गयाजी का पुराना राजबस डिपो बदहाल स्थिति में है। चारों तरफ गंदगी फैली है। मुख्य द्वार से लेकर पैसेंजर हॉल तक गंदगी रहती है। पूरे परिसर में दुर्गंध फैली है। सबसे बदहाल स्थिति यात्री कक्ष की है, जहां कुर्सियां और बेंच टूटी-फूटी है। लोगों के लिए बैठने तक की जगह नहीं है। परिसर में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बसों के इंतजार में घंटों बैठने वाले यात्रियों को गंदगी के बीच खड़े रहना पड़ता है। डिपो में पानी के लिए भी अच्थी व्यवस्था नहीं है। यात्रियों का आरोप है कि यहां जो सप्लाई का पानी आ रहा है, उसमें भी कचरा और गंदगी है। पानी का रंग और स्वाद ऐसा है कि उसे पीना बीमारियों को सीधा आमंत्रण देने जैसा है। किसी निजी कंपनी की ओर से लगाए गए एक साधन के भरोसे जैसे-तैसे काम चल रहा है, लेकिन परिवहन विभाग की ओर से शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं दिखती। बदहाली पर जताया आक्रोश बिहार विकलांग संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष और उसास देवरा-सिंघड़ा रूट के यात्री कृष्णा यादव ने डिपो की बदहाली पर आक्रोश व्यक्त किया। उनका मानना है कि गया एक अंतरराष्ट्रीय बाजार और धार्मिक नगरी है। यहां बोधगया आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालु और दूर-दराज के यात्री आते हैं। कहा जाता है कि गया से संदेश पूरे देश में जाता है लेकिन आज इस राजबस पड़ाव को देखकर क्या संदेश जा रहा होगा। बैठने की जगह टूटी-फूटी है, चारों तरफ गंदगी का अंबार है। सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग
यात्रियों ने जिला प्रशासन एवं परिवहन विभाग से राजबस डिपो परिसर में नियमित साफ-सफाई, कचरा निष्पादन और यात्री सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि गयाजी जैसे महत्वपूर्ण जिला मुख्यालय के बस डिपो की यह दुर्दशा न केवल गयाजी की छवि खराब कर रही है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा है। यदि समय रहते सफाई और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आगामी बरसात के मौसम में स्थिति और भयानक हो जाएगी। हालांकि बीते वर्ष अत्याधुनिक बस स्टैंड बनाए जाने की घोषणा प्रदेश सरकार की ओर से की गई है, लेकिन नए के भरोसे पुराने की अनदेखी यात्रियों पर इन दिनों भारी पड़ रही है। गयाजी का पुराना राजबस डिपो बदहाल स्थिति में है। चारों तरफ गंदगी फैली है। मुख्य द्वार से लेकर पैसेंजर हॉल तक गंदगी रहती है। पूरे परिसर में दुर्गंध फैली है। सबसे बदहाल स्थिति यात्री कक्ष की है, जहां कुर्सियां और बेंच टूटी-फूटी है। लोगों के लिए बैठने तक की जगह नहीं है। परिसर में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बसों के इंतजार में घंटों बैठने वाले यात्रियों को गंदगी के बीच खड़े रहना पड़ता है। डिपो में पानी के लिए भी अच्थी व्यवस्था नहीं है। यात्रियों का आरोप है कि यहां जो सप्लाई का पानी आ रहा है, उसमें भी कचरा और गंदगी है। पानी का रंग और स्वाद ऐसा है कि उसे पीना बीमारियों को सीधा आमंत्रण देने जैसा है। किसी निजी कंपनी की ओर से लगाए गए एक साधन के भरोसे जैसे-तैसे काम चल रहा है, लेकिन परिवहन विभाग की ओर से शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं दिखती। बदहाली पर जताया आक्रोश बिहार विकलांग संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष और उसास देवरा-सिंघड़ा रूट के यात्री कृष्णा यादव ने डिपो की बदहाली पर आक्रोश व्यक्त किया। उनका मानना है कि गया एक अंतरराष्ट्रीय बाजार और धार्मिक नगरी है। यहां बोधगया आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालु और दूर-दराज के यात्री आते हैं। कहा जाता है कि गया से संदेश पूरे देश में जाता है लेकिन आज इस राजबस पड़ाव को देखकर क्या संदेश जा रहा होगा। बैठने की जगह टूटी-फूटी है, चारों तरफ गंदगी का अंबार है। सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग
यात्रियों ने जिला प्रशासन एवं परिवहन विभाग से राजबस डिपो परिसर में नियमित साफ-सफाई, कचरा निष्पादन और यात्री सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि गयाजी जैसे महत्वपूर्ण जिला मुख्यालय के बस डिपो की यह दुर्दशा न केवल गयाजी की छवि खराब कर रही है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा है। यदि समय रहते सफाई और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आगामी बरसात के मौसम में स्थिति और भयानक हो जाएगी। हालांकि बीते वर्ष अत्याधुनिक बस स्टैंड बनाए जाने की घोषणा प्रदेश सरकार की ओर से की गई है, लेकिन नए के भरोसे पुराने की अनदेखी यात्रियों पर इन दिनों भारी पड़ रही है।


