुलिस लाइन में पासिंग आउट परेड में रंगरूटों ने संविधान के प्रति निष्ठा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की शपथ लेकर आधिकारिक रूप से यूपी पुलिस का हिस्सा बन गए। नौ माह के प्रशिक्षण के बाद यह सिपाही अब थानों में तैनाती के साथ कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगे। कानपुर पुलिस के बेड़े में शामिल होंगे 1985 रंगरूट
कानपुर पुलिस लाइन में रविवार को अलग ही नजारा देखने को मिला, पासिंग आउट परेड के लिए गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस की तरह पूरे ग्राउंड को सजाया गया। इसके बाद रंगरूटों ने कदम से कदम मिलाकर पासिंग आउट परेड में शामिल हुए। मुख्य अतिथि पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने परेड को सलामी दी। इसके बाद परेड कमांडर से परिचय प्राप्त लिया। मुख्य अतिथि कमांडर के साथ फूलों से सजी जीप में बैठकर पूरे मैदान का निरीक्षण किया। परेड देखने के लिए रंगरूटों के परिजन भी दर्शक दीर्घा में अपने बच्चों को वर्दी में देखकर गर्व से सिर ऊंचा हो गया। पुलिस भर्ती परीक्षा के बाद चयनित हुए 2000 युवाओं को कानपुर और उसके आसपास जिलों में प्रशिक्षण के लिए चुना गया था। इनमें से 1985 ने ही प्रशिक्षण के लिए आमद कराई। इनमें से 600 को कानपुर पुलिस लाइंस जबकि शेष को 37वीं वाहिनी पीएसी, इटावा, कानपुर देहात, उन्नाव और बरेली में प्रशिक्षित किया गया। 17 से 25 मार्च तक इन सभी रंगरूटों की इनडोर परीक्षा कराई गई जबकि आउटडोर परीक्षा 26 मार्च से 8 अप्रैल तक कराई गई। नौ अप्रैल को साक्षात्कार हुआ और अब पासिंग आउट परेड के बाद यह सभी रंगरूट रविवार को यूपी पुलिस का हिस्सा बन गए हैं। कानपुर पुलिस के बेड़े में शामिल होंगे 1985 रंगरूट लंबे समय से स्टाफ की कमी से जूझ रही पुलिस को अब बड़ा सहारा मिलने जा रहा है। 1985 नए सिपाहियों की तैनाती से थानों में बल बढ़ेगा और कानून-व्यवस्था को नई धार मिलेगी। थानों में स्टाफ की कमी के कारण पुलिसकर्मियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां थीं, जिससे गश्त और अपराध नियंत्रण प्रभावित होता था। नई भर्ती के बाद थानों में खाली पद भरेंगे और बीट पुलिसिंग को मजबूती मिलेगी। इससे मोहल्लों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ेगी, जिससे अपराधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। त्योहारों, धरना-प्रदर्शन और वीआईपी ड्यूटी के दौरान अब अतिरिक्त फोर्स की समस्या काफी हद तक दूर होगी। पुलिसकर्मियों पर काम का दबाव कम होने से उनकी कार्यक्षमता और प्रतिक्रिया समय बेहतर होगा। इन नए सिपाहियों को मॉडर्न पुलिसिंग, साइबर क्राइम, डिजिटल सर्विलांस और नए कानूनों की ट्रेनिंग दी गई है। नए जमाने के सिपाही एमएससी, बीटेक और बीएड पास पुलिस महकमे में रविवार को शामिल हो रहे नए सिपाही अब सिर्फ डंडे तक सीमित नहीं हैं। किताब, कानून और कंप्यूटर, तीनों पर उनकी मजबूत पकड़ दिख रही है। आरक्षी नागरिक पुलिस सीधी भर्ती में इस बार आई बड़ी खेप ने पुलिसिंग की तस्वीर बदलने के संकेत दे दिए हैं। खास बात यह है कि इन रंगरूटों में महज 10 फीसदी ही इंटरमीडिएट पास हैं जबकि अधिकांश एमसीए, बीटेक, बीएससी, एमएससी और बीएड डिग्रीधारक हैं। अधिकारियों का मानना है कि उच्चशिक्षित युवाओं की यह नई खेप थानों में कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ जटिल मामलों की जांच को भी आसान बनाएगी। खासकर साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण में इनकी भूमिका बेहद अहम होगी। इससे पुलिस की जांच प्रक्रिया तेज और सटीक होने की संभावना है। इसके साथ ही कानून की पढ़ाई पर भी विशेष जोर दिया गया है। इन नए सिपाहियों को नए आपराधिक कानूनों, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और प्रक्रिया संबंधी प्रावधानों की जानकारी देकर अपडेट किया गया है, ताकि मौके पर ही सही और कानूनी कार्रवाई की जा सके।


