जिले में कुपोषण से लड़ने के लिए डॉक्टर हैं। दवा है। विशेष पोषाहार है। एंबुलेंस है। बच्चों के साथ उनकी माताओं के रहने-खाने तक की मुफ्त व्यवस्था है। इसके बावजूद कुपोषित बच्चों को उपचार व्यवस्था से जोड़ने में सिस्टम पिछड़ता दिख रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में 6 माह से 54 माह आयु वर्ग के 2 लाख 51 हजार 591 बच्चों में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 5,473 चिन्हित है। जनवरी से 26 मई तक इनमें से सिर्फ 60 बच्चों को ही सदर अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जा सका। भास्कर की पड़ताल में 12 बेड क्षमता वाले पोषण पुनर्वास केंद्र में मात्र चार बच्चे भर्ती मिले। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब हजारों बच्चे कुपोषित हैं तो उपचार और पोषण सुधार के लिए बनाई गई विशेष व्यवस्था तक वे क्यों नहीं पहुंच पा रहे हैं। सबसे कम बछवाड़ा से भेजे गए हैं बच्चे: जिले में पहले पोषण पुनर्वास केंद्र बलिया में संचालित होता था। बाद में अधिक पहुंच और बेहतर सुविधा के उद्देश्य से इसे सदर अस्पताल परिसर में स्थानांतरित किया गया। उम्मीद थी कि जिला मुख्यालय में केंद्र होने से अधिक संख्या में बच्चे लाभान्वित होंगे, लेकिन आंकड़े इसके विपरीत तस्वीर पेश कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार कुपोषित बच्चों की पहचान, रेफरल और भर्ती प्रक्रिया में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिख रही है। कई प्रखंडों से बहुत कम संख्या में बच्चों को एनआरसी भेजा जा रहा है। गंगा पार स्थित शाम्हो को छोड़ दिया जाए तो बछवाड़ा प्रखंड से सबसे कम बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा गया है। जबकि सिविल सर्जन और जिला कार्यक्रम प्रबंधक स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें भी होती हैं। कुल बच्चे (6 माह से 54 माह) : 2,51,591
कुपोषित बच्चे : 5,473
कुपोषण दर : 2.17%
जनवरी-26 मई तक एनआरसी में भर्ती : 60
वर्तमान भर्ती : 4
एनआरसी की क्षमता : 12 बेड
शिशु रोग विशेषज्ञ : 6 जिले में कुपोषण से लड़ने के लिए डॉक्टर हैं। दवा है। विशेष पोषाहार है। एंबुलेंस है। बच्चों के साथ उनकी माताओं के रहने-खाने तक की मुफ्त व्यवस्था है। इसके बावजूद कुपोषित बच्चों को उपचार व्यवस्था से जोड़ने में सिस्टम पिछड़ता दिख रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में 6 माह से 54 माह आयु वर्ग के 2 लाख 51 हजार 591 बच्चों में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 5,473 चिन्हित है। जनवरी से 26 मई तक इनमें से सिर्फ 60 बच्चों को ही सदर अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जा सका। भास्कर की पड़ताल में 12 बेड क्षमता वाले पोषण पुनर्वास केंद्र में मात्र चार बच्चे भर्ती मिले। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब हजारों बच्चे कुपोषित हैं तो उपचार और पोषण सुधार के लिए बनाई गई विशेष व्यवस्था तक वे क्यों नहीं पहुंच पा रहे हैं। सबसे कम बछवाड़ा से भेजे गए हैं बच्चे: जिले में पहले पोषण पुनर्वास केंद्र बलिया में संचालित होता था। बाद में अधिक पहुंच और बेहतर सुविधा के उद्देश्य से इसे सदर अस्पताल परिसर में स्थानांतरित किया गया। उम्मीद थी कि जिला मुख्यालय में केंद्र होने से अधिक संख्या में बच्चे लाभान्वित होंगे, लेकिन आंकड़े इसके विपरीत तस्वीर पेश कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार कुपोषित बच्चों की पहचान, रेफरल और भर्ती प्रक्रिया में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिख रही है। कई प्रखंडों से बहुत कम संख्या में बच्चों को एनआरसी भेजा जा रहा है। गंगा पार स्थित शाम्हो को छोड़ दिया जाए तो बछवाड़ा प्रखंड से सबसे कम बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा गया है। जबकि सिविल सर्जन और जिला कार्यक्रम प्रबंधक स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें भी होती हैं। कुल बच्चे (6 माह से 54 माह) : 2,51,591
कुपोषित बच्चे : 5,473
कुपोषण दर : 2.17%
जनवरी-26 मई तक एनआरसी में भर्ती : 60
वर्तमान भर्ती : 4
एनआरसी की क्षमता : 12 बेड
शिशु रोग विशेषज्ञ : 6


